पेशाब में जलन या बार-बार टॉयलेट आना? गर्मी में इग्नोर न करें ये लक्षण, हो सकता है गंभीर यूरिन इन्फेक्शन
गर्मी का मौसम लू के साथ-साथ UTI की समस्या भी साथ लाता है। बढ़ते तापमान और उमस की वजह से यह समस्या बढ़ जाती है। ...और पढ़ें

गर्मियों में UTI से बचने के लिए बरतें ये सावधानी (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गर्मियों की चिलचिलाती धूप और पसीना सिर्फ डिहाइड्रेशन या लू का ही कारण नहीं बनते, बल्कि एक और तकलीफदेह परेशानी को दावत देते हैं। इस मौसम में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। अक्सर गर्मियों में शरीर में पानी की कमी होने से यह इन्फेक्शन तेजी से पनपने लगता है।
वैसे तो यह समस्या महिलाओं में सबसे ज्यादा देखी जाती है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही पुरुषों को भी इसका शिकार बना सकती है। आइए डॉ. दीप्ति शर्मा (ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से समझते हैं कि आखिर गर्मियों में UTI का खतरा इतना क्यों बढ़ जाता है और इससे बचने के तरीके क्या हैं।
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(Picture Courtesy: Freepik)
गर्मी में क्यों बढ़ता है इन्फेक्शन का खतरा?
- डिहाइड्रेशन- गर्मी में शरीर से पसीने के रूप में फ्लूएड बाहर निकल जाता है। अगर आप सही मात्रा में पानी नहीं पीते, तो पेशाब कम बनता है। पेशाब का मुख्य काम शरीर से बैक्टीरिया को बाहर निकालना है; जब पेशाब कम आता है, तो बैक्टीरिया को यूरिनरी ट्रैक्ट में पनपने लग जाते हैं।
- पसीना और उमस- ज्यादा पसीना आने और सिंथेटिक कपड़े पहनने से प्राइवेट पार्ट्स के आसपास नमी बनी रहती है। यह नमी E. coli जैसे बैक्टीरिया को तेजी से बढ़ाता है, जो इन्फेक्शन का सबसे आम कारण है।
- गंदा पानी और गीले कपड़े- गर्मियों में लोग स्विमिंग पूल का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। अगर पूल का पानी साफ न हो या आप गीले कपड़ों में ज्यादा देर तक रहें, तो इन्फेक्शन का खतरा दोगुना हो जाता है।
प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए यूटीआई भी गंभीर हो सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान हल्का इन्फेक्शन भी समय से पहले लेबर या जन्म के समय बच्चे के कम वजन जैसी परेशानियों का कारण बन सकता है।
पहचानें यूटीआई के शुरुआती लक्षण
इसके लक्षण शुरुआत में मामूली लग सकते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है-
- पेशाब के दौरान जलन- पेशाब करते समय तेज जलन या दर्द महसूस होना।
- बार-बार पेशाब आना- बार-बार बाथरूम जाने की इच्छा होना, लेकिन पेशाब बहुत कम मात्रा में आना।
- पेट के निचले हिस्से में दर्द- एब्डोमेन में भारीपन या ऐंठन महसूस होना।
- पेशाब के रंग में बदलाव- पेशाब का धुंधला दिखना या उससे तेज गंध आना।
- बुखार और थकान- इन्फेक्शन बढ़ने पर हल्का बुखार या पीठ के निचले हिस्से में दर्द भी हो सकता है।
बचाव के लिए क्या करें?
- हाइड्रेटेड रहें- दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। यह बैक्टीरिया को फ्लश करने का सबसे आसान तरीका है।
- हाइजीन का ख्याल रखें- गर्मी के मौसम में सूती और ढीले कपड़े पहनें, पसीना आसाीन से सूख जाए। वर्कआउट या स्विमिंग के तुरंत बाद कपड़े बदलें।
- पेशाब न रोकें- जब भी महसूस हो, तुरंत टॉयलेट जाएं।
- हाइजीन- अगर पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल करना पड़े, तो हाइजीन का खास ध्यान रखें।