सिनेमा नहीं, हिटलर के कारण शुरू हुआ था Cannes Film Festival? पढ़ें 1939 की अनसुनी कहानी
सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित इवेंट कान्स फिल्म फेस्टिवल आज यानी 12 मई से शुरू हो रहा है। इस फेस्टिवल की शुरुआत बेहद दिलचस्प कारण से हुई थी। ...और पढ़ें

दिलचस्प है कान्स फिल्म फेस्टिवल शुरू होने की कहानी (Picture Courtesy: Instagram)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सिनेमा जगत के सबसे प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 (Cannes Film Festival 2026) का आज 12 मई से शानदार आगाज हो रहा है। 23 मई तक चलने वाले इस 79वें संस्करण में दुनिया भर के नामचीन सितारे और फिल्म मेकर्स शिरकत कर रहे हैं।
आमतौर पर कान्स को सिनेमा और फैशन के महाकुंभ के रूप में देखा जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि इसका पहला आयोजन कला के लिए कम और तानाशाही के विरोध में ज्यादा हुआ था? दरअसल, कान्स के शुरू होने की असल कहानी फिल्मों से ज्यादा राजनीति से प्रेरित है। आइए इस फिल्म फेस्टिवल के इतिहास और इसके पीछे की दिलचस्प कहानी जानते हैं।

(Picture Courtesy: Instagram)
वेनिस से शुरू हुआ विवाद
कहानी शुरू होती है जुलाई 1938 में, जब इटली में वेनिस मोस्ट्रा (Venice Mostra) नाम की फिल्म प्रतियोगिता हो रही थी। उस समय यह दुनिया का इकलौता बड़ा अंतरराष्ट्रीय फिल्म मंच था। उस साल जूरी ने एक अमेरिकी फिल्म को पुरस्कार के लिए चुना था, लेकिन हिटलर और नाजी दबाव के कारण, यह फैसला बदल दिया गया।
पुरस्कार एक जर्मन प्रोपेगेंडा फिल्म और एक इटैलियन फिल्म को दे दिए गए। इस फैसले से लोकतांत्रिक देशों के प्रतिनिधि भड़क गए। फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन के प्रतिनिधियों ने विरोध में मोस्ट्रा छोड़ दिया और कसम खाई कि वे कभी वापस नहीं लौटेंगे।
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एक नए फेस्टिवल का सपना
फ्रांस लौटते समय ट्रेन में, एक फ्रांसीसी डिप्लोमैट के मन में विचार आया कि वेनिस के विकल्प के रूप में एक ऐसा फिल्म उत्सव शुरू किया जाए, जो किसी राजनीतिक दबाव में न हो। उन्होंने सरकार से संपर्क किया और जल्द ही यह एक मिशन बन गया। 1939 में आधिकारिक तौर पर फ्रांस में एक नए फिल्म फेस्टिवल की घोषणा की गई, जिसे अमेरिका जैसे बड़े देशों का भी समर्थन मिला।
कान्स को कैसे चुना गया?
फेस्टिवल के लिए वेनिस जैसी ही भव्य जगह चाहिए था। शुरुआत में फ्रांस के बियारिट्ज़ शहर को चुना गया था, लेकिन कान्स शहर के होटल मालिकों और स्थानीय प्रतिनिधियों की कोशिशों के बाद, 31 मई 1939 को आधिकारिक तौर पर कान्स को इस आयोजन के लिए चुना गया।
युद्ध की दस्तक
पहला फेस्टिवल 1 सितंबर 1939 को शुरू होना तय था। इसके अध्यक्ष सिनेमा के जनक माने जाने वाले लुई लूमियर थे। इस फिल्म फेस्टिवल को बिना किसी पक्षपात के रखना था, इसलिए फ्रांस ने जर्मनी और इटली को भी आमंत्रित किया था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।
तैयारियां पूरी थीं, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 23 अगस्त 1939 को जर्मनी और सोवियत संघ के बीच समझौते की खबर ने दुनिया को हिला दिया। पर्यटक कान्स छोड़कर भागने लगे। फिर भी, समिति ने प्रतियोगिता की पहली फिल्म द हंचबैक ऑफ नोट्रे-डेम की एक प्राइवेट स्क्रीनिंग रखी, लेकिन 1 सितंबर को, जिस दिन फेस्टिवल का उद्घाटन होना था, जर्मनी ने पोलैंड पर हमला कर दिया और द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो गया। इस वजह से फेस्टिवल रद्द कर दिया गया।
एक नई और सफल शुरुआत

(Picture Courtesy: Festival De Cannes)
युद्ध खत्म होने के बाद, 1946 में आखिरकार इस फेस्टिवल ने अपनी असल उड़ान भरी। 20 सितंबर 1946 को पहली बार पूरी भव्यता के साथ कान फिल्म फेस्टिवल आयोजित किया गया। इसमें 19 देशों ने हिस्सा लिया।
ग्रैंड होटल के बगीचों में शुरू हुआ यह आयोजन आतिशबाजी, फैशन शो और फूलों के उत्सव जैसे कार्यक्रमों से सराबोर था।
तकनीकी खामियों के बावजूद, यह फेस्टिवल जबरदस्त सफल रहा। 1939 के नियमों को मानते हुए, सभी प्रतिभागी देशों को उनके योगदान के लिए पुरस्कार दिए गए। इस तरह कान्स विश्व सिनेमा का सबसे बड़ा केंद्र बन गया, जो आजतक कायम है।