पढ़ाई-लिखाई जितनी ही जरूरी है इमोशनल इंटेलिजेंस, हर पेरेंट अपने बच्चों को सिखाए ये 5 आदतें
बच्चों को बचपन से ही इमोशनल इंटेलिजेंस सिखाना जरूरी है, ताकि जीवन में आगे चलकर वे अपनी भावनाओं को मैनेज कर सकें। ...और पढ़ें
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बच्चों को कैसे सिखाएं इमोशनल इंटेलिजेंस? (Picture Courtesy: Freepik)
HighLights
बच्चों को भावनाओं को पहचानना और नाम देना सिखाएं
दूसरों के प्रति सहानुभूति विकसित करने में उनकी मदद करें
समस्या-समाधान कौशल सिखाकर उन्हें सशक्त बनाएं
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पेरेंट्स बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन उनकी इमोशनल इंटेलिजेंस को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। इमोशनल इंटेलिजेंस यानी अपनी और दूसरों की भावनाओं को समझना और उनसे डील करना।
जीवन में सफलता हासिल करने के लिए किताबी ज्ञान के साथ-साथ भावनात्मक समझ होनी भी काफी जरूरी है। इसलिए बच्चों में इमोशनल इंटेलिजेंस विकसित करना काफी जरूरी है। आइए जानें कैसे पेरेंट्स अपने बच्चों में इमोशनल इंटेलिजेंस विकसित कर सकते हैं।
भावनाओं को नाम देना सिखाएं
बच्चे अक्सर चिड़चिड़े हो जाते हैं या रोने लगते हैं, क्योंकि उन्हें समझ नहीं आता कि उनके साथ क्या हो रहा है। उन्हें अपनी भावनाओं को पहचानने में मदद करें। जब बच्चा अपनी भावनाओं को नाम देना सीख जाता है, तो वह उन पर बेहतर नियंत्रण पा लेता है।
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(Picture Courtesy: Freepik)
भावनाओं को जाहिर करने का तरीका
बच्चे की हर भावना जायज होती है, लेकिन उसका हर व्यवहार नहीं। उदाहरण के लिए, अगर बच्चा खिलौना न मिलने पर गुस्सा है, तो उसकी नाराजगी को स्वीकार करें, लेकिन साथ ही उसे समझाएं कि गुस्सा होने पर चिल्लाना या चीजें फेंकना गलत है। उन्हें सिखाएं कि भावनाएं महसूस करना बुरा नहीं है, लेकिन उन्हें व्यक्त करने का तरीका सही होना चाहिए।
सहानुभूति विकसित करें
दूसरों की तरफ हमदर्दी रखना इमोशनल इंटेलिजेंस के लिए जरूरी है। बच्चे को दूसरों के नजरिए से सोचना सिखाएं। अगर पार्क में कोई बच्चा गिर गया है या उदास है, तो अपने बच्चे को समझाएं कि दूसरे बच्चे को कैसा महसूस हो रहा है। इससे बच्चा दूसरों के दुख-सुख को समझना शुरू करेगा।
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खुद एक रोल मॉडल बनें
बच्चे वह नहीं सीखते जो हम कहते हैं, बल्कि वह सीखते हैं जो हम करते हैं। अगर आप खुद तनाव में चिल्लाने लगते हैं, तो बच्चा भी वही सीखेगा। अपनी भावनाओं को उनके सामने शांत तरीके से व्यक्त करें। इससे बच्चा सीखेगा कि अपनी जरूरतों और भावनाओं को सही तरीके से कैसे बताया जाता है।
प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल सिखाएं
जब बच्चा किसी समस्या में फंसे, तो तुरंत समाधान न दें। उसे सोचने का मौका दें। उससे पूछें कि इस स्थिति में क्या कर सकते हैं। यह बच्चे को अपनी भावनाओं को मैनेज करने और लॉजिक के साथ समस्या का हल निकालने के लिए प्रेरित करता है।