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    'बन्नो तेरी अंखियां सुरमेदानी…' बन्ना-बन्नी तो खूब सुने होंगे, पर क्या जानते हैं इनका असली मतलब?

    Updated: Wed, 06 May 2026 07:13 PM (IST)

    भारतीय शादियों में 'बन्ना-बन्नी' गीत सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि गहरे सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। ये गीत दूल्हा-दुल्हन को वैवाहिक जीवन की सीख देते हैं और ...और पढ़ें

    भारतीय शादियों की रौनक है बन्ना-बन्नी (Picture Credit- AI Generated)

    भारतीय शादियों की रौनक है बन्ना-बन्नी (Picture Credit- AI Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इन दिनों कई घरों में शादी की तैयारियां जोरों-शोरों से जारी होगी। शादी वाले घर की रौनक ही कुछ अलग होती है। ढोलक की थाप, चम्मच की खनक और आंगन में बैठी महिलाओं की खिलखिलाहट, भारतीय शादियों की असली रौनक इन्हीं सबसे होती है। 

    इन सबके अलावा भारतीय शादियों में पारंपरिक लोकगीतों का भी अपना अलग ही महत्व देखने को मिलता है। अगर बात करें उत्तर भारत जैसे- यूपी, बिहार, राजस्थान, हरियाणा की शादियों की हो, तो ‘बन्ना-बन्नी’ गीतों के बिना हर रस्म बिल्कुल अधूरी सी लगती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल में हम जानेंगे शादियों ‘बन्ना-बन्नी’ के महत्व और इसके इतिहास के बारे में-

    कब और क्यों गाए जाते हैं बन्ना-बन्नी?

    आज के समय में भले ही शादियों में डीजे और बॉलीवुड गानों का चलन काफी बढ़ गया है, लेकिन एक दौर भी था जब हल्दी-मेंहदी से लेकर विदाई तक, हर रस्म में सिर्फ बन्ना-बन्नी ही गाए जाते थे। आज भी कई जगहों पर रिवाज के तौर पर भी सही बन्ना-बन्नी गाए जरूर जाते हैं और आज भी इनके बिना शादी अधूरी मानी जाती है। 

    अक्सर लोग इन गीतों को सिर्फ नाचने-गाने और मस्ती करने का जरिया समझते हैं, लेकिन असल में या इनके पीछे गहरा मतलब भी छिपा होता है। इन गीतों में छिपी वो दिलचस्प कहानी और भावनाओं छिपी होती है, जो हमारी संस्कृति की असली पहचान हैं।

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    क्या है 'बन्ना-बन्नी' का असली मतलब?

    उत्तर भारत में बन्ना (या बन्ने) शब्द का इस्तेमाल प्यार से दूल्हे के लिए किया जाता है। वहीं, दुल्हन को 'बन्नी' कहा जाता है। ये गीत सिर्फ रस्म-रिवाज नहीं होते, बल्कि इनमें नए जोड़े के लिए बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद, उनके आने वाले भविष्य की सुंदर कल्पना और दोनों परिवारों का पूरा इतिहास पिरोया गया होता है। 

    बात करें इसके इतिहास की, तो इन लोकगीतों का कोई सटीक इतिहास तो नहीं मिलता है, लेकिन भारतीय शादियों में खासकर हिंदू धर्म में प्राचीन काल से बन्ना-बन्नी का चलन देखने को मिलता है।

    बन्ना-बन्नी का महत्व

    • नए जीवन के लिए सीख: पुराने समय में लड़के-लड़कियां शादी से पहले एक-दूसरे से न तो मिल पाते थे और न ही बात कर पाते थे। ऐसे में बन्ना-बन्नी गीतों के जरिए दुल्हन को मजाकिया अंदाज में वैवाहिक जीवन, पति-पत्नी के नाजुक रिश्ते, ससुराल के तौर-तरीके और नई जिम्मेदारियों के बारे में समझाया जाता था। यह एक तरह की प्री-वेडिंग काउंसलिंग होती थी।
    • रिश्तों में झिझक खोलना: इन गीतों में सास-ससुर, ननद-भाभी और देवर के रिश्तों की मीठी नोकझोंक होती है। कभी बन्ने की बुआ को ताना मारा जाता है, तो कभी बन्नी की ननद की चुटकी ली जाती है। यह गानों के जरिए एक-दूसरे के परिवारों के साथ झिझक खोलने और एक-दूसरे के करीब आने का एक बहुत प्यारा और सुरक्षित तरीका होता था।
    • खुलकर बात कहने का जरिया: पुराने जमाने में जब समाज में महिलाओं को अपनी बात खुलकर कहने की ज्यादा आजादी नहीं थी, तब ये विवाह गीत ही उनका 'सोशल मीडिया' हुआ करते थे। इन गीतों के जरिए महिलाएं अपनी दबी हुई भावनाएं, अपना दर्द, अपनी खुशी और अपनी भावनाएं दुनिया के सामने रखती थीं।
    • तनाव दूर करने का तरीका: शादी वाले घर में काम की वजह से होने वाली भागम-भाग की वजह से भारी तनाव होता है। ऐसे में ढोलक की थाप पर गाए जाने वाले ये गीत इसी भारी माहौल को हल्का करने और स्ट्रेस को कम करने का काम करते थे।

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