विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

ऑर्केस्ट्रा ही नहीं, ये भी है बिहार का असली नृत्य; फाल्गुन महीने में ढोलक की थाप पर किया जाता है ढामर जोगीरा

Published: Thu, 24 Sep 2026 03:28 PM (IST)

बिहार में फाल्गुन के महीने में ढामर जोगीरा नृत्य किया जाता है। ये नृत्य होली के उल्लास को पेश करता है।

बिहार में होली पर किया जाता है ढामर जोगीरा नृत्य (AI Generated Image)

बिहार में होली पर किया जाता है ढामर जोगीरा नृत्य (AI Generated Image)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार का असली डांस ऑर्केस्ट्रा तक सीमित नहीं है। यहां की असली संस्कृति यहां के लोक नृत्यों में झलकती है, जिसमें ढामर जोगीरा भी शामिल है। फाल्गुन के महीने में जब हवा में होली की मस्ती घुल जाती है, तब ये नृत्य खासतौर से किया जाता है। 

इस नृत्य में महिला और पुरुष, दोनों साथ मिलकर नृत्य करते हैं और होली का आनंद लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस नृत्य की शुरुआत कैसे हुई? आइए जानें ढामर जोगीरा नृत्य का इतिहास और इसकी खासियत। 

कैसे हुई ढामर जोगीरा नृत्य की शुरुआत?

ढामर जोगीरा की जड़े शास्त्रीय लोक संगीत से जुड़ी हैं। ढामर शब्द धमार ताल से निकला है, जो होली के खास अवसर पर गाए जाने वाले गीतों के लिए मशहूर है। जब शास्त्रीय संगीत की धमार शैली लोक जीवन में रची-बसी, तो इन गीतों पर किए जाने वाले नृत्य ने ढामर जोगीरा का रूप ले लिया। 

जोगीरा शब्द जोगी से आया है, जो होली में गाने वाली साधु-संतों की टोली से आया है। फाल्गुन के महीने में साधु-संत गांव में घूमकर प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु की कहानी गाकर सुनाते। धीरे-धीरे इन गीतों में भक्ति रस के साथ-साथ शृंगार रस भी शामिल हुआ और आज के जोगीरा गीतों का जन्म हुआ।

क्या है ढामर जोगीरा नृत्य की खासियत?

ढामर जोगीरा नृत्य होली के उत्साह और उल्लास का प्रतीक है। इसमें शास्त्रीय धमार गायिकी भी है और होली का अल्हड़पन भी देखने को मिलता है। इस नृत्य की सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें जाति, वर्ग या उम्र का कोई बंधन नहीं होता। पुरुष और महिलाएं एक साथ मिलकर इस नृत्य को करते हैं और होली का उत्सव मनाते हैं। 

ढामर जोगीरा में जोगीरा के बोल जोगीरा सारा रा रा रा सुनने को मिलते हैं। जोगीरा में हंसी-मजाक और नोंक-झोंक से भरे गीत भी होते हैं, जो इस नृत्य के गाने में सुनने को मिलते हैं। 

कैसे किया जाता है ढामर जोगीरा नृत्य?

इसमें नर्तक रंग-बिरंगे कपड़ों में सजते हैं और अबीर-गुलाल उड़ाते हुए नृत्य करते हैं। ढोलक, झाल और मंजीरा की धुन पर गायक गीत गाते हैं और नर्तक नृत्य करते हैं। नर्तक गोल घेरे में घूमकर हाथ-पैरों की खूबसूरत मूवमेंट के साथ नृत्य करते हैं।