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    अनुशासन के नाम पर ज्यादा सख्ती बना सकती है बच्चों को दब्बू, एंग्जायटी का भी बढ़ता है खतरा

    Updated: Wed, 18 Mar 2026 09:27 AM (IST)

    बच्चों को अनुशासन सिखाना जरूरी है, लेकिन इसके ज्यादा सख्त रवैया अपनाना उनकी मानसिक सेहत को प्रभावित कर सकता है। ...और पढ़ें

    बच्चों के विकास को प्रभावित करती है ज्यादा स्ट्रिक्ट पेरेंटिंग (Picture Courtesy: Feepik)

    बच्चों के विकास को प्रभावित करती है ज्यादा स्ट्रिक्ट पेरेंटिंग (Picture Courtesy: Feepik)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बच्चों को बचपन से ही डिसिप्लिन सिखाना बहुत जरूरी है, लेकिन कई बार अनुशासन सिखाने के लिए माता-पिता ज्यादा सख्ती का रुख कर लेते हैं। अनुशासन अगर सख्ती या ओवर कंट्रोल का रूप ले ले, तो बच्चों उल्टा असर भी हो सकता है। 

    ओवर-स्ट्रिक्ट पेरेंटिंग बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालती है। आइए जानें क्यों जरूरत से ज्यादा सख्ती बच्चों के लिए सही नहीं है। 

    आत्मविश्वास की कमी

    जब माता-पिता बच्चों के हर छोटे फैसले को कंट्रोल करते हैं और गलती होने पर सजा देते हैं, तो बच्चा खुद पर भरोसा करना बंद कर देता है। उसे हमेशा यह डर सताता है कि अगर उसने कुछ गलत किया, तो उसे सजा मिलेगी। यह डर बच्चे में आत्मविश्वास की कमी का कारण बनता है। वह नए काम करने या रिस्क लेने से कतराने लगता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके लिए परफेक्शन ही एकमात्र विकल्प है।

    झूठ बोलने और छिपाने की प्रवृत्ति

    ज्यादा सख्त माहौल के कारण बच्चे झूठ बोलने या बातें छिपाने लग सकते हैं। सजा के डर से वे अपनी गलतियों को सुधारने के बजाय उन्हें छिपाने के तरीके खोजने लगते हैं। धीरे-धीरे यह आदत उनके व्यवहार का हिस्सा बन सकती है, जिससे माता-पिता और बच्चों के बीच कम्युनिकेशन गैप बढ़ता जाता है।

    Discipline Teaching

    (AI Generated Image)

    सामाजिक और भावनात्मक चुनौतियां

    स्ट्रिक्ट पेरेंटिंग के कारण बच्चे अपनी भावनाओं को व्यक्त करना नहीं सीख पाते। ऐसे बच्चे अक्सर खुद को दूसरों से कटा हुआ महसूस करते हैं। टीनएज में पहुंचते ही यही सख्ती अक्सर विद्रोह का कारण बनती है। जो बच्चा बचपन में चुपचाप बात मानता था, वह बड़ा होकर आक्रामक या विद्रोही हो सकता है।

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    मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

    ज्यादा नियम-कायदों के कारण बच्चों में एंग्जायटी और डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। वे हर समय हाइपर-विजिलेंट रहते हैं, यानी उन्हें हमेशा लगता रहता है कि कोई उन्हें जज कर रहा है। इसलिए वे कुछ भी नया करने से कतराते हैं, खुलकर अपनी बात नहीं रखते और दूसरों से कटा हुआ महसूस करते हैं। इससे उनकी मानसिक सेहत और क्रिएटिविटी प्रभावित होती है। 

    अनुशासन और प्यार के बीच सही बैलेंस कैसे बनाएं?

    अच्छी पेरेंटिंग के लिए बच्चों को अनुशासन सिखाने के साथ-साथ यह बताना भी जरूरी है कि आप उनसे प्यार करते हैं और उन्हें सपोर्ट करते हैं। इसलिए-

    • बच्चों को सिर्फ ऑर्डर देने के बजाए उनकी बात सुनें और अपने बनाए नियम के कारण बताएं।
    • गलती करने पर सजा देने के बजाए उन्हें गलती सुधारने का मौका दें और बताएं कि उनसे कहां चूक हुई है।
    • बच्चों के मन में डर की जगह सम्मान और भरोसे की भावना जगाने की कोशिश करें। 

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