दिनभर फोन से चिपका रहता है बच्चा? इस समर वेकेशन बोर्ड गेम्स से घर में वापस लाएं हंसी-ठिठोली का माहौल
जब बाहर आग उगल रहे हों सूर्य भगवान तो घर में रहना ही है समाधान। मगर बैठे-बैठे केवल रील मत ...और पढ़ें

इस वेकेशन बच्चों को 'रील्स' नहीं, ट्रेडिशनल बोर्ड गेम्स का लगाइए चस्का (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
आरती तिवारी, नई दिल्ली। इस समय गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं। बाहर 44 डिग्री तापमान में तेज लू और तपिश का माहौल है। ऐसे में बच्चे घर में कैद होने को मजबूर हैं। घरों में बंद बच्चे मनोरंजन के लिए लगातार स्मार्टफोन और स्क्रीन का सहारा ले रहे हैं। हर वक्त स्मार्टफोन देखना सेहत के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है। यह आदत बच्चों की मानसिक और शारीरिक क्षमता को प्रभावित करती है। इस समस्या का सबसे बेहतरीन समाधान हैं गर्मी की छुट्टी के पुराने भरोसेमंद साथी बोर्ड गेम। ये खेल न केवल बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने का जरिया हैं, बल्कि परिवार को साथ बांधने का बड़ा माध्यम भी हैं।

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बजट के अनुकूल मनोरंजन
आज वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार भी सोच-समझकर खर्च करने की अपील कर रही है जबकि आज के दौर में बाहर जाकर घूमना या किसी माल में गेमिंग जोन जाना बेहद खर्चीला हो चुका है। इसके उलट, बोर्ड गेम किफायती और टिकाऊ विकल्प है। एक बार खरीदा गया बोर्ड गेम सालों-साल पूरे परिवार का मनोरंजन कर सकता है। इसके लिए किसी महंगे गैजेट, इंटरनेट कनेक्शन या बिजली की आवश्यकता नहीं होती। यह किसी भी आयवर्ग के भारतीय परिवार के लिए बजट के अनुकूल मनोरंजन का साधन है। इसे घर के किसी भी कोने में आसानी से खेला जा सकता है।
स्क्रीन से मिलेगी बड़ी राहत
आजकल के बच्चे अपना अधिकांश समय मोबाइल पर बिताते हैं। लगातार स्क्रीन देखने से उनकी आंखों और व्यवहार पर बुरा असर पड़ता है। गर्मी की छुट्टियों में यह समस्या और भी ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में बोर्ड गेम वरदान की तरह हैं। जब पूरा परिवार लूडो, कैरम या सांप-सीढ़ी खेलने बैठता है, तो बच्चे खुद-ब-खुद मोबाइल भूल जाते हैं। यह खेल उन्हें आभासी दुनिया से निकालकर वास्तविक दुनिया में लाते हैं। स्क्रीन से दूरी बनाने का इससे बेहतर और कोई दूसरा उपाय नहीं हो सकता।
रिश्तों में आएगी नई मिठास
भारतीय परिवारों में दादा-दादी, माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद की कमी देखी जा रही है। हर कोई अपनी डिजिटल दुनिया में व्यस्त रहता है। बोर्ड गेम इस दूरी को पाटने का काम बखूबी करते हैं। जब तीन पीढ़ियां एक साथ बैठकर चौपड़ या व्यापार (मोनोपोली का देसी संस्करण) खेलती हैं, तो घर का माहौल जीवंत हो उठता है। खेल के दौरान होने वाली हंसी-ठिठोली रिश्तों की कड़वाहट और दूरी को मिटा देती है। यह समय केवल खेल का नहीं, बल्कि आपसी बातचीत और सुख-दुख साझा करने का माध्यम बनता है।
सीखेंगे जीवन के जरूरी सबक
बोर्ड गेम केवल मनोरंजन का साधन मात्र नहीं हैं। ये खेल बच्चों को जीवन के कई महत्वपूर्ण सबक भी सिखाते हैं। खेल में कभी जीत मिलती है तो कभी हार का सामना करना पड़ता है। इससे बच्चे हार को स्वीकार करना और दोबारा प्रयास करना सीखते हैं। परिवार के सदस्यों के समक्ष यह अनुभव उनमें धैर्य और खेल भावना का विकास करता है। भारतीय संदर्भ में, जहां बच्चों को अक्सर हर क्षेत्र में अव्वल आने का दबाव झेलना पड़ता है, वहां ये खेल उन्हें सिखाते हैं कि हारना जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नया अनुभव है।
संस्कृति से होगा गहरा जुड़ाव
हमारे देश में पारंपरिक खेलों का एक समृद्ध इतिहास रहा है। चौपड़, पल्लंगुजी, अष्ट चम्मा और शतरंज जैसे खेल सदियों से हमारी संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। इन खेलों के माध्यम से हम बच्चों को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ सकते हैं। जब माता-पिता अपने बचपन के खेलों की कहानियां बच्चों को सुनाते हैं, तो बच्चों में एक अलग उत्साह देखने को मिलता है। यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान बच्चों को अपनी विरासत पर गर्व करना सिखाता है और उन्हें परिवार के और करीब लाता है।
दिमागी कसरत और एकाग्रता
शतरंज, पल्लंगुजी और बाघ-बकरी जैसे भारतीय रणनीतिक बोर्ड गेम बच्चों की दिमागी क्षमता को बढ़ाते हैं। इन खेलों को जीतने के लिए विशेष रणनीति और गहरे सोच की आवश्यकता होती है। इससे बच्चों की तार्किक क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति मजबूत होती है। मोबाइल गेम जहां बच्चों को उत्तेजित और आक्रामक बनाते हैं, वहीं बोर्ड गेम उनमें एकाग्रता और शांति लाते हैं। खेल-खेल में बच्चे गणितीय गणना और भाषा के नए शब्द भी सीख जाते हैं, जो उनकी पढ़ाई में भी मददगार साबित होता है।
एक घंटा परिवार के नाम
सजग अभिभावक होने के नाते हमारा यह कर्तव्य है कि हम बच्चों को सही दिशा दिखाएं। केवल मोबाइल मत देखो- कहने से बच्चे बात नहीं मानेंगे। हमें उन्हें एक बेहतर और आकर्षक विकल्प देना होगा। इस गर्मी की छुट्टी में रोज एक घंटा फैमिली गेम टाइम के रूप में तय करें। यह छोटा सा कदम आपके बच्चे के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। बोर्ड गेम के जरिए आप बच्चों के साथ जो यादें बनाएंगे- वे जीवनभर उनके साथ रहेंगी। तो देर किस बात की- आज ही अलमारी से पुराने बोर्ड गेम निकालिए और परिवार के साथ एक नई शुरुआत कीजिए।
ये कंपनियां कर रही हैं काम
- माईसूत्रधार: रामायण, महाभारत पर आधारित बोर्ड गेम्स और खिलौने बनाने वाली कंपनी।
- क्रीड़ा गेम्स: भारतीय पारंपरिक खेलों पर शोध, विकास और पुनरुद्धार कर रही चेन्नई आधारित कंपनी 24 वर्ष से बच्चों के लिए 28 से अधिक भारतीय बोर्ड गेम फिर से शुरू कर चुकी है।
- खोलखेल: एनईपी 2020 द्वारा निर्धारित खेल आधारित शिक्षाशास्त्र को विकसित करने में योगदान दे रही है यह जयपुर स्थित कंपनी।
- रोल द डाइस: पारंपरिक भारतीय खेलों को पुनर्जीवित करने पर केंद्रित बेंगलुरु स्थित कंपनी।
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