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    क्यों हर महिला को जिंदगी में कम से कम एक बार जरूर करनी चाहिए 'सोलो ट्रिप'?

    Updated: Sun, 08 Mar 2026 06:55 AM (GMT+05:30)

    महिलाओं के बीच सोलो ट्रैवल का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जो अब छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक फैल गया है। ...और पढ़ें

    सिर्फ घूमना नहीं, खुद को खोजने का जरिया है 'सोलो ट्रैवल' (Image Source: AI-Generated)

    सिर्फ घूमना नहीं, खुद को खोजने का जरिया है 'सोलो ट्रैवल' (Image Source: AI-Generated)

    HighLights

    1. महिलाओं में सोलो ट्रैवल का चलन तेजी से बढ़ रहा है

    2. यह यात्रा महिलाओं को सशक्त और आत्मविश्वासी बनाती है

    3. सुरक्षा के साथ सही रिसर्च और प्लानिंग महत्वपूर्ण है

    तमन्ना चौहान, नई दिल्ली। महिलाओं के बीच तेजी से बढ़ रहा है सोलो ट्रैवल का चलन। यह उत्साह केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं, ग्रामीण भारत और छोटे शहरों की महिलाएं भी यह समझ रही हैं कि दुनिया देखने और घूमने-फिरने का अधिकार उनका भी है। सोलो ट्रैवलर तमन्ना चौहान का अनुभवजन्य आलेख...

    कुछ वर्षों में महिलाओं के बीच सोलो ट्रैवल का चलन तेजी से बढ़ा है। ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़े विभिन्न आकलनों के अनुसार, भारत में महिलाओं की एकल यात्राओं में लगभग 30 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है। विशेषकर 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएं इस ट्रेंड को आगे बढ़ा रही हैं। पहले यह चलन मुख्य रूप से महानगरों तक सीमित था, वहीं अब छोटे शहरों और यहां तक कि ग्रामीण भारत से भी महिलाओं की उत्सुकता तेजी से बढ़ रही है। मेरठ, अलीगढ़, देहरादून, गोरखपुर, हिसार या जयपुर के आस-पास के कस्बों से भी महिलाएं अब सोलो ट्रैवल की ओर कदम बढ़ा रही हैं। इंटरनेट मीडिया, डिजिटल भुगतान, आनलाइन रिव्यू प्लेटफार्म और सुरक्षित ग्रुप ट्रैवल विकल्पों ने उन्हें एक नई दुनिया से परिचित कराया है। पहले जहां जानकारी की कमी और सामाजिक झिझक बड़ी बाधा थी, वहीं अब इंटरनेट ने उन्हें विकल्प, आत्मविश्वास और प्रेरणा तीनों दिए हैं।

    solo trip

    (Image Source: AI-Generated)

    सैकड़ों प्रश्नों का एक उत्तर

    घूमना हर इंसान की स्वाभाविक इच्छा होती है। नई जगहें देखना, नई संस्कृति को समझना और रोजमर्रा की दिनचर्या से बाहर निकलना—यह सब हर किसी को आकर्षित करता है, लेकिन भारतीय समाज में लंबे समय तक महिलाओं के लिए अकेले घूमना एक तरह से ‘टैबू’ रहा है। अगर परिवार या पति के साथ जाएं तो स्वीकार्य, लेकिन अकेले यात्रा करने की बात आते ही सवाल उठने लगते हैं- ‘जरूरत क्या है?’, ‘सुरक्षित है या नहीं?’, ‘लोग क्या कहेंगे?’ यहीं पर सोलो ट्रैवलिंग का आधुनिक और व्यावहारिक रूप—विमेन ओनली ग्रुप टूर—एक संतुलित समाधान बनकर सामने आया है। इसमें महिलाएं अकेले नामांकन करती हैं, लेकिन यात्रा एक सुरक्षित, संगठित और समान विचारधारा वाली महिलाओं के समूह के साथ करती हैं। इससे उन्हें स्वतंत्र निर्णय लेने का अनुभव भी मिलता है और सुरक्षा का भरोसा भी। खासतौर पर छोटे शहरों और पारंपरिक पृष्ठभूमि से आने वाली महिलाओं के लिए यह माडल एक सहज और स्वीकार्य रास्ता साबित हो रहा है।

