न मशीन, न मॉडर्न तरीका! डबरा सेट में छनकर आने वाली साउथ की इस 'डिग्री कॉफी' का बेहद अनोखा है इतिहास
इतनी तरह की कॉफी के बीच भारत में एक ट्रेडिशनल कॉफी भी है जिसके नाम के आगे डिग्री लगाया जाता है।

कुंभकोणम की पारंपरिक डिग्री कॉफी (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आपने लाटे, कैपचीनो, फिल्टर और ब्लैक कॉफी तो बहुत बार पी होगी पर कभी साउथ इंडिया की मशहूर डिग्री कॉफी का स्वाद चखा है? इस कॉफी की सबसे खास बात यह है कि इसे मॉडर्न नहीं बल्कि ट्रेडिशनल तरीके से तैयार किया जाता है। आइये आपको दक्षिण भारत की डिग्री कॉफी के बारे में विस्तार से बताते हैं।
कुंभकोणम की पारंपरिक डिग्री कॉफी
दक्षिणी भारत में कुंभकोणम एक जगह है जो कॉफी बनाने के पारंपरिक तरीके की वजह से सुर्खियों रहता है। यह कॉफी खासतौर से अपने गाढ़ेपन, बेहतरीन खुशबू और लाजवाब स्वाद के लिए जानी जाती है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह कॉफी केवल एक पेय नहीं है, इसका नाता कुंभकोणम की संस्कृति, इतिहास और स्वाद तीनों से जुड़ा हुआ है।
अब बात कि आखिर इसे डिग्री कॉफी क्यों कहा जाता है तो इसकी भी एक वजह है। दरअसल, इस कॉफी को बगैर पानी मिक्स किए गाय के शुद्ध दूध से बनाया जाता है। दूध कितना शुद्ध है इसे मापने के लिए लैक्टोमीटर की मदद ली जाती है, इसी वजह से इसका नाम डिग्री कॉफी रखा गया।
क्या है डिग्री कॉफी का इतिहास?
इस कॉफी की शुरुआत 17वीं शताब्दी से बताई जाती है। कहते हैं कि बाबा बुदन नाम का एक संत यमन यात्रा से 7 कॉफी के बीज छिपाकर भारत लेकर आया था। उसका उद्देश्य इस कॉफी को अपने देश में उगाना था। इस तरह कॉफी दक्षिण भारत में प्रचलन में आई। फिर जब अंग्रेज यहां आए तो इसके बागान बढ़ा दिए गए और देखते ही देखते 20वीं शताब्दी तक तो कुंभकोणम की डिग्री कॉफी लोगों के बीच खूब फेमस हो गई।
एक खास तरह के फिल्टर का होता है उपयोग
कुंभकोणम में जब भी डिग्री कॉफी की बनाया जाता है तो उसमें एक खास तरह के फिल्टर का इस्तेमाल करते हैं। इस फिल्टर को वहां डबरा सेट कहते हैं। इसे बनाने के लिए कॉफी को सबसे पहले बागानों से लाकर डिकॉक्शन का प्रोसेस शुरू किया जाता है। बताते चलें कि कॉफी बनाने के लिए अरेबिका और रोबस्टा दोनों तरह के किस्मों का उपयोग होता है।
कुंभकोणम कहां है?
दक्षिण भारत में कुंभकोणम तमिलनाडु राज्य के तंजावुर नामक जिले में स्थित है, जिसे मंदिरों का शहर भी कहते हैं। इस तरह यह शहर डिग्री कॉफी के अलावा अपने प्राचीन मंदिरों के लिए भी दुनियाभर में एक खास पहचान रखता है।

