पेरेंट्स टीनेज बच्चों को दें कितनी ढील? समझें कहां सही प्राइवेसी और कहां रखें 'नो-कॉप्रोमाइज' रूल
बच्चों को प्राइवसी देनी जरूरी है लेकिन किन मामलों में देनी चाहिए, इसपर पेरेंट्स का विचार करना जरूरी है।

टीनेज बच्चों की प्राइवसी समझें पेरेंट्स (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बच्चे जैसे-जैसे 8-10 की उम्र पार कर टीनेज में जाने लगते हैं तो पेरेंट्स के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि उन्हें कितनी प्राइवसी दी जानी चाहिए। कई बार तो माता-पिता प्राइवसी और नॉन प्राइवसी वाली चीजों की बीच फर्क करना ही भूल जाते हैं, जबकि इसकी महीन रेखा को समझना बच्चे के बेहतर विकास के लिए जरूरी है।
कमरे में रखी निजी चीजों की प्राइवसी
बच्चों के कमरे में रखी उनकी चीजों जैसे उनकी पर्सनल डायरी, ड्रॉइंग बुक्स, किताबों के साथ ही उनके पर्सनल नोट्स और तोहफों को लेकर पेरेंट्स को ज्यादा दखल अंदाजी नहीं करनी चाहिए। कमरे का एक अलमारी वाला कोना उनका निजी ही रहने दें।
पसंद के कपड़े पहनने देना
उम्र बढ़ने के साथ बच्चों के कपड़े पहनने का तरीका भी बदलता है, ऐसे में उन्हें कपड़े पहनने के मामले में रोक-टोक न करें। उन्हें स्टाइल और फैशन को अपने ऊपर अप्लाई करने और उसको ठीक करने का इतना स्पेस जरूर दें कि वो आगे चलकर खुद के लिए कुछ बेहतर पसंद कर पाएं।
बॉडी प्राइवसी
माना कि बच्चे चाहे जितने बड़े हो जाएं पेरेंट्स के सामने छोटे ही रहेंगे लेकिन पेरेंट्स को छोटी उम्र से ही उनके नहाने और कपड़े बदलने की गोपनीयता का खास ख्याल रखना चाहिए।
किन चीजों पर बच्चों को प्राइवसी देने से बचना चाहिए?
ऐसी बहुत सी चीजें हैं जिनपर माता-पिता को हर समय चौकन्ना रहने की जरूरत है, पर अफसोस कि आजकल इन्हीं चीजों में उन्हें सबसे ज्यादा खुली छूट दी जा रही है।
इंटरनेट और सोशल मीडिया एप्स
बच्चों को इंटरनेट और सोशल मीडिया एप्स इस्तेमाल करने के मामले में बिल्कुल भी ढील नहीं बरती जानी चाहिए। इस बात का खास ध्यान रखें कि बच्चा क्या कर रहा है, किन एप्स को अपने मनोरंजन का माध्यम बना रहा है और ऑनलाइन कैसे लोगों के साथ संपर्क में है।
सेहत
बच्चों की डाइट का खास ख्याल रखने की जिम्मेदारी पेरेंट्स की है, वो बाहर जाकर क्या खाते हैं इसपर नजर जरूर रखें। इस उम्र में ही उनकी खाने से जुड़ी आदतें सेहत पर सीधा प्रभाव डालती है।
संगति
इस उम्र में बच्चे नशे और बुलिंग का ज्यादा शिकार होते हैं। कई बार तो उन्हें पता ही नहीं होता कि वो किस परिस्थिति का सामना कर रहे हैं, ऐसे में उनकी संगति पर नजर रखने के साथ ही मन का हाल जानने की कोशिश करें। यहां प्राइवसी देना बच्चों की मेंटल हेल्थ पर हावी पड़ सकता है।
