इन 5 फैसलों पर कभी न करें 'लोग क्या कहेंगे' की फिक्र, इस महिला दिवस खुद से जरूर करें ये वादे
महिला दिवस पर जानेंगे कैसे महिलाओं को बिना किसी गिल्ट के 5 बातों का फैसला खुद करना चाहिए और खुल जिंदगी जीना चाहिए। ...और पढ़ें

महिला दिवस पर महिलाएं लें ये 5 अहम फैसले, खुद की खुशी को दें प्राथमिकता (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। घर-परिवार और ऑफिस की जिम्मेदारियां अक्सर महिलाओं को खुद के बारे में सोचने से रोकती हैं। जाने-अनजाने में उनके कंधों पर उम्मीदों और कामकाज का इतना बोझ डाल देते हैं कि अपने लिए कुछ करने से उन्हें गिल्ट महसूस होता है।
ऐसे में इस महिला दिवस, सीनियर साइकोलॉजिस्ट मोनिका शर्मा से जानेंगे 5 ऐसी बातों के बारे में, जिन्हें करने से पहले एक महिला के तौर पर आपको कभी भी शर्मिंदा या परेशान नहीं होना चाहिए:
खुद के लिए टाइम निकालना
अक्सर ऐसा मान लिया जाता है कि महिलाएं 'सुपरवुमन' होती हैं, जो कभी थकती नहीं है। हालांकि, यह सच नहीं है। महिलाएं भी इंसान होती है, कोई मशीन नहीं और उन्हें भी घर-ऑफिस की भागदौड़ से ब्रेक लेकर सुकून के पल बिताने का हक है।
इसलिए खुद के लिए समय निकालना, एक कप चाय पीना, कोई किताब पढ़ना या बस यूंही खाली बैठना और अपने लिए समय निकलना बिल्कुल भी गलत नहीं है। इसके लिए गिल्ट करने की जरूरत नहीं, क्योंकि जब आप खुद अंदर से खुश और तरोताजा महसूस करेंगी, तभी परिवार का अच्छे से ख्याल रख पाएंगी।
अपने करियर और सपनों को उड़ान देना
आज भी कई महिलाओं को कई वजहों से अपने करियर और सपनों को छोड़ना पड़ता है। घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अक्सर महिलाएं अपने सपने पीछे छोड़ देती हैं, लेकिन सच तो यह है कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना और अपने सपनों को पूरा करना आपका पूरा हक है। काम के सिलसिले में देर तक ऑफिस में रुकना या सफर करना कोई गुनाह नहीं है।
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आपकी पहचान सिर्फ आपके घर-परिवार से नहीं जुड़ी है। एक खुशहाल और अपने सपनों को जीने वाली महिला, अपने बच्चों और आस-पास के लोगों के लिए एक बेहतरीन मिसाल बनती है।
बिना झिझक 'ना' कहना
बचपन से ही महिलाओं को यह सिखाया जाता है कि वह गुड गर्ल हैं और इसके लिए उन्हें 'सबको खुश रखने' की सीख दी जाती है। इसी चक्कर में अक्सर महिलाएं उन कामों के लिए भी हां कह देती हैं, जिसे करने की उनकी इच्छा और हिम्मत दोनों नहीं होती। ऐसे में अपने मेंटल पीस के लिए 'ना' कहना सीखना बहुत जरूरी है।
सबको खुश रखना नामुमकिन है। जब आप किसी फालतू के बोझ को 'ना' कहती हैं, तो दरअसल आप अपनी सेहत और सुकून को 'हां' कह रही होती हैं। अपनी बाउंड्रीज तय करना बदतमीजी नहीं, बल्कि खुद की इज्जत करना है।
'परफेक्ट' बनने की होड़ से बाहर निकलना
आज भी कई लोग उसी पुरानी सोच को फॉलो करते हैं, जिसमें एक महिला को हमेशा से ही परफेक्ट माना जाता है। समाज ने 'परफेक्ट महिला' की एक ऐसी तस्वीर बना दी है, जो असल जिंदगी में मुमकिन ही नहीं है। अगर आप इस होड़ से बाहर निकल कर कुछ ऐसा करती है, जो लोगों की नजर में परफेक्ट की डेफिनिशन से अलग है, तो इसमें गिल्ट करने की जरूरत नहीं।
ध्यान रखें कि 'परफेक्शन' नाम की कोई चीज दुनिया में नहीं होती। हम इंसान हैं, तो गलतियां भी होंगी और चीजें अस्त-व्यस्त भी रहेंगी। जिंदगी को 'परफेक्ट' बनाने के बजाय उसे 'खुशनुमा' बनाने पर ध्यान दें।
अपनी जिंदगी के निजी फैसले खुद लेना
शादी करनी है या नहीं, कब करनी है, मां बनना है या नहीं- ये फैसले सिर्फ और सिर्फ आपके हैं। लोगों के मुताबिक अपनी लाइफ के फैसले लेना सही नहीं। अगर आप अपने बारे में सोचकर खुद के लिए कोई फैसला लेती हैं, तो आप बिल्कुल भी गलत नहीं कर रही हैं।
यह आपकी जिंदगी है और इसमें क्या करना है, इसका फैसला आपका ही होना चाहिए। आपके फैसले इस बात पर टिके होने चाहिए कि आपको किस चीज से खुशी और सुकून मिलता है, न कि इस बात पर कि 'लोग क्या कहेंगे'।