9 साल तक बढ़ सकती है आपकी उम्र, बस सुधारें अपनी जीवनशैली, खान-पान और सोने का समय
दीर्घायु और रोगमुक्त जीवन की राह तैयार करनी है तो जीवनशैली में कुछ बदलावों के लिए संकल्प लेना होगा। लांसेट में प्रकाशित एक ताजा अध्ययन की मानें तो आहा ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
ब्रह्मानंद मिश्र, नई दिल्ली। भारत कुछ दशकों से भले ही कुपोषण की गिरफ्त से निकलता हुआ है, लेकिन अब एक नई तरह की चुनौती सामने है- बढ़ते मोटापे, डायबिटीज और अनेक गैर-संचारी (एनसीडी) रोगों की यह शहरीकरण, शिथिल जीवनशैली और हानिकारक भोजन पर बढ़ती निर्भरता की देन है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की मानें तो भारत में 60 प्रतिशत से अधिक मौतें कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों, डायबिटीज, हाइपरटेंशन और कैंसर जैसे कारणों से हो रही हैं।
ये सभी कमोबेश जीवनशैली से उपजी हुई गैर-संचारी बीमारियां हैं। रिसर्च जर्नल लांसेट में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन के अनुसार, पांच मिनट की अतिरिक्त नोंद, दो मिनट के मध्यम ति के अतिरिक्त व्यायाम और आहार में थोड़ी सी सतर्कता से ऐसे लोग अपने जीवन में एक साल और जोड़ सकते हैं, जिनकी नींद बघित है, शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं हैं और खानपान को लेकर लापरवाह हो चुके हैं। नींद, शारीरिक सक्रियता और आहार के बीच एक संतुलन बने, तो यह अलग-अलग बदलावों के जोड़ से अधिक हो जाता है।
स्वस्थ दिनचर्या का मिलेगा अधिकतम लाभ
शोध का निष्कर्ष है कि जीवन प्रत्याशा में 9.35 वर्ष और स्वस्थ जीवन अवधि में 9.46 वर्ष तक की वृद्धि के लिए 42 से 103 मिनट के व्यायाम, प्रतिदिन सात से आठ घंटे की अच्छी नोंद और स्वास्थ्यवर्धक आहार (जैसे- मछली, मोटा अनाज, सब्जी और फल आदि ) आवश्यक हैं। हालांकि, अध्ययन का मतलब यह नहीं है कि आप दो मिनट व्यायाम करें और वह मानकर चलें कि आपका लक्ष्य पूरा हो गया।
आपको 20 से 30 मिनट तक तेज और सांस फुलाने वाला व्यायाम करना चाहिए, जिसमें स्ट्रेंथ और कार्डियो दोनों शामिल हों। इसी तरह अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड, धूमपान, अल्कोहल, बाडी मास इंडेक्स, इंसम्निया, खर्राटे और दिन में सुस्ती न आए. इन सभी बातों का भी समान रूप से ध्यान रखना होगा। स्वस्थ जीवन ही संतुलित और व्यवस्थित दिनचर्या पर ही टिका है, इसे समय रहते हमें स्वीकार कर लेना चाहिए।
खबरें और भी
- 1.8 अरब वयस्क दुनियाभर में बीमारियों के संभावित शिकार पाए गए 2024 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जो शारीरिक तौर पर सक्रिय नहीं थे।
- 50% भारतीय वयस्क पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं करते, जो कि सेहतमंद रहने के लिए जरूरी है।
- 10 मिनट प्रतिदिन तेज व्यायाम असामयिक मौत की आशंका को 15 प्रतिशत कम कर देता है।
- 56.4% बीमारियां सीधे तौर पर खराब भोजन से जुड़ी हैं आइसीएमआर के अनुसार
कैसे प्लान करें वर्कआउट
वर्कआउट प्लान अक्सर शरीर को ही ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं, जिसमें कैलोरी बर्न करने, स्ट्रेंथ बढ़ाने या शरीर के लचीलेपन पर ही फोकस होता है। हालांकि, व्यायाम मानसिक व भावनात्मक रूप से बेहतर महसूस कराए, यह भी उतना ही जरूरी है। शोध बताते हैं कि व्यायाम से एंग्जाइटी और डिप्रेशन के लक्षणों मैं कमी आती है और नींद में सुधार होता है।
- एरोबिक फिटनेस- व्यायाम करते समय जब आप तेजी से और गहरी सांस लेते हैं तो हार्ट की गति बढ़ जाती है। इससे मांसपेशियों में रक्त संचार तेज होता है। एरोबिक फिटनेस जितनी अच्छी होगी, हार्ट, फेफड़े और खून की नसें पूरे शरीर में आक्सीजन को उतनी ही कुशलता से पहुंचाएंगी। इसके लिए ब्रिस्कवाक, जागिंग, साइकिलिंग, स्विमिंग आदि कर सकते हैं।
- स्ट्रेंथ ट्रेनिंग- हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करने में मस्कुलर फिटनेस मदद करती है। वजन नियंत्रित रखने और शरीर में लचीलापन बनाए रखने के लिए वे व्यायाम जरूरी हैं। इसमें पुशअप, पुलअप सिटअप और लेग स्क्वैट्स आदि कर सकते हैं।
- कोर एक्सरसाइज- पेट की मांसपेशियों, गर्दन, पीठ और शरीर के निचले हिस्से की मजबूती के लिए यह जरूरी है। इसमें प्लैक्स सिट अप्स जैसे व्यायाम किए जा सकते हैं।
