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फलदान में गाया जाने वाला वो ‘मैथिली लोकगीत’, जो नम कर देता है हर पिता की आंखें; बिहार की शादियों की है जान

Published: Wed, 23 Sep 2026 02:21 PM (IST)

बिहार की शादियों में तिलक-फलदान की रस्म होती है, जिसमें कई खास लोकगीत गाए जाते हैं।

बिहार की शादियों की रस्म को बयां करता है ये लोकगीत (AI Generated Image)

बिहार की शादियों की रस्म को बयां करता है ये लोकगीत (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार की असली संस्कृति वहां के लोकगीतों में बसती है। यहां हर मौके के लिए खास लोकगीत सुनने को मिल जाएंगे। ऐसे ही शादी की अलग-अलग रस्मों के लिए भी यहां कई लोकगीत गाए जाते हैं, जिनमें पूरब दिशा से चलले बेटी के बाबू… भी शामिल है, जिसे तिलक-फलदान की रस्म में गाया जाता है। 

इस लोकगीत को लोक गायिका शारदा सिन्हा ने अपनी आवाज देकर मशहूर किया और आज ये बिहार की हर शादी में जरूर गाया जाता है। भोजपुरी और मैथिलि संस्कृति को बयां करते इस लोकगीत के बोल काफी प्यारे और भावुक कर देने वाले हैं। आइए जानें इस गीत में क्या कहा गया है और इसकी खासियत क्या है। 

तिलक की रस्म का जिक्र

इस गीत में बेटी के पिता के दायित्व और लड़के के पिता के सत्कार को बयां करता है। गीत की शुरुआत होती है पूरब दिशा से चलले बेटी के बाबू यानी पूर्व दिशा से बेटी के पिता अपने घर से दूल्हे के घर लगन चढ़ाने के लिए निकले हैं। पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। इसलिए गीत में कहा गया है कि बेटी के पिता पूर्व दिशा से निकले हैं। 

गीत में आगे बताया गया है कि  बेटी के ससुराल जाने के लिए पिता ने पीली धोती और रेशमी चादर पहनी है। लगन चढ़ाई के लिए पीला रंग शुभ माना जाता है। साथ में वो अपने साथ बेशुमार मोहरे यानी पैसे, उपहार और तिलक की सामग्री लेकर चले हैं।  

दूल्हे के घर समधी का सत्कार

इस गीत में आगे कहा गया है अपनी महलिया से निकले बेटा के दादा या पिता, मनवा रहत मुस्कात जी यानी अपने बेटे के लगन चढ़ाई के लिए अपने घर से बेटे के पिता निकले हैं और बेटे की शादी की खुशी में मन ही मन मुस्कुरा रहे हैं। 

इसके आगे गीत के बोल हैं लगन अरजी परची घरवा में गइले जी, समधी के करे सतकार जी अजी। इसमें तिलक की रस्म को बयां किया गया है कि दूल्हे के घर लगन पत्रिका आई है और लड़के वाले लड़की के पिता यानी अपने समधी का आदर सत्कार के साथ स्वागत कर रहे हैं। 

किस शादी की रस्म की बात हो रही है?

बिहार की शादियों में फलदान-तिलक की बहुत खास रस्म होती है। इसमें दुल्हन के पिता और भाई लग्न पत्री और तिलक का सामान लेकर दूल्हे के घर आते हैं। लड़की के पिता दूल्हे के लिए कपड़े, मेवे, अंगूठी, चैन आदि लेकर आते हैं और दूल्हे को भेंट देते हैं। 

क्यों यह गीत इतना खास है?

इस गीत में बिहार की शादियों की बहुत खास रस्म को बहुत खूबसूरती से बयां किया गया है। इस गीत के बोल तो प्यारे हैं ही, साथ ही, पंक्तियों के अंत में इस्तेमाल हुए ए जी जैसे शब्द इसकी धुन को और भी मजेदार बना रहे हैं। ये मिथिला की मीठी संस्कृति को भी पेश करते हैं। उस क्षेत्र के बोलचाल का तरीका काफी मिठास भरा है, जो इस गीत में साफ झलकता है।