महिलाओं को सिर्फ मेनोपॉज के बाद होती हैं दिल की बीमारियां!, अगर आप भी ऐसा सोचती हैं तो जान लें ये कड़वी सच्चाई
हार्ट हेल्थ से जुड़ी चर्चित पत्रिका 'जर्नल हाइपरटेंशन' में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, मेनोपोज से पूर्व भी महिलाओं में हृदय ...और पढ़ें
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महिलाओं में दिल की बीमारियों का खतरा (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ऑफिस या घर की सीढ़ियां चढ़ते हुए अगर तेजी से सांस फूलने, सिर घूमने, चक्कर आने या घबराहट जैसी समस्याएं होती हैं, तो यह सामान्य लक्षण नहीं है। आमतौर पर 30 वर्ष की उम्र में ऐसे लक्षणों पर ज्यादा गौर नहीं किया जाता।
डॉ. अपर्णा जसवाल (वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ, फोर्टिस एस्कार्ट हार्ट इंस्टीटयूट, नई दिल्ली) बताती हैं कि यही आगे चलकर महिलाओं की सेहत को लेकर यह एक बड़ी चुनौती का रूप ले लेता है, इसलिए समस्या होने पर चिकित्सकीय जांच और सही उपचार जरूरी है।
एक आम धारणा है कि महिलाओं में मेनोपाज के बाद ही दिल की बीमारियों की आशंका होती है, पर हमें समझने की जरूरत है कि हार्ट डिजीज जैसी परेशानियां कम उम्र में भी अब देखने में आ रही है, इसलिए यह जरूरी है कि न केवल अपने खानपान पर नजर रखें, बल्कि शारीरिक सक्रियता बढ़ाएं।
साथ ही दिल की बीमारियों से बचाव के लिए आपको अपनी सेहत से जुड़े जरूरी डेटा का पता होना चाहिए, जैसे, बीपी यानी रक्तचाप कितना रहता है, कोलेस्ट्रॉल का स्तर क्या है, ब्लड शुगर नियंत्रण में है या नहीं, क्या वजन निर्धारित मानक से ज्यादा तो नहीं हो रहा है, ऐसी तमाम बातों का ध्यान रखकर बीमारियों की आशंका को टाल सकते हैं।
एस्ट्रोजन की कमी न बने मुसीबत
महिलाओं में दिल की बीमारियों का खतरा भी पुरुषों की तरह बना रहता है। यह कभी भी चुनौती पैदा कर सकता है। इसका सबसे एक बड़ा कारण है एस्ट्रोजन का असंतुलन। बता दें कि बीते दशकों में यह सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हुई है। एस्ट्रोजन हार्मोन रक्तवाहिकाओं को स्वस्थ रखकर महिलाओं को हृदय रोग के संभावित खतरे से बचाता है। यह अच्छा कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है और खराब कोलेस्ट्रोल यानी एलडीएल को कम करता है।
इससे धमनियों में गंदगी यानी प्लाक नहीं जम पाती। एस्ट्रोजन हार्मोन की मदद से ही रक्तवाहिकाओं में होने वाले अंदरूनी सूजन से बचाव करने में मदद मिलती है। हालांकि, मेनोपोज के बाद यानी 40-50 की उम्र से एस्ट्रोजन का स्तर तेजी से गिरना शुरू होता है।
इसके बाद शरीर में ऐसे बदलाव शुरू होते हैं जिन्हें अगर समय पर नहीं समझा गया, तो आपके लिए बड़ा जोखिम ला सकता है। जैसे, वजन बढ़ना, कोलेस्ट्रोल बढ़ना, इंसुलिन रेजिस्टेंस आदि। ऐसे में यह जरूरी है कि आप ऐसी किसी समस्या की इंतजार न करें बल्कि मेनोपोज से पहले ही सावधान हो जाएं।
हृदयरोग पहले क्यों?
एक समय था जब महिलाएं 50-60 की उम्र तक स्वस्थ महसूस करती थीं। उनमें हार्ट-अटैक के मामले बहुत कम देखे जाते थे, पर अब मेनोपोज की उम्र आते-आते वे कई प्रकार की बीमारियों से जूझ रही होती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण जीवनशैली में बदलाव और इस अनुरूप अपनी सेहत को लेकर सजग न होना है।
अब पहले की तरह सक्रियता भी कम हो गयी है। ज्यादा काम और स्ट्रेस के बीच एक्सरसाइज की कमी, खानपान को लेकर लापरवाही, धूमपान-अल्कोहन का सेवन आदि है, तो यह उन्हें दिल की बीमारियों के जोखिम जोन में रखता है। यह ध्यान रहे कि हार्मोन असंतुलन की समस्या है तो यह भी एक बड़ी परेशानी हो सकती है। इसके लक्षणों को समझें। जैसे यदि इन दिनों भूख अधिक लगती है तो सतर्क हो जाएं।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से बढ़ाएं क्षमता
कसरत कब करें? अगर यह सोच रही हैं तो इसके लिए एक ठोस योजना बनाएं। जिम जाकर एकदम से कोई गतिविधि शुरू न करें। धीरे धीरे अपनी क्षमता बढ़ाएं। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग आपके लिए भी उतना ही जरूरी है जितना पुरुषों के लिए। यह ध्यान रहे कि मेनोपोज के बाद शरीर में किस तरह के बदलाव हो सकते हैं।
बता दें कि मेनोपोज के बाद मांसपेशियों की क्षति तेजी से होने लगती है। इससे बचाव के लिए पहले सजग हों। डंबल शुरू करें। एक्सरसाइज बैंड का प्रयोग करें। कमर में दर्द रहता है तो चिकित्सक से मिलें। उनके सुझाओं पर अमल करें ताकि आपको कसरत या कोई शारीरिक गतिविधि में समस्या न हो।
हार्ट हेल्दी डाइट लें
अपनी डाइट में हरी-पत्तेदार सब्जियां शामिल करें। पालक, मेथी, लौकी आदि दिल की सेहत के लिए अच्छा है। ताजे व मौसमी फलों का इस्तेमाल करें। सेब, पपीता, अमरूद, संतरे आदि एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ फाइबर से भरपूर हैं। कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखने के लिए जौ, ज्वार, दलिया का सेवन भी अच्छा है।
हेल्दी फैट का इस्तेमाल करें। जितना संभव हो ट्रांस फैट से दूरी बनाएं। जैसे, समोसा, फ्रैंच फाइज, बर्गर, पिज्जा,फ्रोजन चिकन, नगेटस आदि। मूंग, मसूर, चना विभिन्न तरह की दालों का प्रयोग भी जरूरी है जो आपकी संपूर्ण सेहत को बेहतर रखने में मदद करता है।
