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अंबिका भवानी मंदिर: जहां राजा दक्ष के यज्ञ कुंड में सती ने किया था आत्मदाह, इस नवरात्र जरूर करें दर्शन

Published: Thu, 26 Mar 2026 11:21 AM (IST)

बिहार के अंबिका भवानी मंदिर का नाता माता सती और उनके पिता प्रजापति दक्ष के यज्ञ से जुड़ा है।

नवरात्र में जरूर करें अंबिका भवानी के दर्शन (Picture Courtesy: Freepik)

नवरात्र में जरूर करें अंबिका भवानी के दर्शन (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार के सारण जिले में गंगा के तट पर स्थित अंबिका भवानी मंदिर (आमी) केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि अटूट श्रद्धा और पौराणिक इतिहास का संगम है।

छपरा से लगभग 26 किलोमीटर दूर दिघवारा के पास स्थित यह मंदिर अंबिका स्थान के नाम से जाना जाता है। चैत्र नवरात्र के इस पावन अवसर पर आइए जानें अंबिका भवानी मंदिर का धार्मिक महत्व क्या है और यहां पहुंच कैसे सकते हैं। 

यहीं माता सती ने किया था आत्मदाह

अंबिका भवानी मंदिर का इतिहास सतयुग से जुड़ा है। पौराणिक कथाओं और सारण गजटियर के अनुसार, यह स्थान राजा दक्ष प्रजापति का वही यज्ञ-स्थल माना जाता है जहां माता सती ने अपने पति भगवान शिव के अपमान से क्रोधित होकर हवनकुंड में आत्मदाह कर लिया था।

जब भगवान शिव सती के पार्थिव शरीर को कंधे पर लेकर तांडव करने लगे, तब सृष्टि को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े कर दिए। मान्यता है कि जहां-जहां सती के अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ बने। लेकिन आमी की खासियत यह है कि यहां माता सती के शरीर की भस्मयुक्त अस्थियां यानी यज्ञ कुंड में जलने के बाद शेष बचा अंश रह गई थीं। यही कारण है कि इस स्थल को एक बेहद प्रभावशाली सिद्ध-पीठ माना जाता है।

Ambika Bhawani

(Picture Courtesy: Freepik)

मंदिर की खासियत और दर्शन का समय

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां का यज्ञ कुंड है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह कभी भरता नहीं है। भक्त यहां माता के सौम्य रूप की पूजा करते हैं। भक्त गर्भगृह स्थित कुंड में हाथ डालकर मन्नत मांगते हैं और कुंड से मिलने वाले प्रसाद को एक वस्त्र में छिपाकर रखते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से सभी मन्नतें पूरी होती हैं। मन्नत पूरी होने के बाद कुंड से मिला प्रसाद कुंड में ही वापिस कर दिया जाता है। 

मंदिर में दर्शन का समय

  • प्रातः काल- सुबह 4:30 बजे माता अंबा का स्नान होता है, जिसके बाद 5:00 बजे नित्य पूजा की जाती है। भक्तों के लिए मंदिर के द्वार सुबह 5:10 बजे खुल जाते हैं।
  • दोपहर का विश्राम- दोपहर 1:00 बजे मंदिर के पट बंद होते हैं और फिर 2:00 बजे दोबारा खुलते हैं।
  • संध्या आरती- शाम 3:15 बजे स्नान और श्रृंगार के लिए द्वार बंद किए जाते हैं और शाम 4:00 बजे फिर से दर्शन शुरू होते हैं। 
  • मंदिर की भव्य मुख्य आरती रात 8:40 को आयोजित की जाती है।

आमी अंबिका स्थान कैसे पहुंचें?

अंबिका भवानी मंदिर तक पहुंचना काफी आसान है क्योंकि यह रेल और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है-

  • रेल मार्ग- मंदिर के सबसे नजदीक आमी रेलवे स्टेशन है। इसके अलावा भक्त दिघवारा या छपरा जंक्शन तक ट्रेन से आ सकते हैं, जहां से ऑटो या टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं।
  • सड़क मार्ग- यह मंदिर पटना-छपरा मुख्य मार्ग पर स्थित है। पटना से इसकी दूरी लगभग 50-55 किलोमीटर है। आप पटना से बस या टैक्सी लेकर सीधे यहां पहुंच सकते हैं।
  • वायु मार्ग- नजदीकी हवाई अड्डा पटना का जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जहां से कैब से 2 घंटे में मंदिर पहुंचा जा सकता है।


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