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    बिना फोन के चिड़चिड़ा हो जाता है आपका बच्चा? स्क्रीन डिपेंडेंसी कम करने के लिए अपनाएं 5 टिप्स

    Updated: Mon, 23 Feb 2026 05:51 PM (IST)

    बच्चों में फोन देखने की लत छुड़ाना उनकी सेहत और विकास, दोनों के लिए ही काफी जरूरी है। ...और पढ़ें

    कैसे दूर करें बच्चों की स्क्रीन डिपेंडेंसी? (AI Generated Image)

    कैसे दूर करें बच्चों की स्क्रीन डिपेंडेंसी? (AI Generated Image)

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में स्मार्टफोन और टैबलेट बच्चों के जीवन का एक अहम हिस्सा बन गए हैं। चाहे खाना खाना हो या खाली समय बिताना, बच्चों को हर काम के लिए स्क्रीन की जरूरत महसूस होती है। 

    माता-पिता के लिए यह स्थिति तब परेशानी भरी हो जाती है जब बच्चा स्क्रीन के बिना चिड़चिड़ा होने लगता है। इसे ही 'स्क्रीन डिपेंडेंसी' कहा जाता है। अगर आप भी अपने बच्चे की इस लत से परेशान हैं, तो यहां दिए गए 5 पेरेंटिंग टिप्स आपकी मदद कर सकते हैं।

    खुद एक रोल मॉडल बनें 

    बच्चे वही नहीं करते जो हम उन्हें सिखाते हैं, बल्कि वह करते हैं जो वे हमें करते हुए देखते हैं। अगर आप खुद सारा दिन फोन पर लगे रहते हैं, तो बच्चा भी वही सीखेगा। घर पर एक ऐसा समय तय करें जब परिवार का कोई भी सदस्य फोन का इस्तेमाल न करे, जैसे डिनर के समय। जब आप बच्चे के साथ हों, तो अपना फोन दूर रखें और उसे पूरा ध्यान दें।

    Too much screen time harms

    (AI Generated Image)

    नो स्क्रीन जोन और समय तय करें

    घर में कुछ जगहों और समय को पूरी तरह डिजिटल फ्री बना दें। बेडरूम और डाइनिंग टेबल पर गैजेट्स का इस्तेमाल बिल्कुल न करना काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। एक नियम बनाएं कि सोने से कम से कम एक घंटा पहले सभी स्क्रीन बंद कर दी जाएंगी। स्क्रीन की ब्लू लाइट नींद की गुणवत्ता को खराब करती है, इसलिए यह नियम स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर है।

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    ऑफलाइन एक्टिविटीज को बढ़ावा दें

    अक्सर बच्चे बोरियत की वजह से फोन मांगते हैं। अगर उनके पास करने के लिए कुछ दिलचस्प होगा, तो वे स्क्रीन की ओर कम भागेंगे। बच्चे को आउटडोर गेम्स, पेंटिंग, स्टोरी बुक्स या म्यूजिक जैसी एक्टिविटीज में व्यस्त रखें। उनके साथ बोर्ड गेम्स खेलें। जब बच्चा क्रिएटिव कामों में मन लगाएगा, तो उसका डोपामाइन लेवल प्राकृतिक रूप से बढ़ेगा, न कि डिजिटल दुनिया से।

    स्क्रीन टाइम को रिवॉर्ड न बनाएं

    कई बार माता-पिता कहते हैं, जल्दी खाना खा लो, फिर फोन मिलेगा। ऐसा करने से बच्चे की नजर में फोन की अहमियत और बढ़ जाती है और वह इसे एक रिवॉर्ड समझने लगता है। स्क्रीन टाइम को एक सामान्य गतिविधि की तरह रखें, न कि किसी काम को करने की शर्त के रूप में। स्क्रीन देखने के लिए एक फिक्स समय, जैसे- दिन में 30-45 मिनट तय करें और उस पर अडिग रहें।

    गैजेट्स के बिना क्वालिटी टाइम बिताएं

    बच्चे अक्सर अटेंशन पाने के लिए स्क्रीन का सहारा लेते हैं। जब माता-पिता उनके साथ खेलते हैं या बातें करते हैं, तो उनकी भावनात्मक जरूरतें पूरी होती हैं। रोजाना कम से कम 30 मिनट बिना किसी बाधा के बच्चे से बात करें। उनसे उनके स्कूल, दोस्तों और उनकी पसंद-नापसंद के बारे में पूछें। जब उन्हें आपसे जरूरी समय और प्यार मिलेगा, तो उनकी स्क्रीन पर निर्भरता अपने आप कम होने लगेगी।