पुराने घरों में आंगन के बीचों-बीच क्यों लगाया जाता था तुलसी का पौधा? सिर्फ आस्था नहीं, विज्ञान से भी जुड़ी है वजह
पुराने घरों में आंगन के बीच तुलसी का पौधा लगाने के पीछे धार्मिक आस्था के साथ-साथ कई वैज्ञानिक कारण भी थे।

घरों में तुलसी चौरा क्यों होता था? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में तुलसी का पौधा आस्था का प्रतीक माना जाता है। घर में तुलसी का पौधा रखना काफी शुभ माना जाता है। इसलिए पुराने घरों में आंगन के बीच तुलसी चौरा जरूर हुआ करता था। हालांकि, आंगन के बीच तुलसी चौरा बनाने के पीछे सिर्फ आस्था से जुड़े कारण नहीं थे।
तुलसी का पौधा कई वैज्ञानिक कारणों से भी बहुत फायदेमंद माना जाता है और इन्हीं फायदों की वजह से भी लोग अपने घरों में तुलसी का पौधा जरूर रखते थे। आइए जानें पुराने घरों में तुलसी चौरा बनाने के पीछे क्या-क्या कारण छिपे थे।
शुद्ध हवा और ऑक्सीजन
तुलसी के पौधे को नेचुरल एयर प्यूरीफायर माना जाता है। यह पौधा दिन में लंबे समय तक ऑक्सीजन रिलीज करता है और वातावरण में मौजूद हानिकारक गैस को अब्जॉर्ब करता है। इसलिए घर के बीचों-बीच तुलसी का पौधा लगाने से घर की हवा शुद्ध होती है।
कीट-पतंगों से बचाव
तुलसी के पौधे के ऑयल में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं। इसलिए इसकी गंध मच्छरों, मक्खियों और दूसरे कीड़ों को पसंद नहीं आती। पुराने जमाने में आज की तरह केमिकल कॉइल नहीं होते थे। इसलिए बीमारी फैलाने वाले कीड़े-मकौड़ों से बचने के लिए भी लोग घरों में तुलसी का पौधा जरूर लगाया करते थे।
जड़ी बूटियों की रानी
तुलसी का पौधा अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। सर्दी-जुकाम, बुखार, पाचन से जुड़ी समस्या या त्वचा की परेशानियों में तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए घर के आंगन में तुलसी का पौधा होने से इन परेशानियों के इलाज में काफी मदद मिलती थी।
मानसिक शांति
तुलसी की खुशबू मन को शांत करती है और स्ट्रेस कम करने में मदद करती है। इसके अलावा, तुलसी के पौधे के आस-पास की जगह को हमेशा साफ और पवित्र रखा जाता है। इससे घर में स्वच्छता का माहौल भी रहता।
आस्था का संबंध
तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में खास महत्व रखता है। इसकी पत्तियों का इस्तेमाल पूजा के प्रसाद में भी किया जाता है। साथ ही, सुबह और शाम को तुलसी के पौधे की पूजा की जाती है। इसलिए धार्मिक आस्था के कारण भी लोग अपने घरों में तुलसी का पौधा जरूर लगाते थे और महिलाएं सुबह पौधे को जल देतीं और शाम को उसके पास दीया जलाकर पूजा करतीं।
