हिंदी नहीं, इस बोली में गाया गया है होली का ये सुपरहिट गाना; दिलचस्प है यूपी की इस मीठी जुबान का इतिहास
बागबान फिल्म का गाना होरी खेले रघुवीरा अवधी बोली में गाया गया गाना है। ये बोली उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में बोली जाती है।

अवधी में गाया गया है होली का ये सुपरहिट गाना (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। साल 2003 में रिलीज हुई फिल्म बागबान का सुपरहिट गाना होरी खेले रघुवीरा तो आपने जरूर सुना होगा। ये गाना आज भी होली के मौके पर जरूर बजता है और लोग इस गाने पर जमकर डांस भी करते हैं। आमतौर पर लोग इसे हिंदी गाना समझते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि ये गाना हिंदी नहीं किसी और बोली में गाया गया है।
जी हां, बागबान फिल्म का ये गाना अवधी में गाया गया है, जो उत्तर प्रदेश की मुख्य बोलियों में से एक है। ये बोली उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति और साहित्य का अहम हिस्सा है। आइए जानें अवधी बोली का इतिहास क्या है और इस बोली की खासियत क्या है।
क्या है अवधी का इतिहास
अवधी प्राचीन समय से उत्तर प्रदेश के अवध और ऊध क्षेत्र में बोली जाने वाली एक बोली है। ये बोली प्राकृत से विकसित हुई और 14वीं से 17वीं शताब्दी में ये भाषा साहित्य में अपने शिखर पर पहुंची। भक्ति काल के दौरान कई कवियों ने इसे आम जनता तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल किया और इसी भाषा में कई रचनाएं की।
गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना भी अवधी में की, जिसने इस भाषा को घर-घर तक पहुंचाया। इनके अलावा, कबीर और रहीम के पदों भी अवधी का इस्तेमाल हुआ है। हालांकि, आज अवधी को हिंदी भाषा की ही एक बोली की तरह देखा जाता है, लेकिन 14वीं शताब्दी में ये साहित्य में इस्तेमाल होने वाली एक भाषा थी।
क्यों खास है अवधी बोली?
अवधी भाषा बहुत मीठी होती है और सुनने में विनम्रता से भरी हुई लगती है। इस बोली में शब्दों का इस्तेमाल लयबद्ध तरीके से होता है, जिसके कारण इसे कविता या गाने में काफी आसानी से इस्तेमाल करना काफी आसान होता है। यहीं वजह है कि मुगल काल में अवध प्रांत में नवाबों के उर्दू को संरक्षण देने के बावजूद आम जनता के बीच अवधी के महत्व में कोई कमी नहीं आई और आज भी वो आम बोलचाल में इस्तेमाल होती है।
किन-किन क्षेत्रों में बोली जाती है अवधी?
अवधी उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र की बोली है। लखनऊ, अयोध्या, प्रयागराज, राय बरेली, अमेठी, बलरामपुर, सीतापुर, हरदोई, खेरी, सारावस्ती, गोंडा, प्रतापगढ़, फतेहपुर, उन्नाओ, बारा बांकी, बाहरिच, सीतापुर और सुल्तानपुर में अवधी आम बोल-चाल में इस्तेमाल होती है। भारत के बाहर नेपाल के तराई क्षेत्रों में और मॉरीशस व फिजी में भी अवधी का इस्तेमाल होता है।
लोकगीतों में अवधी
राम जन्म से जुड़े कई मशहूर सोहर अवधी में ही गाए जाते हैं। इसके अलावा, शादी की रस्मों, बन्ना-बन्नी के गीत और सावन की कई मशहूर कजरी भी अवधी में गाई जाती हैं। लोक गायिका मालिनी अवस्थी के गीतों में अवधी की साफ झलक मिलती है। इसी तरह होली के गीतों में ढोलक और मंजीर पर अवधी होरी गीत गाए जाते हैं।
