फोन की गुलामी से चाहिए आजादी? नोटीफिकेशन ऑफ करने से टाइमर लगाने तक, ऐसे फॉलो करें डिजिटल बाउंड्री रूल
डिजिटल डिटॉक्स को सख्ती से फॉलो करना चाहते हैं तो डिजिटल बाउंड्री रूल को भी उतनी ही सख्ती से अपनाएं। ...और पढ़ें

संकेत जो बताते हैं कि आपको डिजिटल बाउंड्री की है जरूरत (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ऐसा मुश्किल ही कोई दिन होगा जब हमने अपना फोन इस्तेमाल न किया हो। स्मार्टफोन जिंदगी का इतना अहम हिस्सा बन गया है कि इसके बिना रहा ही नहीं जाता, इसलिए तो डिजिटल डिटॉक्स की बात की जाती है, पर अब इससे काम नहीं चलने वाला क्योंकि इन दिनों डिजिटल बाउंड्री भी सुर्खियों में है।
क्या है डिजिटल बाउंड्री?
डिजिटल बाउंड्री इरादे से तय की जाने वाली वो सीमा है जिसमें व्यक्ति सोच-समझकर कुछ लोगों से दूरी बनाता है। उसे इस बाउंड्री में यह तय करना होता है कि वह कब, किस समय, कितना और किन लोगों से डिजिटली जुड़ा रहेगा।
हमेशा डिजिटल डिटॉक्स को फॉलो करने की बात तो की जाती है लेकिन इसका तरीका क्या होगा इसपर कोई बात नहीं करता। ऐसे में आप इसे एक अपने फोन जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने की आदत पर कंट्रोल का एक रूल मान सकते हैं। जबकि बिना डिजिटल बाउंड्री के स्मार्टफोन कैसे समय खराब करने लगता है, इसके बारे में लोग ही नहीं पाते।
संकेत जो बताते हैं कि आपको डिजिटल बाउंड्री की है जरूरत
कुछ लोग यह समझ ही नहीं पाते कि डिजिटली जरूरत से ज्यादा अवेलेबल रहना उनकी जिंदगी को प्रभावित कर रहा है। आइए जानते हैं इनके संकेत:
सुबह उठते ही फोन चेक करना
फोन के बगैर दिनभर काम में फोकस न कर पाना
फोन के बिना घबराहट महसूस करना
रात में सोते समय फोन चलाना
रिश्ते खराब होना
हमेशा थकान महसूस करना
डिजिटल बाउंड्री बनाने के तरीके
ऐसे कई टिप्स और ट्रिक्स हैं जिनकी मदद से डिजिटली बाउंड्री सेट की जा सकती है:
डिजिटली अपनी सीमा तय करने का सबसे पहला तरीका है अपने फोन की नोटिफिकेशन बंद कर देना। इनमें भी सभी एप्स की नहीं पर गैर जरूरी एप्स की। यह तरीका दिमाग को बार-बार भटकने से रोकेगा।
वहीं, जरूरी एप्स इस्तेमाल करने के लिए एक टाइम सेट कर दें। अगर दिन में कई बार ईमेल चेक करते हैं तो इसे केवल दो बार तक ही सीमित रखें।
घर में अपना शेड्यूल ऐसा तैयार करें कि फोन यूज करने का समय ही न मिले।
डिजिटल लोगों से कम से कम बातचीत करें, यह ट्रिक रोज-रोज बात करने के डोपामिन को बढ़ाएगी नहीं।
वहीं, सोशल मीडिया को पूरी तरह से छोड़ना एक मुश्किल टास्क है, इसके लिए रोजाना उसे 1 घंटे तक सीमित करें।