युद्ध और संकट की खबरों से डर रहे हैं बच्चे? पेरेंट्स इन 4 तरीकों से दूर करें उनका तनाव
युद्ध का दुष्प्रभाव पश्चिम एशिया ही नहीं, बच्चों और किशोरों के कोमल मस्तिष्क पर भी पड़ रहा है। इस असहज माहौल में कैसे करें उन्हें आश्वस्त कि यह वक्त भ ...और पढ़ें

युद्ध और संकट की खबरों से बच्चों में तनाव? (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
बच्चों से संवाद करें, उन्हें सुरक्षा का एहसास दिलाएं
विश्वसनीय जानकारी दें, डिजिटल डिटॉक्स को अपनाएं
स्वयं शांत रहें, सकारात्मक माहौल बनाएं, रचनात्मकता बढ़ाएं
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। चीखते हुए न्यूज एंकर, इंटरनेट मीडिया पर तैरती विचलित करने वाली तस्वीरें और अफवाहों से भरा इंटरनेट—ये सब हमारे घरों के ड्राइंग रूम तक पहुंच चुके हैं।
पश्चिम एशिया के संघर्ष हों या दुनिया के किसी भी कोने में मची अशांति, इनका सबसे गहरा और मूक प्रभाव बच्चों और किशोरों के कोमल मस्तिष्क पर पड़ता है। उस पर भारत में ईंधन और गैस की उपलब्धता को लेकर आ रही खबरों के बीच अनिश्चितता का यह माहौल बच्चों में गहरी घबराहट पैदा कर रहा है। ऐसे में माता-पिता की भूमिका एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह होनी चाहिए।
संवाद है जरूरी
बच्चों के लिए इस समय सहानुभूति सबसे ज्यादा जरूरी है। माता-पिता को बेहद सौम्यता और धैर्य के साथ बच्चों को यह समझाना चाहिए कि हालांकि संघर्ष वास्तविक है, लेकिन वह उनसे बहुत दूर है। उन्हें यह एहसास दिलाएं कि वे अपने घर में पूरी तरह सुरक्षित हैं। उनके ध्यान को युद्ध की खबरों से हटाकर रचनात्मक गतिविधियों की ओर मोड़ें। बच्चों को सिखाएं कि दूसरों के प्रति देखभाल और करुणा का भाव रखना कितना जरूरी है।
जांच-परखकर करें भरोसा
बच्चे जो कुछ भी सुनते या देखते हैं, उन्हें उस पर खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित करें। जो भी जानकारी उन्हें मिली है, उसे उनके साथ बैठकर विश्वसनीय स्रोतों से जांचें। बच्चों को जटिल शब्दजाल के बजाय उनकी उम्र के अनुसार सरल भाषा में समझाएं। उन्हें बताएं कि आनलाइन दिखने वाली हर चीज सच नहीं होती। उनमें ‘क्रिटिकल थिंकिंग’ विकसित करें ताकि वे डरने के बजाय तथ्यों को समझें। युद्ध के केवल विनाशकारी पहलुओं के बजाय, शांति के वैश्विक प्रयासों और मानवीय सहायता
के बारे में भी बात करें। इससे उनके मन में यह विश्वास पैदा होगा कि दुनिया को बेहतर बनाने के प्रयास भी जारी हैं।
खबरें और भी
आईना हैं आप
बच्चे अक्सर अपने माता-पिता के व्यवहार को देखकर अपनाते हैं। यदि आप स्वयं तनाव में रहेंगे या हर समय टीवी पर युद्ध की खबरें देखते रहेंगे, तो बच्चे स्वाभाविक रूप से पैनिक करेंगे। माता-पिता को पहले खुद पर नियंत्रण रखना होगा। युद्ध की निरंतर चर्चा घर के माहौल को भारी बना देती है, जिसका असर बच्चों के दिलो-दिमाग पर गहरा होता है। वहीं अगर आप देश में आ रही ईंधन गैस या अन्य आशंकाओं को लेकर चर्चा कर रहे हैं तो उस पर तनाव भरी बातें करने के बजाय उसके लिए उचित इंतजाम करने की ओर ध्यान लगाएं। यह बच्चों में सकारात्मक तैयारी को प्रेरित करता है।
टूटे एल्गोरिदम का जाल
आज के दौर में इंटरनेट मीडिया के एल्गोरिदम ऐसे हैं कि यदि आप एक बार युद्ध की सामग्री देखते हैं, तो आपकी फीड वैसी ही खबरों से भर जाती है। ऐसे में बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करें और ‘डिजिटल डिटाक्स’ अपनाने को कहें। दिनचर्या में कुछ घंटे ऐसे रखें, जहां तकनीक का कोई दखल न हो। इस समय का उपयोग अन्य गतिविधियों या खेलकूद में करें। बच्चों को केवल प्रामाणिक और सही प्लेटफार्म से ही समाचार लेने के लिए प्रेरित करें ताकि वे अनावश्यक सनसनीखेज खबरों से बच सकें।
मन को शांत रखने के उपाय
- ब्रीदिंग एक्सरसाइज: बच्चों को गहरी सांस लेने के व्यायाम कराएं।
- अभिव्यक्ति: क्रिएटिव आर्ट और जर्नलिंग (डायरी लिखना) के जरिए उनके मन की बात बाहर आने दें।
- ग्राउंडिंग तकनीक: उन्हें वर्तमान में रहने और आसपास की सकारात्मक चीजों पर ध्यान केंद्रित करना सिखाएं।
- सुरक्षा का भरोसा: उन्हें उदाहरण देकर समझाएं कि देश की सुरक्षा व्यवस्था और सिस्टम कैसे लोगों को सुरक्षित रखने के लिए काम कर रहे हैं।
दिलाएं पूरा विश्वास
युद्ध के दौरान अक्सर चीजों की कमी या महंगाई की खबरें आ रही हैं। बच्चों को समझाएं कि यह एक ‘अस्थायी असुविधा’ है। उन्हें रसोई के कामों या भविष्य की योजना बनाने जैसी गतिविधियों में शामिल करें। इससे उन्हें विश्वास होगा कि आप स्थिति संभालने में सक्षम हैं। बहुत रिएक्टिव होने के बजाय समाधान-परक बनें।