- फ्लेक्सिबिलिटी और स्ट्रेचिंग- जोड़ों को सक्रिय रखने और शरीर को संतुलित बनाए रखने के लिए यह जरूरी है। स्ट्रैच को 30 सेकंड तक रोकने का प्रयास करना चाहिए । अगर वर्कआउट से पहले स्ट्रेच करना चाहते हैं, तो पहले वार्म अप जरूरी है। स्ट्रेचिंग से पहले पांच से 10 मिनट तक टहलना या व्यायाम करना आवश्यक होता है। इसके लिए योग सबसे बेहतर उपाय है।
अच्छी नींद का समझें महत्व
पर्याप्त और अच्छी नींद नहीं लेने पर थकान और आलस्य जैसी समस्याएं होती हैं। सर्केडियन रिदम एक 24 घंटे का साइकिल है जो आपके शरीर में कई तरह की शारीरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। यह रोशनी और अंधेरे से प्रभावित होता है, जो आपके शरीर को संकेत देते हैं कि जागने का समय हो गया है या सोने की तैयारी करनी है।
आज के समय में तनाव, बीमारी और जिम्मेदारी के बढ़ते बोझ से नींद में व्यवधान आ रहा है। अनिद्रा के सभी कारणों पर आपका जोर नहीं होता, लेकिन आदतों में थोड़ा सा सुधार आपकी नींद बेहतर बना सकता है। सोने-जागने का तय हो समय- सात से आठ घंटे की अच्छी नींद के लिए सोने और जागने का एक समय तय करना आवश्यक है। अगर बिस्तर पर जाने के बाद 20 मिनट के अंदर नींद नहीं आती, तो दिमाग को शांत करने वाले कुछ कार्य कर सकते हैं।
- खाने-पीने पर करें गौर- रात में सोने से कुछ घंटे पहले ही भोजन कर लेना जरूरी होता है। निकोटीन, कैफीन और अल्कोहल नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।
- स्लीप हाइजीन- सोने का कमरा शांत और मौसम के अनुकूल होना चाहिए। सोने से घंटे भर पहले स्मार्टफोन, टीवी और अन्य गैजेट्स से दूरी बना लेनी चाहिए।
- शारीरिक सक्रियता- दिन के समय में शारीरिक तौर पर सक्रिय रहने, व्यायाम करने से रात की नींद बेहतर होती है। दिन में सोने से बचना चाहिए।
सेहत के लिए हो संतुलित भोजन
शुगर और हानिकारक वसा वाले प्रोसेस्ड फूड पर निर्भरता लोगों को बीमार बना रही है। इससे मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हाइपरटेंशन और हार्ट की बीमारी बढ़ रही है। सही जीवनशैली से टाइप-2 डायबिटीज की आशंका को 80 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।
आज के समय में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। अधिक कैलोरी, खराब आहार मेटाबोलिक डिसआर्डर, इंसुलिन रेजिस्टेंस आदि का कारण बन रहे हैं। आइसीएमआर ने आहार आदतों में सुधार के लिए व्यापक गाइडलाइन भी जारी की है। सही खानपान ही सेहत की नींव है।
- भोजन में नमक की मात्रा को सीमित करना चाहिए।
- तेल और वसा के प्रयोग को कम करके नट्स, सीड्स और सीफूड्स से स्वस्थ वसा प्राप्त करनी चाहिए ।
- भोजन में 45 प्रतिशत कैलोरी अनाज और मिलेट्स से, 15 प्रतिशत दालों, फलियों, दूध और फलों से प्राप्त करनी चाहिए।
- अनाज- प्रतिदिन 180 से 360 ग्राम
- फल-सब्जियां- 400 से 600 ग्राम प्रतिदिन
- दालें- 85 ग्राम प्रतिदिन
- पोल्ट्री, अंडे और सीफूड्स- 30 ग्राम मीट ले सकते हैं दालों की जगह
- दूध- 300 मिलीलीटर प्रतिदिन
विभिन्न स्तरों पर सुधारें दिनचर्या
डॉ. सुरनजीत चटर्जी (सीनियर कंसल्टेंट, इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली) बताते हैं कि आज के समय में नींद सबसे जरूरी हो गई है। छह से आठ घंटे की अच्छी नींद लेने से दिमाग की सक्रियता बनी रहती है। इससे डिमेंशिया आदि का जोखिम कम हो जाता है। अनेक रिसर्च से यह साबित हो चुका है कि अच्छी नींद से शरीर की कार्यप्रणाली दुरुस्त रहती है। भोजन, नींद और व्यायाम, इन तीनों को सही रखें तो दवाओं की जरूरत कम हो जाएगी।
लांसेट का अध्ययन स्वस्थ जीवनशैली के बारे में ही बता रहा है। पहले नींद को इतना महत्व नहीं दिया जाता था, लेकिन अब अनेक अध्ययन नींद को स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक मान रहे हैं। इसी तरह तीन से चार किमी. तेज चलना जरूरी है। हालांकि, कोई भी व्यायाम करने से पहले अपनी सेहत, हार्ट के बारे में जानना जरूरी है।
अगर सांस फूल रही है तो डाक्टर से परामर्श जरूर करें। आप ब्रिस्क वाक, तैराकी, साइकिलिंग, रनिंग कुछ भी कर सकते हैं। सप्ताह में पांच दिन रोज 30 से 35 मिनट 3-5 किमी. भी चलें तो वह पर्याप्त है।