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    होटल में चेक-इन हमेशा 12 बजे और चेक-आउट 10 बजे ही क्यों होता है? इस पीछे का लॉजिक जानकर चौंक जाएंगे

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 12:11 PM (IST)

    होटलों में चेक-इन दोपहर 12 बजे और चेक-आउट सुबह 10-11 बजे होने के पीछे लॉजिस्टिक्स और ग्राहकों की सुविधा से जुड़े कारण हैं। ...और पढ़ें

    क्यों फिक्स होता है होटल का चेक-इन और चेक-आउट टाइम? (Picture Courtesy: Freepik)

    क्यों फिक्स होता है होटल का चेक-इन और चेक-आउट टाइम? (Picture Courtesy: Freepik)

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। किसी भी ट्रिप के लिए होटल बुक करते हुए, आपने एक बात पर गौर किया होगा कि हर जगह चेक-इन का समय दोपहर 12 बजे के बाद होता है और चेक-आउट का समय सुबह 10-11 बजे के बीच होता है। अगर आप कहीं सुबह जल्दी पहुंच रहे हों, तो होटल में पहले चेक-इन करने के लिए आपको एक्स्ट्रा चार्ज देना पड़ता है, लेकिन क्या आपने सोचा है कि चेक-इन और चेक-आउट का टाइम फिक्स क्यों है? 

    कभी-कभी ये सिस्टम बड़ा बेतुका-सा लगता है कि अगर कोई व्यक्ति सुबह होटल पहुंच रहा है, तो उसे चेक-इन करने के लिए इंतजार क्यों करवाया जा रहा है, लेकिन इसके पीछे ग्राहकों की सुविधा से जुड़ी ही वजह छिपी है। होटल के इस नियम के पीछे लॉजिस्टिक्स और मैनेजमेंट से जुड़े कारण हैं। आइए जानें इनके बारे में। 

    हाउसकीपिंग विंडो 

    होटल में चेक-आउट और चेक-इन के बीच का जो 3-4 घंटे का समय होता है, उसे हाउसकीपिंग विंडो कहा जाता है। जब कोई गेस्ट कमरा खाली करता है, तो दूसरे गेस्ट को सीधा वो रूम नहीं दिया जाता। इससे पहले उस कमरे की सफाई और रिस्टॉकिंग की जाती है। होटल के सभी कमरों की सफाई और हाउसकीपिंग के काम को आसान बनाने के लिए चेक-इन और चेक-आउट का समय फिक्स किया गया है। 

    इस दौरान बिस्तर की चादर, तकिए के कवर और तौलिए बदले जाते हैं। साथ ही, पूरे कमरे को डीप क्लीन और सैनिटाइज किया जाता है। कमरे के सभी उपकरण ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं, इसे भी चेक किया जाता है। इन सभी कामों के लिए पर्याप्त समय मिल सके, इसलिए चेक-आउट और चेक-इन के समय के बीच गैप रखा जाता है।  

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    ऑपरेशन्स और स्टाफ मैनेजमेंट

    होटल स्टाफ के लिए सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक का समय काफी बिजी होता है। इस दौरान फ्रंड डेस्क को पुराने मेहमानों का बिल सेटल करने उन्हें विदा करना होता है। अगर इसी समय चेक-इन टाइम भी रख दिया जाए, तो नए मेहमानों के डॉक्यूमेंट्स चेक करना और पुराने मेहमानों का बिल सेटल करने में काफी समय लग जाएगा और लॉबी में भीड़ भड़ जाएगी। इसके कारण गलती होने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए चेक-इन का समय 12-2 बजे के बीच और चेक-आउट का समय सुबह 10 बजे रखा जाता है। 

    क्या इसमें कोई छूट मिलती है?

    ज्यादातर होटल अपने रेगुलर कस्टमर्स या लॉयल्टी प्रोग्राम के सदस्यों को अर्ली चेक-इन या लेट चेक-आउट की सुविधा देते हैं, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि उस होटल में कितने कमरे अवेलेबल है। कुछ स्थितियों में एक्स्ट्रा चार्ज देकर भी अर्ली चेक-इन की सुविधा मिल जाती है।