सफलता की राह में सबसे बड़ा 'स्पीड ब्रेकर' है ओवरथिंकिंग, लाइफ कोच से जानें इसे मात देने के तरीके
इस आर्टिकल में आप जानेंगे कि कैसे ओवरथिंकिंग सफलता में बाधा डालती है, खासकर युवाओं के करियर से जुड़े फैसलों में। ...और पढ़ें

ओवरथिंकिंग का 'दिमागी दलदल' आपको डुबो तो नहीं रहा? (Image Source: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अनुराधा, नई दिल्ली। सफलता के लिए सोच-समझकर काम करना अच्छा होता है, लेकिन ओवरथिंकिंग से काम बिगड़ जाता है। हम भूल जाते हैं कि किन चीजों को प्राथमिकता देनी है और किन्हें नहीं। ओवरथिंकिंग युवाओं को भ्रमित कर देती है और वे सही फैसले नहीं ले पाते। कैसे ओवरथिंकिंग सफलता में बाधक है और कैसे इसे दूर करें, लाइफ कोच अनुराधा से जानें...
मान लीजिए आप किसी को मैसेज करते हैं, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं मिलता। वह व्यक्ति उसे देखकर छोड़ देता है। तब मन तुरंत शक से भर जाता है और कई सवाल मन को घेर लेते हैं, जैसे मैंने कुछ गलत तो नहीं किया? ओवरर्थिकंग की दिक्कत यही है कि एक बार जो विचार आना शुरू होते हैं, फिर वे थमने का नाम नहीं लेते और लगातार तरह तरह के विचारों का ताना-बाना बुनना शुरू हो जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान दिमाग असलियत से ज्यादा कहानियां बना लेता है। धीरे-धीरे यह आदत उनकी जिंदगी का हिस्सा बन जाती है। हर बात में चिड़चिड़ाहट, मूड खराब होना या फिर नेगेटिव सोचना व्यवहार का एक अंग बन जाता है।

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युवाओं में बढ़ती ओवरथिंकिंग
ऐसा देखा गया है कि करियर के फैसले लेने में युवा कई बार कंफ्यूज्ड रहते हैं। खासकर जब यूनिवर्सिटी का चुनाव करना हो या फिर स्ट्रीम का, तब वे ओवरथिंकिंग के कारण भ्रमित हो जाते हैं। जिंदगी में बड़े फैसले लेने से पहले सोचना अच्छी बात है, लेकिन अधिक सोचने से दिमाग ब्लॉक हो जाता है और फिर कोई एक निर्णय लेना मुश्किल होता है। ऐसा करते-करते हर छोटे फैसले भी मुश्किल भरे लगने लगते हैं।
सफलता में बाधक
अति हर चीज की खराब होती है। सौच-समझ कर निर्णय लेना अलग बात है, जो सक्रिय रूप से कार्य करने में मदद करता है, लेकिन ओवरथिंकिंग एक ऐसा दिमागी दलदल है, जो हमारे विचारों में फंसाकर रख देता है। दरअसल, जब हम ज्यादा सोचते हैं, तब हम बहुत सावधानी बरत रहे होते हैं। युवाओं की उम्र ऐसी होती है, जब वे जीवन में रिस्क लेने के लायक होते हैं, कुछ बड़ा कर सकते हैं। ऐसे में, ओवरथिंकिंग के कारण उत्पन्न भ्रम न सिर्फ उनके फैसलों में बाधक बनता है, बल्कि मानसिक सेहत को भी बिगाड़ने लगता है। युवा धीरे-धीरे अपना आत्मविश्वास खोने लगते हैं। लगातार अतीत या भविष्य की चिंता में डूबे रहने से वे वर्तमान के सुनहरे मौकों को भी गंवा देते हैं।
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क्या है समाधान?
- खामियों को अपनाना: अपनी कमियों को अपनाने का मतलब है कि हम अपने अनुभवों से सीखें। अपनी गलतियों पर अधिक न सोचें।
- खुले दिमाग से सोचना: जब आप आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प के साथ सोचते हैं, तब सफल होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। आपके विचार जैसे होंगे, जीवन में भी उसका असर दिखने लगेगा।
- तय करें प्राथमिकताएं: जीवन में प्राथमिकताएं तय करने से लक्ष्य तक पहुंचाना सहज होता है। छोटे- छोटे कदमों से शुरुआत करें।
- मार्गदर्शन लेना: लाइफ कोच आपके सोचने के तरीकों को चुनौती देते हैं और मुश्किल हालात से निपटने के लिए असरदार रणनीति बनाने में मदद करते हैं। यह सपोर्ट आपके फैसले लेने की प्रक्रिया में आत्मविश्वास और स्पष्टता लाने में फायदेमंद हो सकता है।
ओवरथिंकिंग के संकेत
- एक ही विचार, चिंता या डर के बारे बार-बार सोचना।
- सबसे बुरी स्थिति की कल्पना करना।
- अतीत में हुई किसी बुरी बात को बार-बार दोहराना।
- अतीत या भविष्य के बारे में नकारात्मक विचार लाना।
- अपने विचारों की वजह से उदास महसूस करना।
- किसी एक चीज के बारे में इतना सोचना कि दूसरी चीजों पर ध्यान ही न जाए।
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