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    गर्मी में पसीना और लो बीपी कैसे बन सकता है जानलेवा? कार्डियोलॉजिस्ट से जानें बचाव के तरीके

    Updated: Mon, 16 Mar 2026 07:29 PM (IST)

    हर बढ़ते दिन के साथ पारा भी ऊपर जाने लगा है, ऐसे में सेहत को लेकर चुनौतियों बढ़ेंगी, खासकर ब्लड प्रेशर को लेकर इन दिनों थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत होती ...और पढ़ें

    लो बीपी और डिहाइड्रेशन से बचाव के उपाय (Picture Credit- AI Generated)

    लो बीपी और डिहाइड्रेशन से बचाव के उपाय (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. गर्मी में पसीना और डिहाइड्रेशन हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं

    2. एसी का अत्यधिक उपयोग शरीर को गर्मी सहने में अक्षम बनाता है

    3. नियमित रक्तचाप जांच और संतुलित आहार हृदय के लिए महत्वपूर्ण

    सीमा झा, नई दिल्ली। हृदय से जुड़ी समस्या अब हर उम्र में हो रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019–2021) के अनुसार, भारत में प्रजनन आयु वर्ग (15 से 54 वर्ष) के हर पांच में से लगभग एक व्यक्ति को हाइपरटेंशन है। क्या आप जानते हैं कि बढ़ता तापमान न केवल जन-जीवन को अस्त-व्यस्त बना सकता है बल्कि यह चुपके से हृदय के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है?

    इसलिए मार्च में ही मई जैसी गर्मी के एहसास के बीच आने वाले दिनों में पारा बढ़ने पर कैसी होनी चाहिए आपकी तैयारी, यही समय है कि हम यह अच्छी तरह समझें। हालांकि हमारा शरीर मौसम के अनुकूल स्वयं ही बदलाव करने में माहिर है, पर उचित सावधानी न रखी जाए तो यही बन सकती है बड़ी मुसीबत।

    वास्तव में पारा बढ़ने पर रक्तवाहिनियां शरीर को ठंडा यानी सामान्य तापमान में लाने के प्रयास में जुट जाती हैं। इस प्रक्रिया में रक्तचाप में उतार-चढ़ाव होता है और शरीर से पसीना भी अधिक निकलता है। यही वह चीज है, जिसका गर्मी के मौसम में सर्वाधिक ध्यान रखना है।

    दरअसल, पसीना निकलने से शरीर में पानी की कमी या डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है जिससे बचना है। अन्यथा रक्तचाप सामान्य से बहुत कम होने से नसों में थक्के जमने की आशंका रहती है। हृदय को रक्त पंप करने में समस्या आती है, उस पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है जो आपातकाल की स्थिति यानी हार्ट अटैक या स्ट्रोक की स्थिति उत्पन्न कर सकता है।

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    एसी बिना रहने की बनाएं आदत

    गर्मी शुरू होते ही घर से लेकर दफ्तर तक लगातार एसी चलने लगता है। कुछ लोग एसी का तापमान बहुत कम रखना पसंद करते हैं। अगर रक्तचाप की समस्या है तो ऐसा करने से बचना चाहिए। अगर लंबे समय तक एयरकंडीशनर में कामकाज करना पड़े तो प्रयास करें कि इसे एक सामान्य तापमान 24 डिग्री सेल्सियस पर ही सेट करें। बता दें कि अधिक कूलिंग रखने से आपको प्यास कम लग सकती है।

    इससे डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है। शरीर का पसीना बाहर नहीं निकलने से सोडियम यानी नमक शरीर में ही बना रहता है। यह हृदयरोगियों के लिए काफी जोखिम भरा हो सकता है। एसी में निरंतर रहने के आदी होने से आप शारीरिक गतिविधि भी कम करने लगते हैं या इससे बचना चाहते हैं। साथ ही यह गर्मी सहने की क्षमता को कम करने के साथ हृदय की सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

    उच्च रक्तचाप और हाइपरटेंशन

    सामान्य रक्तचाप 120/80 होना चाहिए, पर हाइपरटेंशन है, तो यह 140/90 के आसपास रहता है। एक रीडिंग में उच्च रक्तचाप है तो यह हाइपरटेंशन हो आवश्यक नहीं। सात दिन लगातार मापने के बाद यदि तीन दिन या इससे अधिक समय तक उच्च रक्तचाप रहे तो आप इसके चपेट में हो सकते हैं।

