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    अगर अपने बच्चों को खुश देखना चाहते हैं, तो आज ही छोड़ दें ये 5 Parenting Attitudes

    Updated: Tue, 13 Jan 2026 06:59 AM (IST)

    "मैं तो बस उसकी भलाई के लिए कह रहा था!" - यह एक ऐसा वाक्य है जो हम माता-पिता दिन में न जाने कितनी बार दोहराते हैं। जाहिर है, हम अपने बच्चों को दुनिया ...और पढ़ें

    पेरेंट्स की 5 आदतें, जो छीन लेती हैं बच्चों की खुशियां (Image Source: AI-Generated)

    पेरेंट्स की 5 आदतें, जो छीन लेती हैं बच्चों की खुशियां (Image Source: AI-Generated) 

    HighLights

    1. बच्चों की दूसरों से तुलना करना आत्मविश्वास घटाता है

    2. अपनी मर्जी थोपने से बच्चे असंतुष्ट रहते हैं

    3. परफेक्शन की उम्मीद बच्चों में तनाव बढ़ाती है

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हर माता-पिता की बस एक ही ख्वाहिश होती है- उनके बच्चे दुनिया में सबसे ज्यादा खुश और सफल रहें। इसके लिए हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन कई बार अनजाने में हम कुछ ऐसे तरीके (Toxic Parenting Habits) अपना लेते हैं, जो बच्चों के मानसिक विकास और उनकी खुशियों पर भारी पड़ने लगते हैं। जी हां, अगर आप सच में अपने बच्चे को एक सुलझा हुआ और खुश इंसान बनाना चाहते हैं, तो नीचे दी गई 5 आदतों को आज ही अलविदा कह देने में समझदारी है।

    Parenting tips for happy kids

    (Image Source: AI-Generated) 

    दूसरों से तुलना करना

    "देखो, शर्मा जी का बेटा कितना होशियार है!" या "तुम्हारे दोस्त के नंबर तुमसे ज्यादा आए हैं" -ये बातें भारतीय घरों में बहुत आम हैं। हमें लगता है कि इससे बच्चा मोटिवेट होगा, लेकिन असल में इसका उल्टा होता है। तुलना करने से बच्चे के आत्मविश्वास को चोट पहुंचती है और उसे लगने लगता है कि वह 'काफी नहीं' है। याद रखिए, हर फूल के खिलने का समय अलग होता है, अपने बच्चे की तुलना किसी और से न करें।

    अपनी मर्जी उन पर थोपना

    कई बार हम अपने अधूरे सपने अपने बच्चों के जरिए पूरे करना चाहते हैं। "मैं डॉक्टर नहीं बन पाया, तो तुम्हें बनना ही होगा" -यह सोच बच्चे पर एक भारी बोझ डाल देती है। जब बच्चे अपनी पसंद का करियर या हॉबी नहीं चुन पाते, तो वे जीवन भर असंतुष्ट रहते हैं। उन्हें गाइड करें, लेकिन उनका रास्ता उन्हें खुद चुनने दें।

    फीलिंग्स को नजरअंदाज करना

    अगर बच्चा रो रहा है या उदास है, तो उसे यह कहना कि "लड़के रोते नहीं" या "इतनी सी बात पर नाटक मत करो" -यह बहुत गलत है। इससे बच्चे अपनी भावनाएं दबाना सीख जाते हैं। अगर वे दुखी हैं, तो उनकी बात सुनें। उन्हें यह अहसास दिलाएं कि आप उनके साथ हैं, चाहे स्थिति कैसी भी हो।

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    'परफेक्ट' होने की उम्मीद करना

    क्या आप चाहते हैं कि आपका बच्चा पढ़ाई, खेल और एक्स्ट्रा स्किल्स- हर चीज में नंबर 1 रहे? अगर हां, तो जान लें कि परफेक्शन की यह दौड़ बच्चों को तनाव से भर देती है। उनसे गलतियां होने दें। इंसान गलतियों से ही सीखता है। उन्हें 'परफेक्ट' होने के बजाय 'कोशिश करने वाला' बनना सिखाएं।

    बहुत ज्यादा रोक-टोक

    बच्चे के हर छोटे-बड़े काम में दखल देना या उन्हें गिरने से पहले ही थाम लेना, उन्हें कमजोर बना देता है। अगर आप हमेशा ढाल बनकर खड़े रहेंगे, तो वे दुनिया का सामना करना कैसे सीखेंगे? उन्हें अपनी लड़ाइयां खुद लड़ने का मौका दें, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

    पेरेंटिंग का मतलब हुकूम चलाना नहीं, बल्कि एक माली की तरह पौधे को सींचना है। अगर हम ये छोटी-छोटी नेगेटिव आदतें छोड़ दें, तो हमारे बच्चे न सिर्फ सफल होंगे, बल्कि एक खुशहाल और स्ट्रेस-फ्री लाइफ भी जिएंगे।

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