हर बात पर 'हां' बोलना कोई खूबी नहीं, बल्कि है एक बीमारी, कहीं आपको भी तो नहीं है 'गुड गर्ल सिंड्रोम'?
हर बात पर 'हां' कहना और हमेशा मुस्कुराते रहना, क्या आपको भी लगता है कि यही एक अच्छी लड़की की पहचान है? समाज की इसी परफेक्ट डिमांड को 'गुड गर्ल सिंड्रो ...और पढ़ें

चुप रहना दब रही है आपकी सेहत, ऐसे करें 'गुड गर्ल सिंड्रोम' की पहचान (Image Credit - Canva)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में लड़कियों के लिए समाज ने कुछ ऐसे अनकहे नियम बना दिए हैं, जिन्हें निभाना लगभग नामुमकिन है। एक लड़की से उम्मीद की जाती है कि वह सुंदर दिखे पर पलटकर जवाब न दे, करियर में आसमान छुएं पर घर की दहलीज न भूलें और दर्द चाहे कितना भी हो, चेहरे पर हमेशा स्माइल बनी रहे। इन्हीं उम्मीदों के बोझ को 'गुड गर्ल सिंड्रोम' कहा जाता है।
यह बचपन की उस तारीफ का नतीजा है, जहां आपको चुपचाप बात मानने और दूसरों का पहले ख्याल रखने पर अच्छी बच्ची कहा गया। आज यही अच्छी लड़की का टैग एक बोझ बन चुका है, जो लड़कियों से उनकी असली पहचान छीनकर उन्हें मानसिक थकान और तनाव की ओर धकेल रहा है। आइए जानते हैं यह किस प्रकार उनको प्रभावित करता है।
गुड गर्ल सिंड्रोम के नुकसान

(Image Credit - Jagran
हार्मोनल इंबैलेंस और थकान
जब आपका शरीर खुद को ठीक करने के बजाय हर वक्त समाज के हिसाब से ढलने में अपनी ताकत खर्च करता है, तो हार्मोन्स का बैलेंस बिगड़ना तय है। आपकी एनर्जी ठीक होने में नहीं, बल्कि परिस्थितियों से लड़ने में बर्बाद होती है, जो आपको अंदर से थका देती है।
एंग्जायटी और इमोशनली हर्ट होना
हर वक्त दूसरों की नजरों में अच्छा बनने की कोशिश आपको कभी खुश नहीं रहने देती। इस दिखावे के चक्कर में आप अपनी असली पहचान खो देते हैं और सुकून के लिए कोई जगह नहीं बचती। हमेशा दूसरों को खुश रखना इमोशनली हर्ट कर सकता है।
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पाचन से जुड़ी समस्याएं
जब हम मन की बात मन में ही रखते हैं, तो उसका सीधा असर हमारे पाचन पर पड़ता है, जिससे एसिडिटी, ब्लोटिंग और IBS जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। इसलिए हेल्दी रहने के लिए मन को हल्का करना बेहद जरूरी है।
स्ट्रेस और हाई कोर्टिसोल
दूसरों को खुश रखने की आदत आपके नर्वस सिस्टम को हमेशा खतरे में रखती है। जब आप ना नहीं कह पाते, तो शरीर में कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
थायरॉइड इंबैलेंस
अगर आप अपनी आवाज और गुस्से को अंदर ही दबाकर रखते हैं, तो इसका सबसे बुरा असर थायरॉइड पर पड़ता है। अपने इमोशन्स को जाहिर न करना हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ देता है।
इससे बचने के तरीके
- सबसे पहले खुद से प्यार करना सीखें
- खुद को प्राथमिकता दें
- समाज की उम्मीदों में बंधकर न रहें
- अपनी कमियों को स्वीकार करें
- अपनी खूबियों, रुचियों और लक्ष्यों को पहचानें
- हमेशा पॉजिटिव सोच रखें और खुद को आगे बढ़ने की प्रेरणा दें
- अपने लिए कुछ लिमिटेशन्स सेट करें और उनका सम्मान करें
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