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    'जुग-जुग जिय सू ललनवा...' सिर्फ एक गीत नहीं, जानिए बच्चे के जन्म पर गाए जाने वाले सोहर की खूबसूरत कहानी

    Updated: Sun, 03 May 2026 01:23 PM (GMT+05:30)

    बिहार और उत्तर भारत के क्षेत्रों में बच्चे के जन्म की खुशी पर सोहर गाने की परंपरा है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। ...और पढ़ें

    बच्चे के जन्म पर गाया जाता है पारंपरिक लोकगीत सोहर (AI Generated Image)

    बच्चे के जन्म पर गाया जाता है पारंपरिक लोकगीत सोहर (AI Generated Image)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में लोकगीतों का अपना एक महत्व है और जब बात नए मेहमान के आगमन की हो, तो सोहर की मधुर धुनों के बिना उत्सव अधूरा लगता है। सोहर मुख्य रूप से मिथिला और उत्तर भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित एक ऐसा पारंपरिक लोकगीत है, जो बच्चे के जन्म की खुशी को जाहिर करने के लिए गाया जाता है। 

    यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि हमारे परिवार और समाज की सामूहिक खुशियों, बुजुर्गों के आशीर्वाद और सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।  

    कब और कैसे गाया जाता है सोहर?

    बच्चे के जन्म के तुरंत बाद से ही घर में सोहर की गूंज सुनाई देने लगती है। खासतौर से जन्म के छठे दिन, जिसे छठी संस्कार कहा जाता है, इस अवसर पर महिलाएं समूह में इकट्ठा होती हैं। ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक के साथ जब महिलाएं ऊंचे स्वर में सोहर गाती हैं, तो पूरा वातावरण मांगलिक और हर्षोल्लास से भर जाता है। इन गीतों की पंक्तियों में नवजात के लिए अपार स्नेह, खुशी और उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं छिपी होती हैं।

    Sohar (1)

    (AI Generated Image)

    वैदिक काल से चली आ रही विरासत

    सोहर की जड़ें भारतीय इतिहास में बहुत गहरी हैं। इतिहासकारों का ऐसा मानना है कि वैदिक काल से ही संतान जन्म जैसे शुभ अवसरों पर मंगल गीत गाने की परंपरा रही है। समय के साथ मिथिला की महिलाओं ने इस परंपरा को न केवल संरक्षित किया, बल्कि इसे और भी समृद्ध बनाया। 

    कई सोहर गीतों में भगवान राम और भगवान कृष्ण के जन्म के प्रसंगों का बहुत ही सुंदर वर्णन मिलता है। आध्यात्मिक रंग में रंगे ये गीत लोक परंपरा को भक्ति मार्ग से जोड़ देते हैं।

    भावनाओं और व्यंग्य का अनूठा संगम

    सोहर गायन की सबसे बड़ी खासियत इसकी विविधता है। जहां एक ओर इन गीतों में नवजात शिशु के लिए आशीर्वाद और मंगलकामनाएं होती हैं, वहीं दूसरी ओर इसमें एक मां के त्याग का भी वर्णन मिलता है। गीतों के जरिए उस पीड़ा और संघर्ष को भी व्यक्त किया जाता है, जिसे सहकर एक मां शिशु को जन्म देती है और फिर जो सुख उसे मिलता है।

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    इतना ही नहीं, सोहर में हल्के-फुल्के मजाक और तीखे व्यंग्य भी शामिल होते हैं। परिवार के अन्य सदस्यों पर किए जाने वाले ये मधुर कटाक्ष और हास्य-व्यंग्य वातावरण को और भी खुशहाल बना देते हैं।