महिलाओं को ज्यादा परेशान कर रहा ऑफिस स्ट्रेस! साइकोलॉजिस्ट से समझें इसके कारण और बचाव के तरीके
कामकाजी महिलाएं अपने काम को अच्छी तरह से करने के बाद भी वर्कप्लेस में ज्यादा स्ट्रेस का सामना करती हैं। ...और पढ़ें

महिलाओं पर क्यों भारी पड़ता है वर्कप्लेस का स्ट्रेस? डॉक्टर ने बताया सच (Image Credit : Canva)
HighLights
कामकाजी महिलाएं दोहरी जिम्मेदारियां निभाती हैं
वर्कप्लेस पर पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को मानसिक थकान होती है
वर्कप्लेस का स्ट्रेस कम करने के लिए कुछ तरीके अपना सकते हैं
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सुबह का समय सबसे ज्यादा भागदौड़ भरा होता है। खासकर वर्किंग महिलाओं के लिए ये समय किसी रेस से कम नहीं होता। किचन से लेकर बच्चों के स्कूल और फिर ऑफिस की डेडलाइन तक महिलाओं का दिन कब खत्म होता है, पता ही नहीं चलता। इसके साथ एक बड़ी चुनौती भी सामने आती है वर्कप्लेस का बढ़ता तनाव।
हाल ही में हुए एक अध्ययन के मुताबिक वर्कप्लेस पर पुरुषों के मुकाबले में महिलाओं में बर्नआउट यानी मानसिक और शारीरिक थकान के मामले ज्यादा देखने को मिले हैं।
रॉकेट हेल्थ की काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट, दिशी चौहान का कहना है कि इसका सबसे बड़ा कारण वर्क-लाइफ बैलेंस की कमी है। भले ही आज के समय में महिलाएं इंडिपेंडेंट और सेल्फ-रिलायंट हो गई हों, लेकिन जेंडर इक्वालिटी को लेकर अभी भी भेदभाव देखा जाता है। ऑफिस शिफ्ट खत्म होने के बाद भी महिलाएं घर के कामों की जिम्मेदारियों में लग जाती हैं। वह ऑफिस के कामों और घर के चूल्हे-चौके के बीच, वो एक साथ दोहरी शिफ्ट निभा रही होती हैं।
महिलाओं की मेंटल हेल्थ को कैसे कर रहा है प्रभावित?
साइकोलॉजिस्ट के मुताबिक, आज भी एक ही पोस्ट पर होने और एक जैसे काम करने के बावजूद महिलाओं और पुरुषों की सैलरी में काफी गैप होता है। साथ ही, उनके काम को उतनी वेल्यू नहीं मिल पाती, जितनी मिलनी चाहिए। ऑफिस की छोटी-मोटी बातों पर बेइज्जती, सुरक्षा की चिंता, लंबा ट्रैवल करना भी महिलाओं के लिए तनाव का कारण बन सकता है।

(Picture Credit- AI Generated)
कई बार उन्हें अपने के लिए वक्त निकालने पर होने वाला गिल्ट उन्हें रिलैक्स होने से रोकता है। सच तो यह है कि वर्क-लाइफ बैलेंस की कमी महिलाओं को धीरे-धीरे बर्नआउट की ओर धकेल रहा है। सही बाउंड्री न बना पाना और लगातार परफेक्शन की चाहत महिलाओं की मेंटल हेल्थ के लिए एक बड़ा खतरा है।
तनाव से बचने के आसान तरीके
यह बहुत जरूरी है कि महिलाएं समय रहते स्ट्रेस को हैंडल करना सीखें, ताकि वो बर्नआउट की हालत तक न पहुंचें। अगर आप भी कुछ ऐसी ही स्थिति में हैं, तो इससे बाहर आने के लिए किसी लॉन्ग वेकेशन की नहीं, बल्कि बस छोटी-छोटी आदतों को अपनाने की जरूरत है। डिनर के बाद बिना फोन के टहलना, नेचर के पास कुछ पल बिताना या सोने से एक घंटे पहले जर्नलिंग, पेंटिंग, बुक पढ़ना, मेडिटेशन या म्यूजिक सुनने जैसी एक्टिविटीज आपके दिमाग के लिए रीसेट बटन की तरह काम करेंगा।
अगर आप सोने से पहले अपने मोबाइल फोन या स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताते हैं, तो ऐसा करने से बचें। बिना मोबाइल चलाए आराम से सोने से अच्छी नींद आती है और सोने से पहले दिमाग को शांति की जरूरत भी होती है। इसके अलावा, अपने डेली रूटीन में एक्सरसाइज और तेज वॉकिंग को शामिल करने से स्ट्रेस हार्मोन के प्रोडक्शन को मैनेज करने में मदद मिल सकती है।
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