लैपटॉप खोलने से पहले ही कर लेते हैं मेंटली ‘चेकआउट’? ये हो सकता है Shift Sulking का संकेत
ऑफिस आते ही थका हुआ और इमोशनली डिसकनेक्टेड महसूस करना शिफ्ट सल्किंग कहलाता है। ...और पढ़ें

क्या होता है शिफ्ट सल्किंग? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। वर्कप्लेस और कॉर्पोरेट लाइफ को लेकर अक्सर हमें नए-नए टर्म सुनने को मिल जाते हैं, जैसे- क्वाइट क्विटिंग या मंडे ब्लूज। लेकिन इन दिनों वर्कप्लेस कल्चर में एक नया शब्द चर्चा में है, जिसे शिफ्ट सल्किंग कहा जा रहा है।
यह सुनने में भले ही ऐसा लग सकता है कि केवल आलस या काम न करने की इच्छा के बारे में लग सकता है, लेकिन समस्या इससे ज्यादा गंभीर है। आइए समझते हैं कि शिफ्ट सल्किंग होता क्या है और कैसे यह आपके काम को प्रभावित कर सकता है।
शिफ्ट सल्किंग क्या है?
शिफ्ट सल्किंग वह ऐसी कंडीशन है जब कर्मचारी अपनी शिफ्ट शुरू होने से पहले ही पूरी तरह से थका हुआ, भावनात्मक रूप से कटा हुआ महसूस करते हैं। यानी कर्मचारी ऑफिस आकर नहीं थकता, बल्कि थका हुआ ही आता है।
लैप्टॉप खोलने से पहले ही वह खुद को बहुत थका हुआ महसूस करने लगता है। अपनी शिफ्ट शुरू होने से पहले ही मानसिक रूप से थक जाना या फिजिकली प्रेजेंट होना, लेकिन मेंटली अब्सेंट होना शिफ्ट सल्किंग कहलाता है।

(AI Generated Image)
शिफ्ट सल्किंग के लक्षण कैसे होते हैं?
- खामोशी और थकान- कर्मचारी चुप रहते हैं और शारीरिक रूप से मौजूद होने के बावजूद मानसिक रूप से कहीं और होते हैं।
- चिड़चिड़ाहट- चेहरे पर साफ दिखने वाली चिड़चिड़ाहट या निराशा।
- कोई उत्साह न दिखाना- काम की परिस्थितियों के अस्थिर होने के कारण काम की तरफ कोई उत्साह न दिखाना।
यह स्थिति क्यों पैदा होती है?
शिफ्ट सल्किंग ऊपर से दिखने वाली किसी छोटी समस्या का नतीजा नहीं है। इसके पीछे अनप्रिडिक्टेबल और मुश्किल परिस्थितियां होती हैं। जब कर्मचारियों को लगता है कि उनकी शिफ्ट का समय फिक्स नहीं है, काम का बोझ बहुत ज्यादा है, या उनके काम को सराहना नहीं मिल रही है, तो वे शिफ्ट शुरू होने से पहले ही मेंटली चेक-आउट कर लेते हैं।
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आपके काम पर इसका असर
शिफ्ट सल्किंग न केवल कर्मचारी की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि उसके काम पर भी असर होता है-
- प्रोडक्टिविटी में गिरावट- जब कोई व्यक्ति काम शुरू करने से पहले ही थका हुआ महसूस करता है, तो वह अपना 100% नहीं दे पाता। इससे काम की गति धीमी हो जाती है।
- टीम वर्क का प्रभावित होना- एक मुंह फुलाए हुआ या उदास कर्मचारी पूरी टीम की एनर्जी और मनोबल को कम कर सकता है। इससे वर्कप्लेस का माहौल नेगेटिव हो जाता है।
- गलतियों की संभावना- मानसिक रूप से डिस्कनेक्टेड होने के कारण काम में छोटी-बड़ी गलतियां होने की संभावना बढ़ जाती है, जो कभी-कभी कंपनी के लिए महंगी साबित होती हैं।