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मुखौटे वाला 'छऊ' नृत्य, GI टैग चित्रकारी और सरहुल का त्योहार... जानिए कितनी खास है झारखंड की जनजातीय संस्कृति

Updated: Mon, 31 Aug 2026 04:04 PM (IST)

झारखंड अपनी जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और परंपराओं के लिए मशहूर है, जिसमें झरने, वन्यजीव और अनूठी कलाएं शामिल हैं।

क्या बनाता है झारखंड को खास? (AI Generated Image)

क्या बनाता है झारखंड को खास? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के पूर्व में बसा झारखंड अपनी जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और परंपराओं के लिए जाना जाता है। इतना ही नहीं, ये अपने खनीजों, झरने और खान-पान के लिए भी मशहूर है। हालांकि, अक्सर लोग मान लेते हैं कि झारखंड में कुछ भी देखने जैसा नहीं है। अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो आइए जानें इस राज्य से जुड़ी कुछ खास बातें।  

झारखंड की खूबसूरती

झारखंड की सुंदरता वहां की पहाड़ियों, नदियों और झरनों में बसती है। यहां की राजधानी रांची को सिटी ऑफ वॉटरफॉल्स भी कहा जाता है। यहां हुंडरू, जोन्हा और दशम फॉल हैं, जिन्हें देखकर आप हैरान रह जाएंगे। इसके अलावा, नेतरहाट से सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा देखना बेहद शानदार एक्सपीरिएंस होता है। 

झारखंड में वन्य प्रेमियों के लिए भी काफी कुछ है। यहां के बेतला नेशनल पार्क में बाघों, हाथियों और कई अलग-अलग तरह के जानवर और पौधे देखे जा सकते हैं। 

झारखंड की संस्कृति और परंपराएं

झारखंड की जनजातीय परंपराएं और संस्कृति ही इस राज्य को खास बनाती हैं। यहां के लोग प्रकृति की पूजा करते हैं। प्रकृति के लिए आभार जाहिर करने के लिए यहां सरहुल पर्व मनाया जाता है, जिसमें साल के पेड़ों की पूजा की जाती है। इस त्योहार को मुंडा और संताल जनजातियां मनाती हैं। 

झारखंड में नचनी और छऊ जैसे लोक नृत्य भी किए जाते हैं, जो यहां की संस्कृति की झलक पेश करते हैं। छऊ नृत्य में चेहरे पर मुखौटा पहनकर पौराणिक कथाओं को पेश किया जाता है। यह नृत्य सैनिकों के युद्ध अभ्यास से शुरू हुआ था। वहीं, नचनी में महिला नृतक पुरुष नृतक रसिक के साथ मिलकर राधा-कृष्ण की कहानियां लोगों को दिखाते हैं। 

झारखंड की लोक कला

हजारीबाग की महिलाएं मिट्टी की दीवारों पर सोहराई और कोहबर चित्रकारी करती हैं। दीवारों पर बनाई जाने वाली इस चित्रकला को GI टैग भी हासिल है। छऊ नृत्य में पहना जाने वाला मुखौटा बनाना भी यहां की लोक कला का हिस्सा है। यहां के आदिवासी बांस और लकड़ियों से भी रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें और खूबसूरत डेकोरेशन पीस भी बनाते हैं। 

झारखंड का खान-पान

झारखंड का खाना सादा, आसानी से पचने वाला और काफी पौष्टिक होता है। यहां की डिशेज में स्थानीय चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। चावल और उड़द की दाल से बना धुस्का, आलू-चने की मसालेदार सब्जी के साथ परोसा जाता है। 

चावल के आटे से बना पिट्ठा और छिलका रोटी भी झारखंड के खान-पान का अहम हिस्सा है। इसके अलावा, महुए या चावल से बनने वाला ड्रिंक हंडिया यहां की जनजातीय संस्कृति का अहम हिस्सा है।