वरुण धवन की डेढ़ साल की बेटी का हुआ 'हिप डिस्प्लासिया' का ऑपरेशन, जानें क्या है यह बीमारी
वरुण धवन ने खुलासा किया है कि उनकी बेटी लारा को 'हिप डिस्प्लासिया' नामक बीमारी हुई थी। डेढ़ साल की उम्र में पता चलने पर उसे चलने में दिक्कत होती थी। ...और पढ़ें

वरुण धवन की बेटी लारा को हुई 'हिप डिस्प्लासिया' बीमारी (Picture Credit- Instagram)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन ने हाल ही में अपनी बेटी को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने एक पॉडकास्ट में अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उनकी बेटी लारा को 'हिप डिस्प्लासिया' नाम की बीमारी का सामना करना पड़ा।
उन्होंने बताया कि जब लारा करीब डेढ़ साल की थी, तब डॉक्टरों ने इस बीमारी की पुष्टि की। इसकी वजह से उसे चलने-फिरने और दौड़ने में काफी परेशानी हो रही थी। हालांकि, राहत की बात यह है कि लारा का सफल ऑपरेशन हो चुका है और वह अब तेजी से रिकवर कर रही है। आइए जानते हैं क्या है यह बीमारी-
क्या है हिप डिस्प्लासिया?
यह तो हम सभी जानते हैं कि हमारा कूल्हा यानी हिप एक 'बॉल और सॉकेट' की तरह काम करता है, जहां जांघ की हड्डी (फीमर) कूल्हे की हड्डी (पेल्विस) के खांचे में एकदम फिट बैठती है। लेकिन 'हिप डिस्प्लासिया' में यह सॉकेट बहुत उथला यानी कम गहरा होता है या हड्डियां अपनी सही जगह पर फिट नहीं बैठतीं। इसे मेडिकल भाषा में डेवलपमेंटल डिस्प्लासिया ऑफ द हिप (DDH) भी कहा जाता है।
बच्चों में इसके मुख्य लक्षण क्या हैं?
अगर किसी बच्चे को यह समस्या है, तो उसमें निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
- चलते या दौड़ते समय लंगड़ाना।
- दोनों पैरों की लंबाई में फर्क नजर आना (एक पैर छोटा एक बड़ा लगना)।
- कूल्हे के जोड़ का बहुत ढीला या अस्थिर होना।
- कूल्हे या जांघ के ऊपरी हिस्से (कमर के सामने) दर्द रहना।
यह बीमारी क्यों होती है
ज्यादातर मामलों में यह समस्या जन्म से ही होती है। कई बार गर्भ में भ्रूण की पोजीशन ऐसी होती है, जिससे उसके कूल्हे पर लगातार दबाव पड़ता है और हड्डियों का विकास ठीक से नहीं हो पाता। इसके अलावा, यह जेनेटिक भी हो सकती है यानी परिवार में पहले किसी को हो तो बच्चे को भी इसका खतरा रहता है।
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किसे है ज्यादा खतरा?
वैसे तो यह बीमारी किसी भी बच्चे को हो सकती है, लेकिन यह आमतौर पर लड़कियों और घर के पहले बच्चे में यह ज्यादा देखी जाती है। साथ ही, यह अक्सर दाहिने के मुकाबले बाएं कूल्हे यानी लेफ्ट हिप को ज्यादा प्रभावित करता है।
इसका पता कब चलता है?
ज्यादातर मामलों में डॉक्टर जन्म के शुरुआती 6 महीनों के भीतर ही रूटीन चेकअप के दौरान इस बीमारी को पकड़ लेते हैं, क्योंकि घर पर माता-पिता को इसके लक्षण आसानी से समझ नहीं आते। हालांकि, कुछ हल्के मामलों में यह बड़े होने पर या वयस्कों में भी पहली बार सामने आ सकती है।