न पूरी तरह स्ट्रेट, न पूरी तरह गे: क्या है Heteroflexibility, जो तेजी से बदल रही है लोगों की सोच
क्या आप समाज द्वारा तय किए गए रिश्तों के पुराने 'लेबल्स' में खुद को फंसा हुआ महसूस करते हैं या क्या आप खुद को 'स्ट्रेट' तो मानते हैं, लेकिन कभी-कभार आ ...और पढ़ें

क्या है Heteroflexibility और इसे क्यों अपना रहे लोग? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल हर कोई समाज द्वारा बनाए गए पुराने और सीधे-सादे लेबल्स में फिट नहीं बैठता। जैसे-जैसे सेक्शुअलिटी या जेंडर को लेकर बातचीत ज्यादा ओपन होती जा रही है, वैसे-वैसे नई शब्दावली भी सामने आ रही है।
यह उन लोगों की फीलिंग्स को नाम देने का काम कर रही है, जो वे लंबे समय से महसूस तो कर रहे थे, लेकिन बयां नहीं कर पा रहे थे। ऐसा ही एक शब्द है- हेटेरोफ्लेक्सिबिलिटी (Heteroflexibility)। दरअसल, यह अब सिर्फ डेटिंग ऐप्स तक सीमित नहीं है, बल्कि आम चर्चा का हिस्सा बन गया है।

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क्या है हेटेरोफ्लेक्सिबिलिटी?
आसान शब्दों में कहें तो, हेटेरोफ्लेक्सिबिलिटी उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है जो मुख्य रूप से खुद को 'हेटेरोसेक्सुअल' या 'स्ट्रेट' मानते हैं, लेकिन वह सेम सेक्स के लोगों के प्रति भी कभी-कभार अट्रैक्शन महसूस करते हैं या उसके लिए ओपन रहते हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि वे पूरी तरह से स्ट्रेट होना छोड़ देते हैं, और न ही इसका मतलब यह है कि वे लगातार समान लिंग के प्रति आकर्षित रहते हैं। इसके बजाय, यह शब्द 'अपवादों' की अनुमति देता है। यानी जिज्ञासा या जुड़ाव के वे पल जो पूरी तरह से हेटेरोसेक्सुअल ढांचे में फिट नहीं बैठते। मनोविज्ञान के अनुसार, यह पहचान मानती है कि सेक्शुअल अट्रैक्शन फिक्स होने के बजाय टेम्परेरी हो सकता है।
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क्यों अचानक पॉपुलर हो रहा यह शब्द?
'फील्ड' की रॉ 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, डेटिंग प्लेटफॉर्म पर हेटेरोफ्लेक्सिबिलिटी सबसे तेजी से बढ़ने वाली सेक्शुअल आइडेंटिटी में से एक है। पिछले एक साल में इस लेबल को चुनने वाले यूजर्स की संख्या में 193 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
यह उछाल लोगों के व्यवहार में आए किसी बड़े बदलाव के बजाय भाषा के साथ उनकी सहजता को दर्शाता है। कई लोगों के लिए, हेटेरोफ्लेक्सिबिलिटी उन्हें अपनी भावनाओं या अनुभवों को स्वीकार करने का एक ऐसा तरीका देती है, जिसमें उन्हें किसी बहुत स्ट्रिक्ट लेबल को अपनाने की जरूरत नहीं पड़ती।

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यह 'बायसेक्शुअलिटी' से अलग कैसे है?
इन दोनों में मुख्य अंतर व्यवहार से ज्यादा खुद को पहचानने के तरीके में है:
- बायसेक्शुअलिटी: इसका मतलब आमतौर पर एक से ज्यादा जेंडर के प्रति लगातार अट्रैक्शन महसूस करना होता है।
- हेटेरोफ्लेक्सिबिलिटी: इसका शब्द का इस्तेमाल अक्सर वे लोग करते हैं जो खुद को मुख्य रूप से स्ट्रेट मानते हैं, लेकिन कभी-कभार अपवादों के साथ।
कुछ लोगों को बायसेक्शुअलिटी के मुकाबले हेटेरोफ्लेक्सिबिलिटी शब्द अपनी स्थिति के लिए ज्यादा सटीक लगता है, जबकि दूसरों के लिए यह अपनी पहचान को खोजने के दौरान एक अस्थायी पड़ाव हो सकता है।
कौन कर रहा है इस लेबल का इस्तेमाल?
आंकड़े बताते हैं कि इस शब्द को अपनाने वालों में सबसे बड़ी संख्या मिलेनियल्स की है, जो इस ग्रुप का लगभग दो-तिहाई हिस्सा हैं। इसके बाद जेन Z (18%) और जेन X (15.5%) का नंबर आता है।
भौगोलिक रूप से, बर्लिन में इस लेबल का इस्तेमाल करने वाले सबसे ज्यादा लोग देखे गए हैं। वहीं, अमेरिका में हुए शोध बताते हैं कि वहां लगभग 15 प्रतिशत लोग हेटेरोफ्लेक्सिबल के रूप में पहचान रखते हैं। इसमें वे लोग शामिल हैं जिन्होंने इससे पहले सेम सेक्स रिलेशनशिप एक्सपीरिएंस किए हैं, जो खुद को 'बाय-क्यूरियस' मानते हैं, या जो हेटेरोसेक्शुअल रिश्तों में रहते हुए भी सेम सेक्स एक्सपीरिएंस के लिए ओपन हैं।
अट्रैक्शन के 'ग्रे एरिया' पर छिड़ी बहस
जैसे-जैसे यह शब्द लोकप्रिय हो रहा है, इसकी आलोचना भी हो रही है। कुछ बायसेक्शुअल और पैनसेक्शुअल कम्युनिटी का मानना है कि हेटेरोफ्लेक्सिबिलिटी उन पहचानों को कमजोर कर सकती है जिन्हें ऐतिहासिक रूप से मान्यता मिलने में संघर्ष करना पड़ा है। कुछ लोग यह भी सवाल उठाते हैं कि क्या नए लेबल्स चीजों को स्पष्ट करने के बजाय और उलझा रहे हैं।
इसके बावजूद, हेटेरोफ्लेक्सिबिलिटी का बढ़ता इस्तेमाल इस बात का सबूत है कि अट्रैक्शन हमेशा एक तय पैटर्न को फॉलो नहीं करता। यानी बहुत से लोगों के लिए, यह शब्द उनके जीवन के वास्तविक अनुभवों को बताने का सबसे सही जरिया है।