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    'मत दो बाई ने गाल...' राजस्थानी लोकगीत में क्या है 'चिडकोली' का मतलब? गणगौर और तीज पर खूब गाया जाता है ये गीत

    Updated: Tue, 28 Jul 2026 03:32 PM (IST)

    राजस्थानी लोकगीत चांद चडयो गिगनार में चिडकोली का मतलब छोटी चिड़िया से है। ...और पढ़ें

    बहुत खूबसूरत है राजस्थान का ये लोकगीत (AI Generated Image)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। राजस्थान के लोकगीतों में उसकी संस्कृति छिपी हुई है। इनकी मधुर तान और खूबसूरत बोल राजस्थान के रोजमर्रा के जीवन और इतिहास को बहुत खूबसूरती से बयां करते है। इन्हीं में एक लोकगीत है चांद चडयो गिगनार।

    इस लोकगीत में एक मां का उसकी बेटी के लिए स्नेह और उसकी विदाई का भावुक कर देने वाला जिक्र मिलता है। इस गाने के बोल हैं मत दो बाई ने गाल, बाई म्हारी चिडकोली जी चिडकोली…। अब सोशल मीडिया पर इस गाने का मतलब थोड़ा गलत निकाला जा रहा है। इस गाने में बेटी को चिडकोली कहा गया है, जिसका मतलब कई लोग चिड़चिड़ी समझ रहे हैं। हालांकि, इसका असली मतलब कुछ और ही है। आइए जानें इस लोकगीत में बेटी को चिडकोली क्यों कहा गया है। 

    चिडकोली का क्या मतलब है?

    राजस्थान में चिडकोली का मतलब है एक छोटी चिड़िया, जैसे गोरैया। इस लोकगीत में बेटी को ये छोटी चुलबुली चिड़िया बताया गया है। जैसे छोटी चिड़िया किसी आंगन में चहकती है, दाना चुगती है और फुर्र से आसमान में उड़ जाती है, उसी तरह बेटी भी अपने मायके में कुछ समय रहती है, फिर शादी होते ही अपने माता-पिता का घर छोड़कर ससुराल चली जाती है। इसलिए इस गाने में मां अपनी प्यारी बेटी की तुलना उसी चंचल और छोटी चिड़िया से कर रही है।  

    इस लोकगीत में मां क्या कहती है?

    ये गीत तीज के समय खूब गाया जाता है, जिसमें मां बेटी के पिता से कहती है कि उसे डांटो मत, वो एक छोटी चिड़िया है। ये नाजुक चिड़िया हमारे घर चार दिन रुकेगी, फिर उड़ जाएगी। इस गीत में आगे मां कहती है कि सावन के सिर्फ चार दिन हैं, फिर जमाई सा आएंगे और बेटी को फिर से ससुराल ले जाएंगे। इसलिए लाडली बेटी को डांटो मत, वह कुछ ही दिनों में विदा होकर ससुराल चली जाएगी। 

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    क्यों है यह लोकगीत इतना खास?

    यह लोकगीत गणगौर, सावन, शादी-ब्याह के अवसर पर महिलाएं साथ मिलकर गाती हैं और बेटी के लिए मां के प्रेम और उसकी विदाई की भावना को जाहिर करती हैं। इसलिए बेटी जितने दिन मायके में है, वह उसे लाड़-प्यार से रखना चाहती है। इस लोकगीत में मां के दिल की भावना और प्रेम को बहुत खूबसूरत तरीके से बयां किया गया है। राजस्थान के कई लोकगीतों में बेटी की तुलना चिड़िया से की जाती है।