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    17,257 फीट पर है बद्रीनाथ से केदारनाथ तक का सबसे खतरनाक रास्ता, पढ़ें पनपतिया ट्रेक जाने का सही समय

    Updated: Mon, 30 Mar 2026 11:00 AM (IST)

    उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय की गोद में स्थित पनपतिया कोल ट्रेक बेहद खूबसूरत, लेकिन मुश्किल ट्रेक है। ...और पढ़ें

    उत्तराखंड का ताज कहलाता है पनपतिया कोल ट्रेक (Picture Courtesy: Instagram)

    उत्तराखंड का ताज कहलाता है पनपतिया कोल ट्रेक (Picture Courtesy: Instagram)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तराखंड की देवभूमि अपने भीतर कई रहस्य और रोमांच समेटे हुए है। इन्हीं में से एक है पनपतिया कोल ट्रेक, जिसे उत्तराखंड का ताज भी कहा जाता है। गढ़वाल हिमालय की गोद में स्थित यह दर्रा अपनी ऊंचाई और खूबसूरती के लिए जाना जाता है। 

    यह हिंदू धर्म के दो सबसे पावन घाम, बद्रीनाथ और केदारनाथ को भी एक रोमांचक ट्रेक मार्ग से जोड़ता है। आइए जानें इस ट्रेक को यह नाम कैसे मिला और अगर आप इस ट्रेक पर जाना चाहते हैं, तो कब जाना बेहतर है। 

    क्यों खास है पनपतिया का नाम?

    इस ट्रेक का नाम पनपतिया यहां फैले विशाल ग्लेशियर्स के कारण पड़ा है। प्राचीन काल में यह मार्ग केवल नक्शों तक सीमित नहीं था; बल्कि स्थानीय लोग और साधु-संत इसी मुश्किल रास्ते से होकर बद्रीनाथ और केदारनाथ के बीच की तीर्थ यात्रा पूरी करते थे। आज के दौर में, यह रास्ता दुनिया भर के एडवेंचर प्रेमियों के लिए साहस का एक बड़ा प्रतीक बन चुका है।

    panpatia Trek (1)

    (Picture Courtesy: Instagram)

    17,257 फीट की ऊंचाई पर प्रकृति से मिलन

    समुद्र तल से लगभग 17,257 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह ट्रेक आमतौर पर बद्रीनाथ से शुरू होकर केदारनाथ पर समाप्त होता है। इस सफर के दौरान ट्रेकर्स को माना गांव, घस्तोली, विशाल पनपतिया ग्लेशियर और मदमहेश्वर जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरना पड़ता है। यहां की निर्जन घाटियों और चमकते ग्लेशियरों के बीच वातावरण इतना शांत होता है कि इंसान खुद को प्रकृति के बेहद करीब महसूस करता है। यहां दुर्लभ वनस्पतियों और हिमालयी जीवों को देखना एक अलग ही अनुभव है।

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    चुनौतियों से भरा सफर

    पनपतिया कोल ट्रेक का रास्ता बर्फ के मैदानों, नुकीले पत्थरों और विशाल ग्लेशियरों से होकर गुजरता है। यह ट्रेक केवल अनुभवी ट्रेकर्स के लिए ही सही माना जाता है क्योंकि इसमें बर्फ की गहरी दरारें और तकनीकी क्लाइम्बिंग जैसी मुश्किल चुनौतियां शामिल हैं। इस मार्ग से दिखने वाले चाउखंभा और नीलकंठ चोटियों के अनोखा दृश्य किसी का भी मन मोह सकते हैं।

    panpatia Trek (2)

    (Picture Courtesy: Instagram)

    साल 2000 की ऐतिहासिक सफलता

    लंबे समय तक इस दुर्गम रास्ते को पार करना एक बड़ी चुनौती बना रहा। आधुनिक समय में इस मार्ग को खोजने की बड़ी सफलता साल 2000 में मिली। अंग्रेज पर्वतारोही मार्टिन मोरन ने नीलकंठ चोटी के पास एक अभियान का नेतृत्व किया था। वे सफलतापूर्वक पनपतिया हिमपात को पार करते हुए केदारनाथ की ओर से बाहर निकले, जो इस शिखर मार्ग को पूरा करने वाला पहला सफल प्रयास था।

    यात्रा का सही समय

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    (Picture Courtesy: Instagram)

    अगर आप इस रोमांचक सफर पर निकलना चाहते हैं, तो मई-जून का समय सबसे अच्छा माना जाता है जब बर्फ पिघलना शुरू होती है। इसके अलावा, मानसून के बाद सितंबर-अक्टूबर में भी मौसम साफ रहता है। हालांकि, सर्दियों और मानसून के दौरान यहां जाना बेहद जोखिम भरा है और हल्की-सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।