स्क्रीन अनलॉक करते ही सोचते हैं- अरे, मैंने फोन क्यों उठाया था? जानिए दिमाग के साथ ऐसा क्यों होता है
कई बार होता है कि आप फोन उठाते हैं, तो भूल जाते हैं कि काम क्या था? इसके पीछे आपके दिमाग का एक खेल है। ...और पढ़ें

फोन उठाते ही ब्लैंक हो जाता है दिमाग? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप अपना फोन उठाते हैं, अनलॉक करते हैं और फिर सोचने लगते हैं कि मैंने आखिर फोन उठाया क्यों था?
ऐसा हम सभी के साथ कभी न कभी हुआ है और आज के डिजिटल ऐज में यह काफी आम हो चुका है, लेकिन सवाल आता है कि ऐसा होता क्यों है?
फोन उठाने और अनलॉक करने के बीच लगे कुछ सेकंड में ही हम कैसे भूल जाते हैं कि फोन हाथ में क्यों लिया था? आइए इस सवाल का जवाब डॉ. गौरव गुप्ता (सीनियर साइकायट्रिस्ट एंड सीईओ- तुलसी हेल्थकेयर, नई दिल्ली) से जानें।
वर्किंग मेमोरी की क्षमता
हमारे दिमाग में एक वर्किंग मेमोरी होती है, जो जानकारी को बहुत कम समय के लिए रोक कर रखती है। यह एक छोटे नोटपैड की तरह है। जब आप फोन उठाते हैं, तो आपका मकसद इसी वर्किंग मेमोरी में होता है।
जैसे ही आप स्क्रीन अनलॉक करते हैं, ढेरों रंग-बिरंगे ऐप्स और नोटिफिकेशन आपके दिमाग पर हमला कर देते हैं। इस कॉग्निटिव ओवरलोड के कारण दिमाग की सीमित क्षमता वाली वर्किंग मेमोरी से पुरानी बात डिलीट हो जाती है और नए खयाल उसकी जगह ले लेते हैं।

(Picture Courtesy: Freepik)
डोपामाइन का जाल और ध्यान का भटकना
स्मार्टफोन ऐप्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे हमारे दिमाग में डोपामाइन रिलीज करें। डोपामाइन एक फील-गुड केमिकल है, जो हमें रिवॉर्ड की तलाश में रखता है। जब हम फोन उठाते हैं, तो हमारा दिमाग उन ऐप्स की ओर खिंचता है जो उसे तुरंत खुशी या मनोरंजन दे सकें। इस प्रक्रिया में, दिमाग उस बोरिंग काम को भूल जाता है जिसके लिए फोन उठाया गया था और उस एक्टिविटी में लग जाता है जो उसे इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन यानी तुरंत संतुष्टि दे रही हो।
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आदत से मजबूर
अक्सर फोन उठाना एक सोचा-समझा फैसला नहीं होता, बल्कि एक मसल मेमोरी बन चुका है। हम में से कई लोग फोन अनलॉक करते ही बिना सोचे-समझे सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप्स खोल लेते हैं। इसलिए कई बार हम अपना फोन उठा लेते हैं, लेकिन हमें यह नहीं याद आता कि काम क्या था।
डिजिटल थकान
लगातार डिजिटल सूचनाओं के बीच रहने से हमारा अटेंशन स्पैन कम हो गया है। इसे अटेंशन फटीग कहते हैं। जब दिमाग थका हुआ होता है, तो वह किसी एक विचार को लंबे समय तक पकड़कर नहीं रख पाता है। ऐसे में किसी भी छोटे से डिस्ट्रैक्शन से हम तुरंत पुरानी बात भूल जाते हैं।

(AI Generated Image)