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    पांडवों के नाम पर तो हैं, मगर महाभारत से नहीं है नाता! आखिर क्या है मामल्लपुरम के 5 रथों का असली रहस्य?

    Updated: Sat, 25 Apr 2026 04:05 PM (IST)

    तमिलनाडु के मामल्लपुरम में स्थित पंच रथ यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और प्रारंभिक द्रविड़ वास्तुकला के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। ...और पढ़ें

    मामल्लपुरम के 5 रथों का रहस्य (सौजन्य - https://mapacademy.io)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु के मामल्लपुरम में स्थित और यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल पंच रथ द्रविड़ वास्तुकला के प्रारंभिक और महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। पांडवों और द्रौपदी के नाम से प्रसिद्ध रथ-स्थान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित एक प्रमुख पर्यटन केंद्र है...

    Mahabalipuram UNESCO World Heritage

    (सौजन्य - https://mapacademy.io)

    तमिलनाडु के मामल्लपुरम में स्थित पांच एकाश्म, शैल-कटित ग्रेनाइट संरचनाओं के समूह को पंच रथ कहा जाता है। संस्कृत में इसका अर्थ है 'पांच रथ'। इन संरचनाओं का संबंध पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम से माना जाता है। इन्हें ईस्वी 630 से 668 के बीच तराशा गया था। ये मंदिर-रूप संरचनाएं प्रारंभिक द्रविड़ स्थापत्य के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। इनका नाम महाभारत के पांडवों और उनकी पत्नी द्रौपदी के नाम पर रखा गया है- अर्जुन रथ, भीम रथ, धर्मराज रथ, नकुल-सहदेव रथ और द्रौपदी रथ। हालांकि, इन मूल संरचनाओं का महाकाव्य से कोई ज्ञात संबंध नहीं है।

    एक शिला से तराशी गईं संरचनाएं

    Pancha Rathas

    (सौजन्य - https://mapacademy.io)

    विद्वानों का यह भी मानना है कि इन्हें संभवतः रथों के रूप में नहीं, बल्कि स्वतंत्र मंदिरों के रूप में बनाया गया था। इस परिसर में सिंह, हाथी और बैल की तीन बड़ी मूर्तियां भी शामिल हैं। इन संरचनाओं के विमानों की पहचान शाला, कूट और चंद्रशाला जैसे रूपाकारों से होती है, साथ ही पल्लव स्थापत्य की विशिष्ट डार्मर-आकृति वाली खिड़कियां भी इनमें दिखाई देती हैं।

    गीत गाया पत्थरों ने

    Pallava Architecture

    (सौजन्य - https://mapacademy.io)

    पांच रथों में से चार एक ही पंक्ति में स्थित हैं, जिससे संकेत मिलता है कि उन्हें ग्रेनाइट की एक ही लंबी शिला-श्रेणी से तराशा गया था, जो दक्षिणी छोर पर लगभग 49 मीटर लंबी और 12 मीटर ऊंची थी, तथा उत्तरी छोर पर लगभग 6 मीटर ऊंची रह जाती थी। बीच की दरारों का उपयोग संभवतः अलग-अलग संरचनाएं उभारने के लिए किया गया था। पांचवां रथ, जो बाकी रथों की पंक्ति में नहीं है, शायद पास की किसी अलग शिला से तराशा गया था। विद्वानों का मानना है कि ग्रेनाइट को ऊपर से नीचे की ओर काटा गया और नीचे बची हुई अनकटी चट्टान को सहारे के आधार के रूप में इस्तेमाल किया गया।

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