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किसी ने अच्छी बात की नहीं कि तुरंत कह दिया 'टचवुड'... पर क्यों? 99% लोग नहीं जानते इसके पीछे की यह कहानी

Published: Wed, 12 Aug 2026 02:00 PM (IST)

हम अक्सर खुद को नजर लगने से बचाने के लिए लकड़ी छू लेते हैं, पर इसके पीछे की कहानी क्या है यह कोई नहीं जानता।

टचवुड कहने के पीछे की कहानी (Image Source: AI Generated)

टचवुड कहने के पीछे की कहानी (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जब भी किसी फ्रेंड सर्कल में कोई अपने काम की तारीफों के पुल बांध रहा होता है या फिर किसी अच्छे काम की शुरूआत करने जा रहा होता है तो वो कहता है ‘टचवुड’, पर आखिर इसका मतलब क्या है? क्यों लोग किसी चीज को बुरी नजर से बचाने के लिए टचवुड पर इतना भरोसा जताते हैं? आज हम इसी की कहानी जानेंगे। 

क्यों कहते हैं टचवुड? 

टचवुड कहने के पीछे तर्क यह दिया जाता है कि लकड़ी को छूना हमारे आसपास मौजूद बुरी शक्तियों से रक्षा करता है। दरअसल, इसका कनेक्शन थोड़ा स्पिरिचुअल है जिसके मुताबिक पेड़ों की लकड़ी को पंचतत्व का हिस्सा माना गया है जिसमें नकारात्मक शक्तियों को सोख लेने की अद्भुत क्षमता होती है। तभी तो पहले के जमाने में ऋषि-मुनि तपस्या, जप से लेकर शिक्षा ग्रहण करने तक सभी काम पेड़ के नीचे बैठकर किया करते थे। 

देवताओं, आत्माओं और परियों का वास 

पैगन सभ्यता यानी प्रकृति को पूजने वाले लोग ऐसा मानते थे कि पेड़ों में देवताओं, आत्माओं और परियों का वास होता है। इस तरह जब भी कोई शुभ काम करने या कहने के बाद लकड़ी को टच करता है तो ऐसा करना शुभ आत्माओं से रक्षा मांगना होता है ताकि बुरी शक्तियां कुछ बिगाड़ न पाएं। 

पश्चिमी देशों की मान्यता 

अंग्रेजी का टचवुड पश्चिमी संस्कृति से निकला है, ऐसी मान्यता है कि यीशु को जिस लकड़ी के क्रॉस पर चढ़ाया था वह बहुत पवित्र लकड़ी थी। उस लकड़ी को छूना मतलब ईश्वर की शरण में आ जाना। तभी से टचवुड लोगों के बीच चलन में आया और धीरे-धीरे हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया। इसके अलावा, जर्मनिक और सेल्टिक कल्चर में भी पेड़ों को पवित्र माना गया है। 

तुर्किए और ब्राजील में टचवुड की जगह थपथपाने की परंपरा 

जिस तरह लकड़ी से जुड़ी हर धर्म और संस्कृति में अलग-अलग मान्यताएं हैं, उसी तरह तुर्किए और ब्राजील में टचवुड की जगह थोड़ी अलग परंपरा को फॉलो किया जाता है। तुर्किए में लोग बुरी नजर से बचने के लिए लकड़ी पर तीन बार थपथपाते हैं, वहीं ब्राजील में ‘Bater na madeira’ यानी नॉक ऑन वुड कहकर थपथपाने का चलन है। 

क्या कहती है साइकोलॉजी? 

लकड़ी को छूने की साइकोलॉजी कहती है कि जब कोई व्यक्ति खुद की रक्षा के लिए टचवुड कहकर लकड़ी छू रहा होता है तो उससे मन में आत्म संतुष्टि पैदा होती है। यह रिचुअल डर खत्म कर सुरक्षा का आभास कराता है। यह एक तरह का पॉजिटिव एफर्मेशन है तनाव खत्म कर मानसिक सुकून दिलाता है। 

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