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न अंग्रेजी बीट, न भारी म्यूजिक... अपने शरारती बोलों के लिए मशहूर है ये पंजाबी लोकगीत, आज भी लूट लेता है महफिल

Published: Wed, 16 Sep 2026 12:08 PM (IST)Updated: Thu, 17 Sep 2026 02:04 PM (IST)

इस आर्टिकल में आप एक ऐसे पंजाबी लोकगीत के बारे में जानेंगे, जो शादी-पार्टी और क्लबों में आज भी धूम मचाता है।

इस पंजाबी लोकगीत के बिना आज भी महफिल की 'बैटरी' चार्ज नहीं होती (Image Source: AI-Generated)

इस पंजाबी लोकगीत के बिना आज भी महफिल की 'बैटरी' चार्ज नहीं होती (Image Source: AI-Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। "पीछे-पीछे आउंदा मेरी चाल वेहंदा आईं..." के बोल कानों में पड़ते हैं, तो महफिल में चुपचाप बैठे शर्मीले लोग भी खुद को रोक नहीं पाते और सीधे डांस फ्लोर पर भांगड़ा करते नजर आते हैं।

जी हां, आपने बिल्कुल सही पहचाना। हम बात कर रहे हैं उसी सदाबहार पंजाबी एंथम 'मेरा लौंग गवाचा' की। क्या थिरकते कदमों के बीच आपके मन में कभी यह सवाल आया है कि एक छोटी -नाक की लौंग के गुम हो जाने की बात में ऐसा कौन-सा जादू छिपा है?

आखिर इस गाने के बोलों का असली मतलब क्या है, जिसने दशकों से शादियों से लेकर क्लबों तक में अपना भौकाल मचा रखा है? आइए, इस पंजाबी लोकगीत के असली मायने को करीब से समझते हैं।

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(Image Source: AI-Generated)

कीमती 'लौंग' खोने पर प्रेमी से रूठ गई मुटियार

यह गाना पंजाब की समृद्ध संगीत परंपरा में रचा गया एक बेहद पुराना और पारंपरिक लोकगीत है। इस गाने में 'लौंग' का मतलब किचन का कोई मसाला नहीं है, बल्कि यह महिलाओं द्वारा नाक में पहने जाने वाला एक आभूषण है, और 'गवाचा' का अर्थ होता है 'खो जाना'।

कुल मिलाकर यह गीत एक मुटियार, यानी जवान लड़की के बारे में है, जिसकी नाक का कीमती लौंग कहीं गिर कर खो गया है। वह अपने प्रेमी से नखरे दिखाते हुए और मीठी नोकझोंक करते हुए उसे ढूंढने के लिए कह रही है।

प्रेमी का ध्यान खींचने का खूबसूरत तरीका

इस लोकगीत के बोल भले ही बहुत आसान लगते हों, लेकिन इनके पीछे प्यार और मासूमियत के जज्बात बहुत मजबूती से छुपे हैं। इस गाने की एक सबसे मशहूर पंक्ति है:

"पीछे-पीछे आउंदा मेरी चाल वेहंदा आईं, चीरे वालिया वेखदा आईं वे मेरा लौंग गवाचा।"

इन लाइनों का मतलब है, "तुम मेरे पीछे-पीछे आ रहे हो और मेरी चाल निहार रहे हो, ओ पगड़ी वाले! जरा नीचे भी देखते आना, कहीं मेरा खोया हुआ लौंग मिल जाए।" यहां लौंग का खोना सिर्फ एक बहाना है, असल में यह प्रेमी जोड़े के बीच की एक खट्टी-मीठी नोकझोंक और एक-दूसरे का ध्यान अपनी ओर खींचने का प्यारा तरीका है।

हर दिल में उमंग भर देता है ये लोकगीत

इस गाने की धुन इतनी साधारण और शब्द इतने मनमोहक हैं कि यह तुरंत जुबान पर चढ़ जाता है। इसी खासियत ने इसे पंजाब के खेतों और आंगनों से निकालकर बड़े-बड़े उत्सवों और शादियों तक पहुंचा दिया।

जब भी भांगड़ा या गिद्दा होता है, तो यह गाना उसमें एक अलग ही जान फूंक देता है। यह गीत सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं गाया जाता, बल्कि यह प्रेम, जवानी की उमंग और उत्सव के उल्लास को एक साथ बयां करने का भी एक जरिया बन चुका है।

आज पब और पार्टियों में मचा रहा है धमाल

एक वक्त था जब यह गीत सिर्फ पंजाब के लोक संगीत तक ही सीमित था। आपको बता दें कि इसे पहली बार 1965 में दिग्गज गायिका सुरिंदर कौर और मोहम्मद सादिक ने रिकॉर्ड किया था। बाद में 80 के दशक में मशहूर पाकिस्तानी गायिका मुसर्रत नजीर ने इसे अपनी आवाज दी और यह गाना रातों-रात अमर हो गया।

आज के दौर में यह बड़े शहरों के महंगे पब और डांस फ्लोर पर भी जमकर बजता है। इसे नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाने में मॉडर्न डीजे का बड़ा हाथ रहा है। 'न्यूक्लिया' और 'बाली सग्गू' जैसे कलाकारों ने जब इसे अपना मॉडर्न टच दिया, तो यह गाना युवाओं की पार्टियों और क्लबों की शान बन गया और आज भी लोगों को उसी उत्साह के साथ नचाता है।

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