    बात आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की

    आज सोलो ट्रैवल को केवल घूमने तक सीमित नहीं देखा जाता। इसे महिलाओं के सशक्तीकरण का प्रतीक माना जा रहा है। जब कोई महिला अकेले यात्रा का निर्णय लेती है, तो वह दरअसल अपने लिए समय निकालने, अपनी पहचान को समझने और अपने डर को चुनौती देने का कदम उठाती है। इसके कई अन्य लाभ भी हैं—निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ती है, अलग पृष्ठभूमि की महिलाओं से जुड़कर एक सहयोगी नेटवर्क बनता है और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कई महिलाएं साझा करती हैं कि एक सोलो ट्रिप के बाद वे खुद को पहले से अधिक स्पष्ट, संतुलित और मजबूत महसूस करती हैं। उन्हें एहसास होता है कि वे केवल किसी की बेटी, पत्नी या मां नहीं, बल्कि स्वतंत्र पहचान वाला व्यक्तित्व भी हैं। पिछले कुछ वर्षों में छोटे शहरों और पारंपरिक परिवारों से आने वाली महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कई महिलाएं पहली बार अपने शहर से बाहर अकेले निकलती हैं, लेकिन सुरक्षित और सहयोगी वातावरण में कुछ ही दिनों में उनका आत्मविश्वास कई गुणा बढ़ जाता है।

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    ये हैं पसंदीदा गंतव्य

    लंबे अनुभव के आधार पर देखा गया है कि महिलाएं ऐसी जगहों को अधिक एक्सप्लोर करना पसंद करती हैं, जहां प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक गहराई और आत्मिक शांति का संतुलन हो। उदाहरण के लिए—लद्दाख, स्पीति, मेघालय, अंडमान जैसे प्राकृतिक गंतव्य; राजस्थान या कच्छ जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध स्थल; और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जापान, बाली, जार्जिया या यूरोप के सुरक्षित देश। महिलाएं केवल फोटो खिंचवाने या ‘टिक-मार्क’ टूरिज्म के लिए नहीं जातीं, बल्कि वे स्थानीय लोगों से जुड़ना, वहां का खानपान समझना और संस्कृति को महसूस करना अधिक पसंद करती हैं। उनके लिए यात्रा एक अनुभव है, जो भीतर तक असर छोड़ता है।

    सर्वोपरि रहे सुरक्षा

    सोलो ट्रैवल रोमांच से भरा होता है, लेकिन सुरक्षा सर्वोपरि है। तीन बातें हमेशा ध्यान रखनी चाहिए:

    • सही रिसर्च और प्लानिंग: जिस स्थान पर जा रही हैं, वहां की स्थानीय परिस्थितियों, मौसम, ट्रांसपोर्ट और आवास की विश्वसनीय जानकारी पहले से लें। आधिकारिक वेबसाइट, प्रमाणित रिव्यू और विश्वसनीय ट्रैवल प्लेटफार्म का सहारा लें।
    • लोकेशन और इमरजेंसी संपर्क: अपनी यात्रा का विवरण परिवार या विश्वसनीय मित्र के साथ साझा करें। मोबाइल में जरूरी नंबर सेव रखें और इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करें।
    • सजगता और आत्मविश्वास: अनजान जगहों पर सजग रहें। देर रात अनावश्यक जोखिम से बचें और अपने अंतर्ज्ञान पर भरोसा करें। अगर कोई स्थिति असहज लगे, तो तुरंत वहां से हट जाना बेहतर है।

    (लेखिका सोलो ट्रैवलर और जुगनी ट्रैवल की सीईओ हैं)

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