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    दिल की बीमारियों को दूर रखेंगी अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की ये 10 बातें, तुरंत करें लाइफस्टाइल में शामिल

    Updated: Thu, 23 Apr 2026 08:20 AM (IST)

    लगातार बैठकर काम करना, जंक फूड और नींद की कमी दिल के लिए घातक साबित हो रहे हैं। बचाव के लिए इनमें सुधार जरूरी है। ...और पढ़ें

    साइलेंट किलर बन रहा है बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल (Picture Courtesy: Freepik)

    साइलेंट किलर बन रहा है बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल (Picture Courtesy: Freepik)

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मौजूदा समय में प्रदूषण और जीवन शैली में बदलाव के कारण दिल की बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं। हर साल दिल की बीमारियों के कारण लाखों लोगों की मौत हो जाती है।

    बुजुर्गों से लेकर युवा, यहां तक कि बच्चे भी इसका शिकार देखे जा रहे हैं। आहार और दिनचर्या की गड़बड़ी के साथ तनाव और शारीरिक गतिविधियों में कमी ने दिल को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।

    विशेषज्ञ कहते हैं कि हमारी गड़बड़ आदतों ने हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्राल की समस्या को बढ़ा दिया है, जो दिल की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कई घंटों तक कुर्सी पर बैठ कर काम करते रहने, जंक फूड खाने, देर रात तक जागने व तनावभरी दिनचर्या ने कोलेस्ट्राल की समस्या को बढ़ा दिया है।

    कोलेस्ट्राल धीरे-धीरे धमनियों में जमा होता रहता है और नसों को संकरा कर देता है। इससे दिल तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता है । इस कारण हार्ट अटैक, स्ट्रोक, ब्लाकेज जैसी समस्याओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

    Reasons of heart disease

    इसके लिए अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) ने 10 जरूरी बातें बताई हैं जिसे जानना चाहिए-

    • स्वस्थ खानपान सबसे जरूरी है। सब्जियां-फलों, साबुत अनाज, बीन्स, नट्स - सीड्स व लीन प्रोटीन से भरपूर चीजें खाएं। प्रोसेस्ड फूड आइटम्स कम से कम खाएं क्योंकि इनमें संतृप्त वसा, ज्यादा चीनी व सोडियम होता है ।
    • जीवनशैली में बदलाव करके कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकते हैं। वजन को नियंत्रित रखें, लगातार शारीरिक गतिविधि, तंबाकू से बचना, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को नियंत्रित रखना जरूरी है। रोजाना 7-9 घंटे की आरामदायक नींद आवश्यक है।
    • बच्चों में हाई कोलेस्ट्राल की समस्या आनुवंशिक कारणों या अस्वास्थ्यकर आदतों की वजह से हो सकती है। अब 9-11 साल के बच्चों को कोलेस्ट्राल स्क्रीनिंग की सलाह दी जाती है।
    • हाई कोलेस्ट्राल बचपन और किशोरावस्था से ही दिल के जोखिमों को बढ़ाने लगता है। जिन लोगों में दिल की बीमारियों का खतरा अधिक है, उन्हें जांच करवाना जरूरी है।
    • जिन लोगों के माता-पिता को दिल की बीमारी रही है, ऐसे बच्चों-वयस्कों को अपने डॉक्टर से सलाह लेकर नियमित रूप से हृदय की जांच और जरूरी टेस्ट कराते रहने चाहिए।
    • कुछ खास समस्याओं जैसे टाइप 2 डायबिटीज, कार्डियो किडनी मेटाबालिक सिंड्रोम, एचआइवी इंफेक्शन, कैंसर के साथ हाई कोलेस्ट्राल वाले लोगों को दिल की बीमारी या स्ट्रोक होने का खतरा ज्यादा हो सकता है। कोलेस्ट्राल कम करने से दिल की बीमारी का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।
    • अगले 10-20 वर्षों में दिल की बीमारी या स्ट्रोक होने का खतरा तो नहीं है, इसका अंदाजा लगाने के लिए डाक्टर प्रिवेंट नाम के एक नए रिस्क एस्टीमेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह उपकरण उम्र व बीपी की रीडिंग, कोलेस्ट्राल टेस्ट और दूसरी जानकारियों के आधार पर खतरे का पता लगाती है ।
    • कोलेस्ट्राल को कंट्रोल करने के लिए आहार पूरक (डाइटरी सप्लीमेंट) लेने की सलाह नहीं दी जाती है। अगर आप कोई सप्लीमेंट लेते हैं, तो डाक्टर से सलाह ले लें।
    • महिलाओं में प्रजनन से जुड़ी कुछ स्थितियां दिल की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती हैं। खतरे को समझने और कोलेस्ट्राल, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर व बीएमआइ जैसी स्थितियों की जानकारी विशेषज्ञ के साथ साझा करें। कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने के लिए दवा भी दी जा सकती है।