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करोड़ों दिलों पर राज करने वाले इस गुजराती गाने के पीछे छिपी है एक लोक कथा, हाजी कसम नी वीजली से जुड़ी है कहानी

Published: Wed, 14 Oct 2026 09:57 AM (IST)

कोक स्टूडियो का गुजराती गाना खलासी, 19वीं सदी के एक लापता जहाज की कहानी से प्रेरित है।

क्या है हाजी कसम नी वीजली की कहानी? (AI Generated Image)

क्या है हाजी कसम नी वीजली की कहानी? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कोक स्टूडियो का गुजराती गाना खलासी लोगों के बीच काफी वायरल हुआ था। इस गाने को मशहूर गुजराती सिंगर आदित्य गढ़वी और अचिंत ठक्कर ने अपनी आवाज दी थी। इस गाने की धुन जितनी लाजवाब है, उतनी ही मजेदार इस गाने के पीछे की कहानी भी है। 

दरअसल, इस गाने में गुम हुए एक जहाज और एक बहादुर नाविक की कहानी छिपी है। आइए जानें क्या है खलासी गाने की कहानी।  

हाजी कसम नी वीजली का हादसा

इस गाने की प्रेरणा 19वीं सदी की एक दुखद घटना से जुड़ी है। 8 नवंबर 1888 को गुजरात के तट के पास एक जहाज गायब हो गया था, जिसे हाजी कसम नी वीजली कहा जाता था। इस जहाज को गुजरात का टाइटेनिक भी कहा जाता है। 

मांडवी से मुंबई जा रहे इस जहाज पर करीब एक हजार लोग सवार थे। एक भयानक तूफान के कारण ये जहाज समुद्र की गहराइयों में खो गया और इस पर सवार एक भी इंसान कभी वापस नहीं लौटा। इस भीषण हादसे ने गुजरात मछुवारा और नाविक समुदाय को हिलाकर रख दिया था। वो समंदर, जो उनकी रोजी-रोटी का जरिया था, वहीं, इतनी बड़ी तबाही का कारण बन गया था। 

इस गाने में क्या कहा गया है? 

ये गीत हाजी कसम नी वीजली की कहानी से प्रेरित होकर बना है। गोतीलो गुजराती भाषा का एक शब्द है, जिसका मतलब होता खोजो या तलाश करो। इस गाने में पूछा जा रहा है कि आखिर कौन है वो सच्चा खलासी, जिसे कोई भयानक आंधी या तूफान नहीं रोक सकते? कौन है, जो हमें सही दिशा दिखाएगा और इस उफनते समुद्र से सुरक्षित किनारे तक पहुंचाएगा? ये गाना उन बहादुर नाविकों के लिए एक सम्मान है, जो जिंदगी में किसी भी तूफान से डरते नहीं हैं। 

मन में गोता लगाने की सीख

गोतीलो गाना सिर्फ समुद्र और जहाज तक सीमित नहीं है। इसमें आगे जीवन के दर्शन से भी जुड़ी बात कही गई है। इस गाने में कहा गया है कि हम सभी अपने-अपने जीनन में एक खलासी हैं और हमारा मन एक विशाल समुद्र जैसा है।

इस समुद्र में परेशानियों और चुनौकियों के तूफान आते रहते हैं, लेकिन सच्चा खलासी वही है, जो अपने मन की उथल-पुथल भरे समुद्र में गहराई तक गोता लगाकर असली मोती यानी आत्म ज्ञान को खोज निकाले। इस गाने ने सदियों पुरानी उस त्रासदी और बहादुरी की लोक-कथा को संगीत के जरिए अमर कर दिया है। 


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