घोड़ागाड़ी के दौर में दुनिया को दी इलेक्ट्रिक ट्रेन, बेहद दिलचस्प है 'फादर ऑफ द थर्ड रेल' की कहानी
बियोन जे. अर्नोल्ड ने इलेक्ट्रिक ट्रेन का आविष्कार कर यातायात में क्रांति ला दी। उन्हें 'फादर ऑफ द थर्ड रेल' के नाम से जाना जाता है।

इलेक्ट्रिक ट्रेन के आविष्कारक कौन हैं? (Picture Courtesy: Facebook)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज हमें कहीं जाना होता है, तो इलेक्ट्रिक ट्रेन या मेट्रो में बैठकर हम आसानी से अपनी मंजिल तक पहुंच जाते हैं, लेकिन क्या आपने सोचा है इलेक्ट्रिक ट्रेन बनाने के पीछे किसका दिमाग था? इलेक्ट्रिक बनाने का श्रेय अमेरिकी इंजीनियर बियोन जे. अर्नोल्ड को जाता है।
उन्होंने इलेक्ट्रिक ट्रेन के जरिए यातायात को एक आधुनिक और नया रूप दिया। आइए जानें यातायात में क्रांति लाने वाले इस महान इंजीनियर की जिंदगी से जुड़ी कुछ बातें।
मुश्किल स्थितियों से जागी रुचि
बियोन जोसेफ अर्नोल्ड का जन्म 14 अगस्त 1861 को अमेरिका के मिशिगन में हुआ था। उनके पिता जोसेफ अर्नोल्ड और माता गेराल्डाइन रेनॉल्ड थीं। उनका बचपन बहुत ही मुश्किल माहौल में बीता, जिसने उनके अंदर मशीनों की तरह रुचि पैदा की।
बचपन से ही उनमें इंजीनियरिंग से जुड़ी प्रतिभा थी। सिर्फ 6 साल की उम्र में वे खेती से जुड़ी मशीनों के मॉडल बनाने लगे थे। टीनएज में उन्होंने छोटे स्टीम इंजन बनाएं, 17 साल की उम्र में साइकिल और 18 साल की उम्र में एक लोकोमोटिव इंजन तैयार कर दिया। आधुनिक लैब्स और सुविधाओं की कमी के बावजूद उन्होंने सीमित साधनों और अपने प्रयोगों से ही यह सब सीखा।
शिक्षा और शुरुआती करियर
अर्नोल्ड की शुरुआत शिक्षा नेब्रास्का स्टेट में पूरी हुई और आगे की पढ़ाई उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का और हिल्सडेल कॉलेज से पूरी की। साल 1884 में बी.एस, 1887 में एम.एस और 1888-89 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।
इसके बाद उन्होंने लोवा आयरन वर्क्स, शिकागो ग्रेट वेस्टर्न रेलवे और जनरल इलेक्ट्रिक के साथ काम किया। 1893 में उन्होंने इंडिपेंडेंट कंसल्टिंग इंजीनियरिंग का काम शुरू किया।
फादर ऑफ द थर्ड रेल
19वीं सदी के अंत तक शहर घोड़ागाड़ी और भाप से चलने वाली रेलों पर यातायात के लिए निर्भर थे। उस समय अर्नोल्ड ने इलेक्ट्रिक ट्राम और रेलेवे को मजबूत बनाने के लिए मोटर और ट्रैक सिस्टम पर काम किया। उनके योगदान के लिए उन्हें फादर ऑफ द थर्ड रेल भी कहा जाता है। ट्रेनों को बिजली देने के लिए पटरियों के साथ एक अलग इलेक्ट्रिक रेल का इस्तेमाल होता था, जो दुनियाभर में सबवे सिस्टम का आधार बनी।
उन्होंने न्यूयॉर्क के ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल का इलेक्ट्रिफिकेशन प्लान तैयार किया। जब 1904 में पहली IRT सबवे लाइन शुरू हुई, तो वहां यात्रियों की संख्या उम्मीद से ज्यादा बढ़ गई। इसके अलावा, 1893 में वर्ड्स कोलंबियन एक्सपोजिशन और शिकागो रेलवे प्रणाली के विकास में अर्नोल्ड की अहम भूमिका रही।
प्रथम विश्व युद्ध में भूमिका
अर्नोल्ड सिर्फ रेलव तक सीमित नहीं रहे। 1898 में उन्होंने बिजलीघरों की AC बिजली को सब-स्टेशन में DC में बदलने की तकनीक विकसित की। उन्होंने मैग्नेटिक क्लच और स्टोरेज बैटरीज के क्षेत्र में भी योगदान दिया। 1917 के प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने अमेरिकी सेना के सिग्नल कॉप्स में लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में एयरक्राफ्ट इक्विपमेंट प्रोडक्शन में अपनी सेवाएं दी। 1903 में वे AIEE के अध्यक्ष बने। इस महान आविष्कारक का 29 जनवरी 1942 में निधन हो गया।
