स्वैग में आगे, पर अक्ल में पीछे? क्या सच में पिछली पीढ़ी से कम समझदार है Gen-Z? नई रिसर्च का दावा
एक नई रिसर्च के अनुसार, Gen-Z पहली पीढ़ी है जो बुद्धिमानी में अपने माता-पिता से पीछे है। न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. जेरेड कूनी होर्वाथ ने बताया कि इसका मुख्य ...और पढ़ें
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क्या Gen-Z पिछली पीढ़ी से कम समझदार है? (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
Gen-Z बुद्धिमानी में पिछली पीढ़ी से पीछे
अत्यधिक स्क्रीन उपयोग, एडटेक मुख्य कारण
ध्यान, गणित, समस्या सुलझाने की क्षमता घटी
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। समय बदला और साल 2025 के साथ 'बीटा जनरेशन' का चैप्टर शुरू हो गया। लेकिन, मार्केट में शोर आज भी उसी 'Gen-Z' का है, जो कॉलेज की कैंटीन से लेकर कॉर्पोरेट के क्यूबिकल्स तक अपनी जगह बनाने की जद्दोजहद में लगी है।
अक्सर अपने स्वैग और बेबाक अंदाज के लिए सुर्खियों में रहने वाली यह कूल जनरेशन एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह हैरान करने वाली है। हाल ही में आई एक स्टडी ने इनकी स्मार्टनेस पर सवालिया निशान लगा दिया है।
क्या कहती है स्टडी ?
इस नए शोध में यह दावा किया गया है कि इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब बच्चे, बुद्धिमानी की रेस में अपने माता-पिता से पिछड़ गए हैं। स्टडी के मुताबिक 'जनरेशन Z' (Gen Z) पहली ऐसी पीढ़ी है, जो अपनी पिछली पीढ़ी यानी मिलेनियल्स (Millennials) के मुकाबले कम स्मार्ट साबित है।
क्यों हो रहा है ऐसा?
न्यूरोसाइंटिस्ट और पूर्व शिक्षक, डॉ. जेरेड कूनी होर्वाथ ने अमेरिकी सीनेट को बताया कि इंटेलिजेंसी में कम रहने का सबसे बड़ा कारण 'एजुकेशनल टेक्नोलॉजी' (EdTech) यानी पढ़ाई में तकनीक और स्क्रीन्स का बहुत ज्यादा इस्तेमाल है। रिसर्च में पाया गया कि Gen- Z में:
खबरें और भी
- ध्यान लगाने की क्षमता कम है।
- गणित और पढ़ने का कौशल कमजोर हुआ है।
- समस्याओं को सुलझाने की एबिलिटी भी घटी है।
स्क्रीन बन रही है दुश्मन
डॉ. होर्वाथ के मुताबिक, आज के दौर में बच्चे अपना ज्यादातर समय स्क्रीन के सामने बिताते हैं। पुरानी पीढ़ियों के विपरीत नई पीढ़ी को स्कूल-कॉलेज जाने के मौके ज्यादा मिले हैं, फिर भी साल 2010 के बाद से इनके सीखने की क्षमता में गिरावट देखने को मिली है।
दरअसल, इंसानी दिमाग आमने-सामने बात करके और गहराई से पढ़कर सीखने के लिए बना है। ऐसे में स्क्रीन पर जल्दी-जल्दी स्क्रॉल करने या बुलेट पॉइंट्स में पढ़ने से सीखने की क्षमता कम हो गई है। आसान भाषा में बोलें, तो डिजिटल पढ़ाई ने दिमाग के विकास को धीमा कर दिया है।
पूरी दुनिया में यही हाल
हैरानी की बात यह है कि यह हाल समस्या किसी एक देश का नहीं है। डॉ. होर्वाथ ने बताया कि 80 से ज्यादा देशों के आंकड़े यही कहानी बताते हैं। जिन देशों ने स्कूलों में डिजिटल तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल शुरू किया, वहां बच्चों के प्रदर्शन और रिजल्ट में गिरावट दर्ज की गई।