पैसे से ज्यादा मानसिक सुकून और आजादी की तलाश में रहते हैं Gen-Z, ग्लोबल रिपोर्ट में हुए दिलचस्प खुलासे
डेलॉइट ने दुनिया भर के 44 देशों में 23 हजार युवाओं से बात करके उनकी नब्ज टटोली। इस सर्वे के नतीजे बताते हैं कि युवा अब पुरानी लकीर के फकीर नहीं रहे। ज ...और पढ़ें

Gen-Z के लिए पैसा जरूरी है, पर मेंटल हेल्थ की कीमत पर नहीं (Image Source: AI-Generated)
HighLights
Gen-Z के लिए पैसे का मतलब आजादी और मानसिक सुकून है
40% युवाओं ने मेंटल हेल्थ के लिए कमाई के मौके छोड़ देते हैं
आज की युवा पीढ़ी अनुभवों पर खर्च को 'मानसिक निवेश' मानती है
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हर पीढ़ी के लिए पैसे का महत्व अलग रहा है, लेकिन आज की युवा पीढ़ी यानी Gen-Z के लिए पैसे के मायने पूरी तरह बदल चुके हैं। उनके लिए यह केवल बैंक बैलेंस बढ़ाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, आजादी और मानसिक सुकून का एक साधन है।
डेलॉइट (Deloitte) द्वारा 44 देशों में किए गए एक ग्लोबल सर्वे ने इस पीढ़ी की आर्थिक सोच को लेकर कई दिलचस्प खुलासे किए हैं, जिसमें 23 हजार युवाओं की राय ली गई। आइए जानते हैं जेन-जी की इस नई आर्थिक दुनिया के बारे में।

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भविष्य की चिंता और आर्थिक असुरक्षा
रिपोर्ट के अनुसार, जेन-जी का पैसों के साथ रिश्ता काफी उलझा हुआ है। करीब 60% युवा अपने आर्थिक भविष्य को लेकर लगातार चिंता में रहते हैं। वहीं, लगभग 70% युवाओं का मानना है कि वे अपने माता-पिता की तुलना में कम आर्थिक सुरक्षा में जी रहे हैं।
इस डर और असुरक्षा के पीछे कई ठोस कारण हैं:
- तेजी से बढ़ती महंगाई।
- गिग इकॉनमी और अस्थाई नौकरियों का चलन।
- एजुकेशन लोन का भारी बोझ (विशेषकर अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों में)।
लोन चुकाने का दबाव उन्हें जल्द कमाने के लिए मजबूर तो करता है, लेकिन वे लंबे समय तक एक ही कंपनी या नौकरी में बंधकर नहीं रहना चाहते।
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पैसा जरूरी है, पर मेंटल हेल्थ की कीमत पर नहीं
इस सर्वे का सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि करीब 40% युवाओं ने केवल अपने मानसिक स्वास्थ्य को बचाने के लिए कमाई के अच्छे मौके छोड़ दिए।
डेलॉइट की ह्यूमन कैपिटल लीड, जेनी हेंडरसन के अनुसार, जेन-जी के लिए पैसा बहुत जरूरी है, लेकिन वे इसे अत्यधिक शारीरिक और मानसिक थकावट की कीमत पर नहीं कमाना चाहते। उनके लिए काम और जीवन के बीच संतुलन (Work-Life Balance) सबसे ऊपर है।

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'पैकेज' से ज्यादा 'परपज' है प्यारा
यह पीढ़ी काम की 'कीमत' से ज्यादा उसके 'उद्देश्य' पर भरोसा करती है। जेन-जी ऐसे काम करना पसंद करती है जो:
- पर्यावरण के अनुकूल हों।
- समाज में बदलाव लाते हों।
- उनके व्यक्तिगत मूल्यों से मेल खाते हों।
यही कारण है कि आज के युवा नए स्टार्ट-अप्स, फ्रीलांसिंग और सामाजिक बदलाव से जुड़े पेशों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, भले ही वहां शुरुआत में कमाई थोड़ी कम क्यों न हो।
'यादें' बनाने पर खर्च करते हैं जेन-जी
जेन-जी के लिए पैसे खर्च करने का तरीका भी पिछली पीढ़ियों से एकदम अलग है। वे एक तरफ तो बचत और इमरजेंसी फंड बनाना चाहते हैं, लेकिन दूसरी तरफ वे अनुभवों पर खुलकर खर्च भी करते हैं।
ट्रैवल करना, नए गैजेट्स लेना, म्यूजिक कॉन्सर्ट में जाना, फिटनेस और सेल्फ-केयर पर पैसे लगाने को वे 'फिजूलखर्ची' नहीं मानते। उनकी नजर में यह एक 'मानसिक निवेश' है। वे पैसे को सिर्फ जमा करने के बजाय जिंदगी को महसूस करने और जीने के लिए खर्च करना पसंद करते हैं।
कुल मिलाकर, जेन-जी के लिए पैसा अब सिर्फ एक डिजिट नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, अपनी पहचान और एक बैलेंस लाइफ जीने का टूल बन चुका है। यही सोच उन्हें पिछली पीढ़ियों से अलग बनाती है और भविष्य की अर्थव्यवस्था को एक नया आकार दे रही है।