विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'परिछन चलली सासू सुहागिन…' सिर्फ एक रस्म नहीं, जानें शादियों में द्वार-पूजन और परिछन गीतों का महत्व

Published: Wed, 13 May 2026 10:42 AM (IST)

बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में शादी में परिछने की रस्म निभाई जाती है। इस दौरान सुहागिन महिलाएं दूल्हे पर गीतों के जरिए मीठे तंज कसती हैं।

शादियों में दुल्हे के स्वागत में गाए जाते हैं परिछन गीत (AI Generated Image)

शादियों में दुल्हे के स्वागत में गाए जाते हैं परिछन गीत (AI Generated Image)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर भारत, खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश की शादियों में सिर्फ बैंड-बाजा और बाराती ही नहीं, बल्कि लोकगीतों की मधुर गूंज उत्सव की आत्मा होती है। विवाह के ढेरों रस्मों के बीच परिछन एक ऐसी परंपरा है, जिसमें दूल्हे का स्वागत बड़े ही अनोखे और पारंपरिक गीतों के साथ किया जाता है।

यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि ससुराल की दहलीज पर आए नए सदस्य के लिए प्रेम, सत्कार और कहीं-कहीं मधुर व्यंग्य का एक संगम है, जिसमें वधु पक्ष की महिलाएं दुल्हे और बारातियों के साथ हंसी-मजाक करती हैं। 

क्या है परिछन और इसके गीतों का महत्व?

जब बारात दरवाजे पर आती है, तब दुल्हन की मां और परिवार की दूसरी सुहागिन महिलाएं हाथ में आरती की थाल लेकर दूल्हे की आरती उतारती हैं। इसी को परिछन कहा जाता है। इस समय गाए जाने वाले गीतों को परिछन गीत कहते हैं। 

पुरवा पछिमवा से अइले सुंदर दुल्हा; जुराबे लगगी हे, सासू अपनी नयनवा… ढोलक की थाप पर गाए जाने वाले ऐसे ही गीतों में दूल्हे के रूप की प्रशंसा की जाती है और साथ ही उसे यह भी बताया जाता है कि अब वह एक नए अटूट बंधन में बंधने जा रहा है। इन गीतों की पंक्तियों में शादीशुदा जीवन की सफलता के लिए ढेरों दुआएं छिपी होती हैं।

parichhan  (1)

(AI Generated Image)

मिथिला और अवध की सांस्कृतिक झलक

परिछन गीतों का अपना एक अलग इतिहास है। बिहार के मिथिलांचल में इन गीतों में भगवान राम के जनकपुर आने के प्रसंगों का वर्णन मिलता है। निंदिया के मातल दुल्हा, झुकी झुकी जाए हे; कहां गेली माय सुनैना, परिछु जमाय हे… जैसे कई गीतों में राम-जी के जनकपुर में स्वागत का वर्णन मिलता है।  ऐसे गीतों के जरिए यह दर्शाया जाता है कि दूल्हा सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि उस घर के लिए एक सम्मानित अतिथि है।

हास-परिहास और मीठी गालियां

परिछन गीतों की सबसे रोचक बात है इसमें शामिल गारी यानी व्यंग्य। ये गीत समधी और दूल्हे के साथ किया जाने वाला हंसी-मजाक रिश्तों की मधुरता को बढ़ाते हैं। गीतों के जरिए महिलाएं दूल्हे के स्वभाव, उसकी आदतों और उसके परिवार पर हल्के-फुल्के तंज कसती हैं, जैसे- राम जी से पूछे जनकपुर की नारी, बता द बबुआ; लोगवा देत काहे गारी, बता द बबुआ…

यह हंसी-मजाक माहौल के तनाव को कम कर उसे खुशनुमा बना देता है। इन गीतों में छुपे व्यंग्य कभी किसी को चुभते नहीं, बल्कि शादी के उत्सव में ठहाकों का रंग भर देते हैं।

रिश्तों की गरिमा

आज के आधुनिक दौर में भले ही डीजे और शोर-शराबे ने जगह बना ली हो, लेकिन ग्रामीण इलाकों में आज भी परिछन के गीतों के बिना शादी अधूरी मानी जाती है। ये गीत पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से आगे बढ़ते रहे हैं।


देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।