साड़ी नहीं, बल्कि पेटीकोट पहनने का गलत तरीका बनता है कैंसर की वजह; इन शुरुआती लक्षणों से रहें सावधान
साड़ी कैंसर महिलाओं में होने वाली गंभीर समस्या है, लेकिन बेहद छोटे और आसान बदलाव करके इससे बचा जा सकता है। ...और पढ़ें

क्यों देर से पकड़ में आते हैं साड़ी कैंसर के लक्षण? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या दिन भर साड़ी पहनने के बाद आपकी कमर पर भी पेटीकोट के नाड़े का गहरा, छिला हुआ निशान रह जाता है? अगर हां, तो इसे महज एक आम बात समझकर अनदेखा मत कीजिए। पिछले कुछ समय में इससे जुड़ा एक डरावना शब्द काफी सुनने को मिल रहा है, जिसे साड़ी कैंसर कहते हैं।
हालांकि, यह सुनकर ऐसा लग सकता है कि साड़ी पहनने की वजह से कैंसर हो रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह साड़ी पहनने से नहीं, बल्कि उसे बांधने के गलत तरीके और लंबे समय तक होने वाली लापरवाही से जुड़ा है। आइए डॉ. सफलता बाघमर (सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से जानें कैसे होता है साड़ी कैंसर और इससे बचाव के लिए क्या कर सकते हैं।
क्या होता है साड़ी कैंसर?
मेडिकल भाषा में इसे क्युटेनियस स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा कहा जाता है। यह एक तरह का स्किन कैंसर है, जो कमर की त्वचा पर लगातार फ्रिक्शन लगने और जलन के कारण होता है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन स्किन कैंसर और खासकर साड़ी कैंसर के मामले बहुत ही कम हैं।
इसके मुख्य कारण
यह कैंसर रातों-रात नहीं होता, बल्कि इसके पीछे दशकों की लापरवाही छिपी होती है-
- लगातार छिलना- पेटीकोट की डोरी को कमर पर एक ही जगह बहुत कसकर बांधने से वहां की त्वचा पर लगातार दबाव पड़ता है।
- गर्मी और नमी- भारत की गर्म और उमस भरी जलवायु में डोरी वाली जगह पर पसीना जमा होता रहता है। नमी और फ्रिक्शन मिलकर त्वचा में लगातार सूजन पैदा करते हैं।
- साफ-सफाई की कमी- पसीने और गंदगी के कारण उस हिस्से पर फंगल इन्फेक्शन या घाव हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करने पर स्थिति गंभीर हो जाती है।
किन लोगों को है ज्यादा खतरा?
इसकी पहचान शुरुआत में मुश्किल क्यों है?
साड़ी कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानना अक्सर मुश्किल होता है क्योंकि शुरुआती चरण में केवल खुजली, त्वचा का काला पड़ना या पपड़ी जमना जैसे लक्षण दिखते हैं। महिलाएं अक्सर इसे सामान्य बेल्ट मार्क या रैशेज समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। यह समस्या यह दशकों की रगड़ के बाद धीरे-धीरे विकसित होती है, इसलिए शुरुआत में कोई दर्द नहीं होता।
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एक वजह यह भी है कि कमर के हिस्से पर होने के कारण कई महिलाएं डॉक्टर को दिखाने में संकोच करती हैं, जिससे इन्फेक्शन बढ़कर न ठीक होने वाले अल्सर का रूप ले लेता है।
शुरुआती लक्षण जिन्हें न करें नजरअंदाज

(AI Generated Image)
- कमर की रेखा पर लगातार खुजली या जलन
- त्वचा का मोटा होना या रंग का गहरा काला पड़ना
- ऐसा घाव जो लंबे समय तक मरहम लगाने के बाद भी ठीक न हो रहा हो
- घाव से बदबूदार डिस्चार्ज या खून आना
बचाव के लिए क्या कर सकते हैं?
साड़ी कैंसर से बचना बेहद आसान है। इसके लिए आपको साड़ी पहनना छोड़ने की जरूरत नहीं है, बस कुछ छोटे-मोटे बदलाव करने होंगे, जैसे-
- पेटीकोट की डोरी ढीली रखें- डोरी को इतना कसकर न बांधें कि वह त्वचा में धंस जाए।
- गांठ की जगह बदलें- हर दिन डोरी की गांठ को एक ही जगह बांधने के बजाय उसकी जगह बदलते रहें।
- ब्रॉड बेल्ट या इलास्टिक- डोरी वाले पेटीकोट के बजाय चौड़े बेल्ट या इलास्टिक वाले पेटीकोट का इस्तेमाल करें, जिससे दबाव एक जगह न हो।
- कपड़े का चुनाव- सूती कपड़ों का ज्यादा इस्तेमाल करें जो पसीना सोख सकें और त्वचा को सांस लेने दें।
- स्वच्छता- कमर के उस हिस्से को साफ और सूखा रखें।