वर्कप्लेस पर बाउंड्री सेट करना कामचोरी नहीं! बर्नआउट से बचने के लिए रूटीन में शामिल करें ये 5 आदतें
ऑफिस में बाउंड्री सेट करना जरूरी है। ऐसा करना न सिर्फ आपकी मेंटल हेल्थ के लिए जरूरी है, बल्कि प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए भी फायदेमंद है। ...और पढ़ें

काम और पर्सनल लाइफ में खत्म हो रही है दूरी? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बर्नआउट की समस्या आम हो चुकी है। लगातार काम का दबाव, डेडलाइन्स का बोझ और पर्सनल-प्रोफेशनल लाइफ के बीच धुंधली होती लकीर मानसिक और शारीरिक थकान का कारण बनती हैं।
अक्सर हम अपनी बाउंड्री सेट नहीं कर पाते, जिससे काम का तनाव हमारी पर्सनल लाइफ पर भी हावी होने लगता है। वर्कप्लेस पर बाउंड्री सेट करना कामचोरी नहीं है, बल्कि यह आपकी प्रोडक्टिविटी और मेंटल हेल्थ के लिए बेहद है। आइए जानें 5 टिप्स, जिनसे आप वर्कप्लेस पर बाउंड्री सेट कर सकते हैं।
वर्किंग ऑवर्स का कड़ाई से पालन करें
डिजिटल एज में हम 24/7 अवेलेबल हो गए हैं, जो बर्नआउट का सबसे बड़ा कारण है। बाउंड्री सेट करने की शुरुआत अपने काम के घंटों को सेट करने से करें। एक समय तय करें जब आप अपना लैपटॉप बंद करेंगे और ऑफिस के ईमेल चेक करना बंद कर देंगे। अपने सहकर्मियों और मैनेजर को बताएं कि आप शाम के एक फिक्स समय के बाद उपलब्ध नहीं होंगे। इससे उन्हें भी क्लैरिटी रहेगी कि आपसे जुड़े काम इतने बजे से पहले करवा लें।
ना कहना सीखें
अपनी इमेज अच्छी बनाने के चक्कर में हम अक्सर अपनी क्षमता से ज्यादा काम ले लेते हैं। हर काम के लिए हां बोलना आपका स्ट्रेस बढ़ाता है और प्रोडक्टिविटी भी कम करता है। इसलिए कोई भी नया काम लेने से पहले अपनी वर्कलोड लिस्ट देखें। अगर आपके पास समय नहीं है, तो अपने बॉस को बताएं कि अभी आपके पास काफी वर्कलोड है या अपनी प्रायोरिटी बदलें।
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डिजिटल डिटॉक्स
काम खत्म होने के बाद भी ऑफिस के चैट ग्रुप्स या ईमेल नोटिफिकेशन देखना आपके दिमाग को कभी रेस्ट मोड में नहीं जाने देता। ऑफिस से निकलने के बाद वर्क ऐप्स के नोटिफिकेशन म्यूट कर दें। केवल बहुत जरूरी काम के लिए एक मीडियम सेट करें, जैसे फोन कॉल, ताकि आपको हर छोटे मैसेज के लिए नोटिफिकेशन न देखना पड़े।
ब्रेक लें
लगातार घंटों तक स्क्रीन के सामने बैठे रहना मानसिक थकान को बढ़ाता है। छोटे-छोटे ब्रेक आपके दिमाग को रीचार्ज करने का काम करते हैं। डेस्क पर काम करते हुए लंच करने की आदत छोड़ें। लंच ब्रेक का इस्तेमाल सोशल मीडिया चलाने के बजाय टहलने या शांत बैठने के लिए करें। हर एक घंटे में 5 मिनट का ब्रेक लें। यह आपके फोकस को बनाए रखने में मदद करता है।
अपनी जिम्मेदारियों समझें
बर्नआउट तब भी होता है जब आपको पता नहीं होता कि आपका काम कहां खत्म होता है और दूसरे का कहां शुरू। अगर आपसे लगातार आपकी प्रोफाइल से बाहर के काम कराए जा रहे हैं, तो अपने मैनेजर से इस बारे में बात करें। खुद को साबित करने के लिए जरूरत से ज्यादा जिम्मेदारी लेना आपकी सेहत पर भारी पड़ता है और काम की क्वालिटी भी घटती है।