यूरोप की रहस्यमयी जगह, जिसके दरवाजे हैं महिलाओं के लिए पूरी तरह बंद; मादा जानवरों पर भी लागू होता है यही नियम
आज के दौर में जहां हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, वहीं क्या आप मानेंगे कि धरती ...और पढ़ें

ग्रीस के माउंट एथोस में 1000 साल से क्यों बैन हैं महिलाएं? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं उत्तरी ग्रीस के बीहड़ इलाकों में एक ऐसी जगह मौजूद है, जो आज भी आधुनिक दुनिया के कई नियमों से अछूती है। जी हां, यह जगह है 'माउंट एथोस' और सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले एक हजार सालों से ज्यादा समय से यहां किसी भी महिला को आने की अनुमति नहीं मिली है। आइए, यूरोप के इस अनोखे हिस्से के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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सिर्फ गिने-चुने लोगों को मिलती है एंट्री
भौगोलिक नजर से, माउंट एथोस ग्रीस के उत्तरी भाग में हल्किडिकी प्रायद्वीप के पूर्वी छोर पर स्थित है। भले ही यह ग्रीस गणराज्य का हिस्सा है, लेकिन इसे एक विशेष स्वायत्तता प्राप्त है। ग्रीस का संविधान स्वयं इसकी इस अनूठी स्थिति की रक्षा करता है।
लगभग 335 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस प्रायद्वीप में 20 प्रमुख मठ, कई छोटे आश्रम और चैपल हैं। पूरे क्षेत्र का प्रशासन 'कारयेस' नामक स्थान से चलाया जाता है। यह कोई आम पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि यहां आने के लिए विशेष अनुमति पत्र की जरूरत होती है और रोजाना सिर्फ गिने-चुने लोगों को ही एंट्री मिलती है।

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सदियों पुरानी 'अवाटॉन' परंपरा
माउंट एथोस की सबसे प्रमुख पहचान इसकी वह परंपरा है जिसे 'अवाटॉन' कहा जाता है। इस नियम के तहत महिलाओं का यहां आना सख्त मना है। बता दें, यह कोई हालिया नियम नहीं है, बल्कि बाइजेंटाइन साम्राज्य के समय से चला आ रहा है और सदियों से इसे पूरी तरह से मान्यता प्राप्त है।
ऑर्थोडॉक्स ईसाई धर्म की मान्यताओं के अनुसार, माना जाता है कि मदर मैरी इस प्रायद्वीप पर आई थीं और इसे अपना आध्यात्मिक उपवन घोषित किया था। यहां रहने वाले संन्यासियों का दृढ़ विश्वास है कि महिलाओं की अनुपस्थिति उनके ब्रह्मचर्य व्रत के पालन में सहायक होती है और इस स्थान की पवित्रता को बनाए रखती है।
यह प्रतिबंध इतना व्यापक है कि इसमें राष्ट्रीयता, धर्म या सामाजिक स्तर का कोई भेदभाव नहीं है और यह सभी महिलाओं पर लागू होता है। इतना ही नहीं, बिल्लियों जैसे कुछ अपवादों को छोड़कर, मादा जानवरों के प्रवेश पर भी रोक है।

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आज भी 1000 साल पुरानी जिंदगी जी रहे हैं भिक्षु
पूर्वी ऑर्थोडॉक्स ईसाई धर्म में माउंट एथोस का अत्यधिक महत्व है। यह दुनिया के सबसे अहम आध्यात्मिक केंद्रों में से एक है। यहां स्थापित कई मठों का इतिहास एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना है।
इन मठों की चारदीवारी के भीतर एक अनमोल ऐतिहासिक खजाना सुरक्षित है। इनमें बाइजेंटाइन काल की धार्मिक कलाकृतियां, मूर्तियां और प्राचीन दस्तावेज शामिल हैं। इन इमारतों का वास्तुकला शिल्प सदियों से लगभग अपरिवर्तित रहा है। इसके इसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए 1988 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया था।
शहरों की आपाधापी से दूर, यहां का जीवन पूरी तरह से अलग है। यहां रहने वाले भिक्षुओं का पूरा दिन प्रार्थना, शारीरिक श्रम और धार्मिक अध्ययन में बीतता है। उनकी दिनचर्या भोर से पहले ही शुरू हो जाती है। यहां आने वाले गिने-चुने आगंतुकों का कहना है कि एजियन सागर के ऊपर बसे इन मठों में समय मानो ठहर सा जाता है। आधुनिक तकनीक और बाहरी दुनिया के प्रभाव को यहां जानबूझकर सीमित रखा गया है।
ईसाइयों का परम पवित्र स्थल
यूरोप में शायद ही कोई दूसरी जगह हो जहां इतिहास, धर्म और एकांत का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिले। ईसाइयों के लिए यह परम पवित्र स्थल है, तो वहीं दुनिया के लिए यह एक ऐसा जीता-जागता उदाहरण है कि कैसे मध्ययुगीन परंपराएं आज भी जीवित रह सकती हैं। चाहे इसे एक आध्यात्मिक शरणस्थली माना जाए या कोई सांस्कृतिक अजूबा, माउंट एथोस यकीनन एक बेहद असाधारण स्थान है।