    बीपी की जांच जरूरी

    सर्दी में दिल के मरीजों को कई प्रकार की सावधानी बरतनी होती है, तो गर्मी में भी अलग तरह की दिक्कत होती है। इसमें सबसे सामान्य है रक्तचाप का कम होना। इसके लिए आपको पानी खूब पीना चाहिए। शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। नियमित रक्तचाप जांच कराएं ताकि उसे नियंत्रण में रखने में आसानी हो। यदि हाइपरटेंशन है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह एक छुपा हुआ जोखिम है जो लापरवाही से आपको गंभीर हृदयरोग की स्थिति में पहुंचा सकता है। - डॉ. प्रवीण चंद्रा, चेयरमैन, कार्डियक केयर, मेदांता, गुरुग्राम

    खुद से दवा लेने से बचें

    गर्मी में ऐसी जगहों में जाने से परहेज करें जहां आपको अधिक गर्मी, घुटन या पसीना आने के साथ लंबे समय तक खड़ा रहना पड़े। अक्सर देखा गया है कि ऐसे में बीपी लो हो जाता है और इस कारण लोग बेहोश हो जाते हैं। वहीं, यदि आप हृदयरोग से जुड़ी समस्याओं की दवाइयां ले रहे हैं तो यह भी रक्तचाप को कम कर सकती हैं। दरअसल, इन दवाइयां का काम ही होता है आपके शरीर के अतिरिक्त द्रव को निकालना या रक्तचाप कम करना। लेकिन स्वयं से दवाइयां कम न करें। चिकित्सक से ही पता चलेगा कि आपकी वास्तविक स्थिति क्या है और कौन सी व कितनी दवा कम करनी है। - डॉ. अशोक सेठ, चेयरमैन, फोर्टिस स्कार्ट्स हार्ट इंस्टीटयूट, नई दिल्ली

    खानपान में रखें ध्यान

    • सोडियम प्लाज्मा की मात्रा, अम्ल और क्षार का संतुलन और कोशिकाओं के सामान्य कार्य के लिए जरूरी है, लेकिन इसकी अधिकता रक्तचाप बढ़ा सकती है।
    • फल सब्जी में पोटैशियम पर्याप्त होता है, हृदय की सेहत के लिए यह जरूरी है।
    • ताजे फल व सब्जियों का सेवन करें। साबूत अनाज और फलियों का सेवन अच्छा है।
    • मोटे अनाज जो इस मौसम के अनुकूल जैसे, जौ, रागी आदि सेवन करें।
    • जंक व मसालेदार खाने को न कहें। डिब्बाबंद खाना भी आपके लिए सही नहीं है।
    • अधिकतर लोग बर्फ में सुरक्षित खाद्य पदार्थ रखते हैं। इनके सेवन से शरीर में नमक की अधिकता हो सकती है।
    • ज्यादा खाने से बचें। घी, सरसों तेल जो पारं रिक रूप से अच्छे माने गए हैं, पर इनका सेवन भी सीमित मात्रा में करना चाहिए।
    • वजन कम करने के लिए खाना छोड़ने या कुछ दवाइयां लेने जैसे अचानक बदलाव शरीर पर घातक प्रभाव डाल सकते हैं।

    हाइपरटेंशन है छुपा हुआ खतरा

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के ग्लोबल रिपोर्ट ऑन हाइपरटेंशन 2025 के अनुसार, वैश्विक आबादी का तकरीबन 34 प्रतिशत हिस्सा हाइपरटेंशन से पीड़ित है। भारत में 21 करोड़ से ज्यादा वयस्क हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं। इनमें से 17 करोड़ का रक्तचाप अनियंत्रित रहता है।

    डिहाइड्रेशन से बचें

    शरीर के तामपान को स्थिर बनाने के लिए पानी पीना जरूरी है। हाइड्रेशन से हार्ट को काम करने में आसानी होती है। भारत की जलवायु ऐसी है कि यहां पसीना खूब निकलता है। नींबू पानी, पुदीना व खीरा का पानी आदि का उपयोग भी कर सकते हैं। ओआरएस का घोल भी ले सकते हैं।

    इनका भी रहे ध्यान

    • अत्यधिक गर्मी या बढ़े हुए तापमान में बाहर जाने से बचें।
    • सूती व आरामदायक कपड़ों का चुनाव करें ताकि शरीर को ठंडा रहने में मदद मिले।
    • कसरत व शारीरिक गतिविधि करते रहें।
    • स्वस्थ तनाव प्रबंधन के तरीके जानें। धूम्रपान, अल्कोहल इसके लिए सही नहीं।

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