'मैं तो पूरी सफाई रखती हूं, फिर भी बार-बार UTI क्यों हो जाता है?' डॉक्टर ने बताई इसकी असल वजह
महिलाओं में बार-बार होने वाले यूरिन इन्फेक्शन का कारण सिर्फ साफ-सफाई की कमी नहीं, बल्कि हार्मोनल बदलाव भी हो सकता है। आइए, डिटेल में जानते हैं इस बारे ...और पढ़ें

बार-बार UTI होने का असली कारण (Image Source: AI-Generated)
HighLights
बार-बार UTI का कारण सिर्फ साफ-सफाई नहीं
एस्ट्रोजन की कमी से UTI का खतरा बढ़ता है
मेनोपॉज में हार्मोनल बदलाव मुख्य वजह होते हैं
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। "साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखती हूं, फिर मुझे बार-बार UTI क्यों होता है?" यह सवाल 47 साल की एक महिला का था, जो पिछले डेढ़ साल से बार-बार होने वाले यूरिन इन्फेक्शन से परेशान थीं।
हर बार जब वह दवा लेतीं, तो उन्हें कुछ समय के लिए आराम मिल जाता, लेकिन कुछ ही महीनों बाद फिर से वही समस्या लौट आती- पेशाब में जलन, बार-बार वॉशरूम भागना और असहजता।
उन्हें बार-बार यही लगता कि शायद उनकी पर्सनल हाइजीन में ही कोई कमी रह गई है, लेकिन जब उनकी मेडिकल जांच हुई, तो जो बात सामने आई उसने इस पूरी समस्या को देखने का नजरिया ही बदल दिया।

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सफाई नहीं, बल्कि शरीर में छिपा था असली कारण
जांच में पता चला कि वह महिला मेनोपॉज के करीब थीं और उनके शरीर में 'एस्ट्रोजन' हार्मोन का स्तर धीरे-धीरे कम हो रहा था।
अक्सर हम यही मान लेते हैं कि UTI सिर्फ और सिर्फ साफ-सफाई न रखने का नतीजा है, लेकिन मेडिकल साइंस के अनुसार, महिलाओं में बार-बार होने वाले UTI के पीछे उनके शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव एक बहुत बड़ी वजह हो सकते हैं, जिस पर अक्सर किसी का ध्यान ही नहीं जाता।
एस्ट्रोजन हार्मोन और UTI का क्या है कनेक्शन?
महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन एक बहुत ही अहम रोल निभाता है। यह न सिर्फ रिप्रोडक्टिव हेल्थ को दुरुस्त रखता है, बल्कि यूरिनरी ट्रैक्ट और वैजाइनल हेल्थ की भी सुरक्षा करता है।
- जब हार्मोन सामान्य होता है: एस्ट्रोजन का स्तर सही होने पर वैजाइना में 'लैक्टोबैसिलस' नाम के अच्छे और फायदेमंद बैक्टीरिया पर्याप्त मात्रा में होते हैं। ये बैक्टीरिया इन्फेक्शन फैलाने वाले कीटाणुओं को पनपने से रोकते हैं।
- जब हार्मोन कम होने लगता है: मेनोपॉज, पेरिमेनोपॉज, डिलीवरी के बाद या कुछ अन्य हार्मोनल समस्याओं के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर गिर सकता है। इससे यूरिनरी ट्रैक्ट और वैजाइना की सुरक्षा परत कमजोर पड़ जाती है और अच्छे बैक्टीरिया कम होने लगते हैं। इसका फायदा उठाकर इन्फेक्शन वाले बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं और UTI का खतरा बढ़ जाता है।
स्टडीज भी इस बात की ओर इशारा करती हैं कि एस्ट्रोजन की कमी से शरीर की इन्फेक्शन से लड़ने की नेचुरल ताकत पर बुरा असर पड़ता है।
कब माना जाता है 'बार-बार' होने वाला UTI?
अगर किसी महिला को 6 महीने में 2 या उससे ज्यादा बार यूटीआई हो, या 1 साल में 3 या उससे ज्यादा बार यूटीआई हो... तो इसे 'रिकरेंट यूटीआई' कहा जाता है।
ऐसी स्थिति में बार-बार सिर्फ एंटीबायोटिक्स खा लेना ही सही इलाज नहीं है। डॉक्टर द्वारा यह जांचना भी जरूरी हो जाता है कि कहीं इसके पीछे हार्मोनल कारण, डायबिटीज या ब्लैडर के पूरी तरह खाली न होने जैसी समस्याएं तो नहीं हैं।
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खुद को दोष देना बंद करें
अगर आप भी बार-बार होने वाले यूटीआई का शिकार हो रही हैं, तो हर बार अपनी साफ-सफाई को ही दोष न दें। इसे महज एक साधारण इन्फेक्शन समझने की भूल न करें, क्योंकि यह आपके शरीर में हो रहे जैविक और हार्मोनल बदलावों का संकेत भी हो सकता है।
सही समय पर इसकी सटीक जांच और सही मेडिकल सलाह आपके यूरिनरी, वैजाइनल और ओवरऑल रिप्रोडक्टिव हेल्थ को लंबे समय तक सेहतमंद बनाए रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकती है।
- डॉ. आकांक्षा शर्मा (कंसल्टेंट IVF और रिप्रोडक्टिव मेडिसिन, मैक्स मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पंचशील पार्क, नई दिल्ली) से बातचीत पर आधारित
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