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सिर्फ कल्पना नहीं है 'मोगली' की कहानी, भारत के इस जंगल में सचमुच मिला था भेड़ियों के बीच पला एक इंसानी बच्चा

Published: Sat, 25 Jul 2026 05:25 PM (IST)Updated: Fri, 31 Jul 2026 07:31 PM (IST)

रुडयार्ड किपलिंग की मशहूर किताब 'द जंगल बुक' मध्य प्रदेश के सिवनी के जंगलों से प्रेरित थी।

किस जगह से प्रेरित है द जंगल बुक की कहानी? (Picture Courtesy: Instagram)

किस जगह से प्रेरित है द जंगल बुक की कहानी? (Picture Courtesy: Instagram)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बचपन में हम सभी ने द जंगल बुक जरूर देखा है। ये कार्टून हर बच्चे का फेवरेट हुआ करता था। ये कहानी काफी दिलचस्प थी। इसका मुख्य किरदार मोगली एक इंसान था, जिसे जंगल में भेड़ियों ने पाला था। 

जंगल में पला-बढ़ा ये बच्चा बिल्कुल जंगली जानवरों की तरह ही रहता और उन्हें अपना परिवार मानता था। ये कहानी सुनने में बिल्कुल काल्पनिक लगती है, लेकिन असल में इस कहानी के लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने एक असल घटना और मध्य प्रदेश के सिवनी के जंगलों से प्रेरणा लेकर ये कहानी लिखी थी। आइए जानें द जंगल बुक लिखे जाने की दिलचस्प कहानी। 

सिवनी के जंगलों से निकली कहानी

रुडयार्ड किपलिंग की कितबा में जिस जंगल, पहाड़ और नदियों का जिक्र मिलता है, वे कोई काल्पनिक जगहें नहीं हैं। ये सबकुछ मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के जंगलों से प्रेरणा लेकर लिखे गए हैं। आज सिवनी का यह इलाका पेंच टाइगर रिजर्व के नाम से जाना जाता है। 

इस किताब में वैनगंगा नदी का जिक्र मिलता है, जहां मोगली और दूसरे जानवर पानी पीने आते थे। ये कोई काल्पनिक नाम नहीं है, बल्कि ये नदी सचमुच सिओली में बहती है। इसकी तरह कहानी में और भी कई जगहों का नाम इस्तेमाल किया गया है, जो उस इलाके में सचमुच मौजूद हैं। 

असली मोगली की कहानी

किपलिंग की किताब में जिस मोगली की जिक्र किया गया है, वह काल्पनिक सा लगता है। भला कोई इंसानी बच्चा भेड़ियों के बीच कैसे पल सकता है, वो भी जंगल में? लेकिन आपको हैरानी होगी कि ये भी एक सच्ची घटना से प्रेरित है। दरअसल, साल 1831 में सिवनी जिले में एक गांव क पास एक इंसानी बच्चे को भेड़ियों की मांद से रेस्क्यू किया गया था। वह बच्चा न तो इंसानों की तरह बोलना जानता था और न ही चलना-फिरना। उसका व्यवहार बिल्कुल जानवरों जैसा था। 

इस घटना को ब्रिटिश अधिकारी सर विलियम हेनरी स्लीमैन ने अपनी रिपोर्ट और किताब में भी लिखा था। इसके अलावा, रॉबर्ट आर्मिटेज स्ट्रेनडेल की किताबों ने भी किपलिंग को सिवनी के जंगलों को और अच्छी तरह समझने में मदद की।

किपलिंग और सिवनी का नाता

रुडयार्ड किपलिंग ने देवास रियारस के दौरान सिवनी के इलाके को करीब से महसूस किया और जानवरों के बीच पले बच्चे के बारे में पढ़कर वे द जंगल बुक लिखने के लिए प्रेरित हुए। ये कहानी बच्चों को खूब पसंद आई, जिसपर बाद में कार्टून बने और फिल्में भी बनीं।