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    खुशी के पल में क्यों छलक आते हैं आंसू? आखिर क्या कहता है मनोविज्ञान

    Updated: Sun, 17 May 2026 01:42 PM (IST)

    कभी सोचा है कि जब दिल खुशी से झूम रहा हो, तब अचानक आंखें क्यों छलक उठती हैं? ...और पढ़ें

    बहुत ज्यादा खुश होने पर हम रोने क्यों लगते हैं? (Image Source: AI-Generated)

    बहुत ज्यादा खुश होने पर हम रोने क्यों लगते हैं? (Image Source: AI-Generated) 

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जिंदगी में कई ऐसे खास मौके आते हैं जब हम खुशी से झूम उठते हैं- जैसे किसी पुराने साथी से अचानक मुलाकात होना, मनचाही कामयाबी हासिल होना या अपने बच्चे को सफल होते देखना। अक्सर ऐसे पलों में हमारी आंखें अपने आप नम हो जाती हैं।

    बचपन से हम यही सुनते आए हैं कि आंसू केवल दुख और दर्द की निशानी हैं, लेकिन विज्ञान का नजरिया इससे बिल्कुल अलग है। विशेषज्ञों के अनुसार, खुशी के आंसू आना हमारी भावनाओं का एक बेहद दिलचस्प, स्वाभाविक और प्राकृतिक हिस्सा है। जब हमारे भीतर भावनाएं हद से ज्यादा उफान पर होती हैं, तो शरीर उन्हें काबू में करने के लिए आंसुओं का ही रास्ता चुनता है।

    why do we cry when happy

    (Image Source: AI-Generated) 

    दिमाग और भावनाओं का अनोखा कनेक्शन

    मनोविज्ञान के मुताबिक, हमारा मस्तिष्क केवल दुख की स्थिति को ही नहीं पहचानता। यह गर्व, अपार खुशी, राहत और गहरे मानसिक जुड़ाव पर भी आंसुओं के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देता है। शादी-ब्याह, किसी प्रतियोगिता में जीत या अपनों से लंबे समय बाद मिलने पर आंखों का भर आना इसी बात का सुबूत है।

    आकाश हेल्थ केयर की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. पवित्रा शंकर इस पूरी प्रक्रिया को समझाते हुए बताती हैं कि जब इंसान बहुत अधिक भावुक होता है, तो दिमाग का 'लिम्बिक सिस्टम' सक्रिय हो जाता है। मस्तिष्क का यही हिस्सा हमारी सभी भावनाओं को संभालता है। बहुत अधिक खुशी में शरीर का नर्वस सिस्टम तेजी से काम करने लगता है। ऐसे में आंसुओं का निकलना असल में शरीर का भावनाओं को संतुलित करने का एक वैज्ञानिक तरीका है।

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    आंसू कैसे देते हैं दिमाग को सुकून?

    विज्ञान में आंसुओं को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा गया है: बेसल टियर्स, रिफ्लेक्स टियर्स और इमोशनल टियर्स। जब हम किसी बहुत गहरी भावना के कारण रोते हैं, तो उन्हें 'इमोशनल टियर्स' कहा जाता है। अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि इन आंसुओं के जरिए शरीर से तनाव बढ़ाने वाले कुछ रसायन और हार्मोन बाहर निकल जाते हैं।

    यही वजह है कि जब लंबे समय से चला आ रहा कोई मानसिक बोझ किसी बड़ी खुशी के मौके पर खत्म होता है, तो आंसुओं के बहने से इंसान को गजब की दिमागी राहत महसूस होती है। खुशी में रोना किसी भी तरह से इंसान की मानसिक कमजोरी नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि व्यक्ति चीजों को कितनी गहराई से महसूस करता है।

    psychology of tears of joy

    (Image Source: AI-Generated) 

    शरीर का अनोखा 'डिफेंस मैकेनिज्म'

    विज्ञान की भाषा में इस पूरी प्रक्रिया को 'डाइमॉर्फस एक्सप्रेशन' का नाम दिया गया है। इसका सीधा सा मतलब है- महसूस कुछ और करना और शरीर का किसी दूसरी तरह से प्रतिक्रिया देना। उदाहरण के लिए, बेहद खुश होने पर आंखों से आंसू बह निकलना या बहुत ज्यादा तनाव और घबराहट में अचानक हंस देना। शरीर ऐसा इसलिए करता है ताकि वह उन तीव्र भावनाओं पर लगाम लगा सके जो बेकाबू हो रही हैं।

    कई रिसर्च यह भी बताती हैं कि पुरुष अमूमन महिलाओं के मुकाबले कम भावुक आंसू बहाते हैं, लेकिन विशेषज्ञ का स्पष्ट कहना है कि इसका यह अर्थ नहीं है कि पुरुष अंदर से कम भावुक होते हैं। समाज का दबाव और अपनी भावनाओं को दुनिया के सामने जाहिर करने के अलग-अलग तरीके इसके पीछे सबसे बड़ी वजह हैं।

    'फील गुड' हार्मोन और नेचुरल हीलिंग

    वैज्ञानिकों के अनुसार, खुशी के आंसू हमारे शरीर के प्राकृतिक रूप से ठीक होने की प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा हैं। जब हम जज्बातों से पूरी तरह भर जाते हैं, तो शरीर में ऑक्सीटोसिन और एंडॉर्फिन जैसे 'फील गुड' हार्मोन पैदा होने लगते हैं। ये हार्मोन हमारे मानसिक तनाव को घटाकर हमें अंदरूनी सुकून और शांति देते हैं। यही कारण है कि जी भरकर रो लेने के बाद अधिकतर लोग काफी हल्का और बेहतर महसूस करते हैं।

    Science behind crying from happiness

    (Image Source: AI-Generated) 

    कब लेनी चाहिए विशेषज्ञ की सलाह?

    आमतौर पर खुशी के पलों में आंसू छलकना एकदम सामान्य बात है। लेकिन डॉक्टरों की सलाह है कि यह तभी तक ठीक है जब तक यह आपकी रोजमर्रा की जिंदगी पर बुरा असर न डाले। अगर कोई व्यक्ति बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार रो रहा है, उसके मूड में अचानक बदलाव हो रहे हैं या मानसिक तनाव लगातार हावी हो रहा है, तो ऐसे में किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।

    रिश्तों की मजबूत डोर

    विशेषज्ञ यह भी मानती हैं कि खुशी के आंसू सिर्फ हमारी अपनी भावनाओं को ही बाहर नहीं लाते, बल्कि ये लोगों के बीच के आपसी रिश्तों को भी मजबूत करते हैं। जब हम खुशी या भावुकता में किसी के सामने रोते हैं, तो सामने वाला व्यक्ति हमसे ज्यादा सहानुभूति और जुड़ाव महसूस करता है।

    इसलिए, अगली बार जब किसी खुशी के मौके पर आपकी आंखें भर आएं, तो उन्हें रोकिए मत और न ही इसे अपनी कमजोरी मानिए। यह हमारी इंसानी संवेदनाओं की खूबसूरती है। विज्ञान भी इस बात की तस्दीक करता है कि खुशी के ये आंसू हमारे दिमाग और दिल के बीच के खूबसूरत और गहरे तालमेल का जीता-जागता संकेत हैं।

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