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    क्यों लड़-झगड़ कर होने वाले 'ब्रेकअप' से ज्यादा दर्दनाक होता है राजी-खुशी अलग होना? हैरान कर देगी वजह

    Updated: Sat, 24 Jan 2026 02:59 PM (IST)

    ब्रेकअप का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में क्या आता है? टूटे हुए वादे, चीखना-चिल्लाना और एक-दूसरे पर इल्जाम लगाना। हमें लगता है कि जब दिल टूटता है, तो शो ...और पढ़ें

    क्यों शोर-शराबे वाले Breakup से ज्यादा रुलाता है शांति से अलग होना? (Image Source: AI-Generated)

    क्यों शोर-शराबे वाले Breakup से ज्यादा रुलाता है शांति से अलग होना? (Image Source: AI-Generated) 

    HighLights

    1. गुस्से की कमी से बढ़ जाता है दर्द

    2. प्यार खत्म न होने से सालता है अधूरापन

    3. मूव ऑन नहीं करने देता 'काश' का सवाल

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जब भी हम 'ब्रेकअप' शब्द सुनते हैं, तो दिमाग में चीखना-चिल्लाना, लड़ाई-झगड़े या धोखे की तस्वीरें आती हैं। हमें लगता है कि जो रिश्ता लड़कर खत्म हुआ, वो सबसे ज्यादा दर्द देता है, लेकिन मनोविज्ञान और अनुभव कुछ और ही कहते हैं।

    सच्चाई यह है कि म्यूचुअल ब्रेकअप (Mutual Breakup) यानी राजी-खुशी, बिना किसी लड़ाई के अलग होना, दिल पर ज्यादा गहरा घाव छोड़ जाता है। आखिर क्यों दो समझदार लोग जब अलग होते हैं, तो तकलीफ ज्यादा होती है? आइए जानते हैं इसकी वजहें।

    Breakup benefits

    (Image Source: AI-Generated) 

    गुस्से का न होना

    जब आपका पार्टनर आपको धोखा देता है या आपसे बुरा बर्ताव करता है, तो आपको गुस्सा आता है। गुस्सा एक ढाल की तरह काम करता है। आप खुद को कह सकते हैं, "वो मेरे लायक नहीं था" या "अच्छा हुआ जान छूट गई।"

    हालांकि, जब आप राजी-खुशी अलग होते हैं, तो वहां गुस्सा नहीं होता, सिर्फ लाचारी होती है। आप सामने वाले से नफरत नहीं कर पाते, और नफरत के बिना किसी को भुलाना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है।

    प्यार खत्म नहीं होता, बस हालात बिगड़ जाते हैं

    लड़ाई वाले ब्रेकअप में अक्सर प्यार खत्म हो चुका होता है या कड़वाहट में बदल जाता है, लेकिन राजी-खुशी अलग होने में प्यार कम नहीं होता।

    जी हां, हो सकता है कि किसी की नौकरी दूसरे शहर में लग गई हो, या परिवार वाले नहीं मान रहे हों। जब आप एक-दूसरे को बेइंतहा प्यार करते हुए भी अलग होते हैं, तो वो अधूरापन पूरी जिंदगी सालता रहता है। यह एहसास कि "हम साथ हो सकते थे, लेकिन हो नहीं पाए," इंसान को अंदर से तोड़ देता है।

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    हमेशा सताता है 'काश' का सवाल

    जब रिश्ता कड़वाहट के साथ खत्म होता है, तो 'क्लोजर' मिल जाता है। आपको पता होता है कि अब वापस जाने का कोई रास्ता नहीं है।

    हालांकि, जब सब कुछ ठीक होते हुए भी आप अलग होते हैं, तो दिमाग में हमेशा 'काश' चलता रहता है। "काश हमने थोड़ी और कोशिश की होती," "काश वक्त कुछ और होता।" यह उम्मीद की एक झूठी किरण है जो आपको मूव ऑन नहीं करने देती।

    खो देते हैं सबसे अच्छा दोस्त

    लड़ाई वाले रिश्तों में दोस्ती पहले ही दम तोड़ चुकी होती है, लेकिन एक अच्छे रिश्ते में आपका पार्टनर आपका सबसे अच्छा दोस्त भी होता है। जब आप राजी-खुशी अलग होते हैं, तो आप सिर्फ एक बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड को नहीं खोते, आप उस इंसान को खो देते हैं जो आपको सबसे बेहतर समझता था। अचानक से वो इंसान 'अजनबी' बन जाता है जिससे आप कल तक हर बात शेयर करते थे।

    राजी-खुशी अलग होना मैच्योरिटी की निशानी जरूर है, लेकिन यह दिल के लिए बहुत भारी होता है। इसमें कोई विलेन नहीं होता जिसे आप कोस सकें। इसमें सिर्फ दो अच्छे लोग होते हैं जो सही वक्त पर गलत जगह मिल गए थे।

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